हिंदी पत्रकारिता ( BA 6th Semester VOC Hindi Kuk ) ( समग्र )

हिंदी पत्रकारिता बी ए 6th सेमेस्टर (B23-VOC-340) इकाई 1 ▪️पत्रकारिता : अर्थ, परिभाषा, स्वरूप एवं महत्त्व ▪️पत्रकारिता के प्रकार /रूप / क्षेत्र या आयाम ▪️पत्रकारिता के उद्देश्य ▪️पत्रकारिता के मूल / अनिवार्य या आवश्यक तत्त्व ▪️लोकतंत्र में पत्रकारिता का दायित्व ▪️जनसंचार के रूप में पत्रकारिता का महत्त्व ▪️संपादन कला क्या है? संपादन कला के सामान्य … Read more

रंगमंच ( BA 4th Semester VOC Hindi Kuk ) ( समग्र )

BA – 2nd Year ( 4th Semester ) ( B23-VOC-215) इकाई 1 ▪️रंगमंच का अर्थ, स्वरूप व हिंदी रंगमंच ▪️नाटक और रंगमंच: परिभाषा, व्यापक अर्थ और एक-दूसरे के पूरक ▪️हिंदी रंगमंच का उद्भव और विकास-यात्रा ▪️हिंदी रंगमंच की प्रमुख शैलियाँ ▪️हिंदी का व्यावसायिक रंगमंच: अर्थ और विकास-यात्रा ▪️हिंदी रंगमंच: समस्याएँ, चुनौतियाँ और समाधान इकाई 2 … Read more

नव्यतर गद्य विधाएँ ( BA 6th Semester Kuk ) ( महत्वपूर्ण प्रश्न )

इकाई 1 ( व्याख्या हेतु ) ▪️माधवप्रसाद मिश्र के पत्र ▪️नीड़ का निर्माण फिर ( हरिवंशराय बच्चन ) pdf 👇 ▪️जीप पर सवार इल्लियाँ ( शरद जोशी ) pdf 👇 ▪️बयालीस के ज्वार की लहरों में ( कन्हैयालाल मिश्र प्रभाकर ) pdf 👇 ▪️पुरुष और परमेश्वर ( रामवृक्ष बेनीपुरी ) pdf👇 ▪️चीड़ों पर चाँदनी ( … Read more

हिंदी भाषा एवं संप्रेषण : व्यक्तित्व विकास ( Level 4) ( BA 4th Semester Kuk )

इकाई 1 ▪️व्यक्तित्व का अर्थ व विशेषताएँ ( प्रकृति या स्वरूप ) ▪️व्यक्तित्व का अर्थ और व्यक्तित्व-विकास के तत्त्व ( प्रभावित करने वाले तत्त्व ) ▪️व्यक्तित्व विकास की दिशाएँ या व्यक्तित्व के विविध आयाम ▪️व्यक्तित्व के विविध प्रकार ▪️स्वामी विवेकानंद की व्यक्तित्व विकास की अवधारणा ▪️व्यक्तित्व विकास में भाषा और साहित्य का योगदान इकाई 2 … Read more

हिंदी भाषा एवं संप्रेषण : मौखिक संप्रेषण ( Level 2) ( BA 2nd Semester Kuk )

इकाई 1 ▪️संप्रेषण : अर्थ, परिभाषा, विशेषताएँ /प्रकृति या स्वरूप ▪️संप्रेषण का अर्थ एवं इसके तत्त्व ( संप्रेषण की प्रक्रिया ) ▪️संप्रेषण का अर्थ एवं उसका महत्त्व / उपयोगिता / उद्देश्य ▪️प्रभावी संप्रेषण के लाभ या उपयोगिता ▪️संप्रेषण के उपकरण (परंपरागत और आधुनिक) ▪️संप्रेषण का अर्थ व प्रकार ( मौखिक व गैर-मौखिक/ अमौखिक संप्रेषण ) … Read more

हिंदी का व्यावहारिक व्याकरण ( Hindi Minor ) BA -1st Semester

विकारी शब्द : अर्थ व भेद – संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण, क्रिया ( Vikari Shabd : Arth Aur Bhed ) अविकारी शब्द : अर्थ व प्रकार उपसर्ग और प्रत्यय व्याकरणिक कोटियाँ : लिंग, वचन, पुरुष, कारक समास के भेद / प्रकार ( Samas Ke Bhed / Prakar ) सन्धि का अर्थ व प्रकार वाक्य : अर्थ, … Read more

हिंदी भाषा एवं संप्रेषण : लेखन संप्रेषण ( Level 3)

इकाई 1 लेखन-संप्रेषण का अर्थ, परिभाषा व गुण-दोष लेखन संप्रेषण के प्रकार लेखन संप्रेषण को प्रभावी बनाने के तत्त्व या कारक लेखन संप्रेषण का उद्देश्य व महत्त्व ( Objectives and Importance of Written Communication ) इकाई 2 पत्राचार का अर्थ व प्रकार व्यावसायिक पत्राचार : अर्थ, प्रकार व महत्त्व व्यावसायिक रिपोर्ट लेखन : अर्थ व … Read more

