गोरखबानी : संपादक – पीतांबर दत्त बढ़थ्वाल ( निर्धारित पदों की व्याख्या DU MA HINDI )

सबदी पद संख्या 1 ​बसती न सुन्न्य सुन्न्य न बसती अगम अगोचर ऐसा। गगन-सिषर महिं बालक बोलै ताका नाँव धरहुगे कैसै/कैसा ।। ​शब्दार्थ : ​व्याख्या: प्रस्तुत पद पीतांबर दत्त बर्थवाल द्वारा संकलित एवं संपादित ‘गोरख-बानी’ के अंतर्गत ‘सबदी’ प्रकरण से उद्धृत है। इस पद में गुरु गोरखनाथ ने उस परम तत्त्व (परमात्मा) के अलौकिक और … Read more

दोहाकोश ( सरहपाद ) निर्धारित पदों की व्याख्या ( DU MA HINDI )

ब्राह्मण पद 1 ​ब्रम्हेंहि म जानन्तहि भेउ। एवइ पढिअउ ए च्चउवेउ।। मट्ठी (पाणि कुस लई पठन्तं। घरहिं बइसी अगुग्गि हुणन्तं।। ​शब्दार्थ : ​व्याख्या: प्रस्तुत पद हिंदी के प्रथम कवि सरहपा द्वारा रचित ‘दोहकोष’ के ‘षट् दर्शन-खंडन’ प्रसंग से लिया गया है। इसमें कवि बाह्य आडंबरों, पाखंडों और केवल ऊपरी ज्ञान का कड़ा विरोध करते हुए … Read more

राजभाषा संकल्प 1968 के मुख्य प्रावधान

राजभाषा संकल्प, 1968 स्वतंत्र भारत के भाषाई इतिहास और प्रशासनिक नीति का एक अत्यंत महत्वपूर्ण दस्तावेज है। जब 1965 में संविधान के अनुसार अंग्रेजी की अनिवार्य अवधि समाप्त हो रही थी, तब देश के गैर-हिन्दी भाषी राज्यों, विशेषकर दक्षिण भारत में, तीव्र विरोध प्रदर्शन हुए। इस भाषाई गतिरोध को दूर करने, देश की अखंडता को … Read more

DSC1: हिंदी साहित्य का इतिहास (आदिकाल से रीतिकाल तक)

इकाई – 1: साहित्य इतिहास लेखन ▪️साहित्येतिहास एवं साहित्येतिहास दर्शन ▪️हिंदी साहित्येतिहास लेखन की परंपरा (i) हिंदी के साहित्येतिहास लेखन की परंपरा (ii) आचार्य शुक्ल से पूर्व हिंदी साहित्येतिहास लेखन ▪️हिंदी साहित्येतिहास : काल-विभाजन एवं नामकरण ▪️साहित्येतिहास का पुनर्लेखन (i) हिंदी साहित्य के इतिहास लेखन की समस्याएँ इकाई – 2: आदिकाल ▪️आदिकाल : काल-विभाजन एवं … Read more

DSC2: हिंदी कविता (आदिकाल से रीतिकाल तक)

इकाई – 1: आदिकाल से रीतिकाल तक : परिचय ▪️हिंदी कविता की विकास यात्रा : आदिकाल से रीतिकाल तक ▪️आदिकाल : काव्य प्रवृत्तियां एवं सामाजिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक परिस्थितियां👇 आदिकाल की परिस्थितियां ( Aadikal Ki Paristhitiyan ) ▪️भक्तिकाल : काव्य प्रवृत्तियां एवं सामाजिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक परिस्थितियां (i) भक्तिकाल की परिस्थितियाँ (ii) भक्तिकाल की राजनीतिक, सामाजिक, धार्मिक, … Read more

बैंकों में हिंदी का प्रयोग : आवश्यकता व नियम

बैंक केवल पैसों के लेन-देन का माध्यम नहीं हैं, बल्कि वे देश के आम नागरिक के दैनिक जीवन से जुड़े हैं। भारत में अधिकांश बड़े बैंक सार्वजनिक क्षेत्र के हैं, इसलिए भारतीय संविधान और राजभाषा नीति के अनुसार बैंकों में हिंदी का प्रयोग करना कानूनी और व्यावहारिक दोनों दृष्टियों से अनिवार्य है। ​1. बैंकों में … Read more

अनुस्मारक का अर्थ, परिभाषा व विशेषताएँ

अनुस्मारक का अर्थ एवं व्युत्पत्ति ​’अनुस्मारक’ शब्द संस्कृत के ‘अनु’ (पीछे/पुनः) उपसर्ग और ‘स्मारक’ (स्मरण कराने वाला) संज्ञा के संयोग से निर्मित हुआ है। अंग्रेजी प्रशासनिक शब्दावली में इसे ‘Reminder’ तथा सामान्य कार्यालयी बोलचाल में ‘स्मरण-पत्र’ कहा जाता है। ​प्रशासनिक कार्यप्रणाली में जब किसी मंत्रालय, विभाग, स्वायत्त निकाय या अधिकारी को पूर्व में भेजे गए … Read more

