पद्मावत : नागमती संदेश खण्ड ( Padmavat : Nagmati Sandesh Khand )
(1) फिरि-फिरि रोई, न कोई डोला। आधी राति विहंगम बोला ॥तैं फिरि-फिरि दाघे सब पाँखी । केहि दुःख रैनि ने लावसि आँखी ॥नागमती कारन के रोई। का सोवै जौं कंत बिछोई ॥ मन चित हुतें न बिसरं भरें। नेन कजल चखु रहे न मोरें ॥कहिसि जाति हाँ सिंघल दीपा । तेहि सेवाति कहँ नैना सीपा … Read more