रीतिकाल के प्रसिद्ध कवि : केशव, चिंतामणि, मतिराम, भूषण, देव, पद्मकर

(1) केशवदास ( Keshavdas ) जीवन परिचय: केशवदास (1555-1617 ई.) रीतिकाल के प्रथम और सबसे महत्वपूर्ण कवियों में से एक थे। उनका जन्म ओरछा (मध्य प्रदेश) में एक सनाढ्य ब्राह्मण परिवार में हुआ था। वे बुंदेलखंड के राजा इंद्रजीत सिंह और बाद में राजा वीरसिंह देव के आश्रय में रहे। केशव को हिंदी साहित्य में … Read more

सूफ़ी काव्य धारा के प्रसिद्ध कवि : मुल्ला दाऊद, क़ुतुबन, मँझन, जायसी

(1) मुल्ला दाऊद जीवन परिचय: मुल्ला दाऊद (14वीं शताब्दी) हिंदी साहित्य के सूफी काव्य धारा के प्रथम कवि माने जाते हैं। उनका समय फिरोजशाह तुगलक (1351-1388 ई.) के शासनकाल से माना जाता है, और उनकी प्रमुख रचना चंदायन 1379 ई. में रचित हुई। मुल्ला दाऊद का जन्म और व्यक्तिगत जीवन के बारे में प्रामाणिक जानकारी … Read more

आदिकाल के प्रसिद्ध कवि : चंदबरदाई, नरपति नाल्ह, जगनिक, विद्यापति, स्वयंभू, अमीर खुसरो

(1) चंदबरदाई जीवन परिचय: चंदबरदायी या चंदवरदाई (12वीं शताब्दी) आदिकाल के सबसे प्रसिद्ध रासो कवि हैं, जिन्हें हिंदी साहित्य का प्रथम महाकवि माना जाता है। उनका जन्म और जीवनकाल ठीक-ठीक निर्धारित नहीं है, परंतु विद्वानों के अनुसार वे 12वीं शताब्दी में दिल्ली और अजमेर के चौहान शासक पृथ्वीराज तृतीय (1178-1192 ई.) के दरबारी कवि थे। … Read more

रीतिकाल की परिस्थितियाँ (1643-1843 ई.)

रीतिकाल (लगभग 1643-1843 ई., संवत 1700-1900) हिंदी साहित्य का वह युग है, जो श्रृंगारिक काव्य, काव्यशास्त्र और अलंकारों के प्रभुत्व के लिए जाना जाता है। यह काल भक्तिकाल की आध्यात्मिकता से भिन्न, दरबारी और सौंदर्यबोधी साहित्य पर केंद्रित था। रीतिकाल की साहित्यिक परिस्थितियाँ तत्कालीन राजनीतिक, सामाजिक-आर्थिक, धार्मिक और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि से गहराई से प्रभावित थीं। … Read more

संत कवि : नानक, रैदास और दादू दयाल

गुरु नानक (1469-1539 ) गुरु नानक, सिख धर्म के संस्थापक और भक्तिकाल के प्रमुख निर्गुण भक्ति कवि, हिंदी साहित्य में अपनी आध्यात्मिक गहनता, सामाजिक सुधार के संदेश और सरल काव्य शैली के लिए विख्यात हैं। उनका जन्म 1469 में तलवंडी (वर्तमान ननकाना साहिब, पाकिस्तान) में हुआ था। नानक की रचनाएँ मुख्य रूप से गुरु ग्रंथ … Read more

भक्तिकाल की परिस्थितियाँ

भक्तिकाल को हिंदी साहित्य का स्वर्ण युग कहा जाता है जिसकी समय-सीमा संवत 1375 से संवत 1700 (लगभग 1318-1643 ई.) तक मानी जाती है। यह काल भक्ति आंदोलन के उदय और प्रसार का काल था, जिसने हिंदी साहित्य को आध्यात्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से समृद्ध किया। भक्तिकाल की साहित्यिक परिस्थितियाँ राजनीतिक, सामाजिक, धार्मिक और … Read more

हिंदी साहित्य के इतिहास लेखन की समस्याएँ

हिंदी साहित्य के इतिहास लेखन की परंपरा 19वीं शताब्दी से प्रारंभ हुई, जिसमें विदेशी विद्वानों जैसे गार्सां द तासी और जॉर्ज ग्रियर्सन से लेकर भारतीय विद्वानों जैसे शिवसिंह सेंगर, मिश्र बंधु, रामचंद्र शुक्ल, हजारीप्रसाद द्विवेदी, डॉ. नगेन्द्र, रामकुमार वर्मा और गणपति चंद्र गुप्त ने योगदान दिया। इस परंपरा ने हिंदी साहित्य को व्यवस्थित और वैज्ञानिक … Read more

हिंदी के साहित्येतिहास लेखन की परंपरा

हिंदी साहित्य के इतिहास लेखन की परंपरा का विकास 19वीं और 20वीं शताब्दी में हुआ जिसमें विदेशी और भारतीय विद्वानों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया। यह परंपरा साहित्य को व्यवस्थित, विश्लेषणात्मक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से समझने का प्रयास है। कुछ उल्लेखनीय प्रयास निम्नलिखित हैं : गार्सां द तासी (Garcin de Tassy) फ्रेंच विद्वान गार्सां द तासी … Read more

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