कबीर ( संपादक : हजारी प्रसाद द्विवेदी ) भाग 1 ( पद संख्या 160 से 184 )

पद : 160 ​लोका मति के भोरा रे। जो काशी तन तजै कबीरा, तौ रामहिं कहा निहोरा रे।। तब हम वैसे अब हम ऐसे, इहै जनमका लाहा रे।। राम-भगति-परि जाकौ हित चित, ताकौ अचिरज काहा रे।। गुर-प्रसाद साधकी संगति, जग जीते जाइ जुलाहा रे।। कहै कबीर सुनहु रे सन्तो, भ्रमि परै जिनि कोई रे।। जस … Read more

कबीर ( संपादक : हजारी प्रसाद द्विवेदी ) भाग 2 ( पद संख्या 185 से 209 )

पद : 185 कैसे दिन कटिहै जतन बताये जड्यो, एहि पार गंगा ओहि पार जमुना, बिचवाँ मडड्या हमकाँ छवाये जइयो । अँचरा फरिके कागज़ बनाइन, अपनी सुरतिया हियरे लिखाये जइयो। कहत कबीर सुनो भाई साधो, बहियाँ पकरिके रहिया बताये जड्यो। व्याख्या : इस पद में जीवात्मा अपने प्रियतम परमात्मा से विनती करती है कि आपके … Read more

कार्यालय आदेश का अर्थ, विशेषताएँ व प्रारूप

कार्यालय आदेश एक ऐसा प्रशासनिक पत्र या दस्तावेज है, जिसके माध्यम से किसी सरकारी या निजी कार्यालय के वरिष्ठ अधिकारी अपने अधीनस्थ कर्मचारियों को कोई विशेष निर्देश या आदेश जारी करते हैं। इसका पालन करना संबंधित कर्मचारियों के लिए अनिवार्य होता है। कार्यालय आदेश की मुख्य विशेषताएँ कार्यालय आदेश लिखने का ढंग कार्यालय आदेश लिखते … Read more

व्यावसायिक पत्राचार का अर्थ, आवश्यकता (महत्व ), अनिवार्य तत्व व प्रकार

1. व्यावसायिक पत्राचार का अर्थ व्यावसायिक पत्राचार का तात्पर्य उस लिखित संवाद से है जो व्यापारिक गतिविधियों को चलाने के लिए किया जाता है। इसके अंतर्गत पत्र, ईमेल, मेमो और रिपोर्ट शामिल हैं जो कंपनियों, ग्राहकों और विक्रेताओं के बीच भेजे जाते हैं। यह व्यवसाय की साख बनाने और विभिन्न पक्षों के बीच दूरी को … Read more

पद्मावत : स्तुति खण्ड ( मूल एवं व्याख्या / Padmavat : Stuti Khand ( Mool Evam Vyakhya )

पद 1 संवरौं आदि एक करतारू । जेइं जिउ दीन्ह कीन्ह संसारू ।1। कीन्हेसि प्रथम जोति परगासू । कीन्हेसि तेहिं पिरीति कबिलासू ।2। कीन्हेसि अगिनि पवन जल खेहा । कीन्हेसि बहुतइ रंग उरेहा ।3। कीन्हेसि धरती सरग पतारू । कीन्हेसि बरन बरन अवतारू ।4। कीन्हेसि सात दीप ब्रांडा । कीन्हेसि भुवन चौदहउ खंडा ।5। कीन्हेसि … Read more

पद्मावत : सिंहलद्वीप वर्णन खण्ड ( मूल एवं व्याख्या / Padmavat : Sinhaldvip Varnan Khand ( Mool Evam Vyakhya )

पद 1 सिंघल दीप कथा अब गावों । और सो पदुमिनी बरिन सुनावों।बरन क दरपन भांति बिसेखा । जेहि जस रूप सो तैसेड़ देखा।धिन, सो दीप जहं दीपक नारी । और सो पदुमिनी दड़अ अवतारी।सात दीप बरनहिं सब लोगू । एकौ दीप न ओहि सरि जोगू।दिया दीप नहिं तस उजियारा । सरां दीप सरि होड़ … Read more

पद्मावत : मानसरोदक खण्ड ( मूल व व्याख्या / Padmavat : Mansarodak Khand ( Mool Evam Vyakhya )

पद 1 मूल:एक देवस कौनिउं तिथि आई । मानसरोदक चली अन्हाई ।पद्मावति सब सखीं बोलाइ । जनु फुलवारि सबै चलि आईं ।कोइ चंपा कोइ कुंद सहेलीं । कोइ सुकेत करना रस बेलीं ।कोइ सुगुलाल सुदरसन राती । कोई बकौरि बकचुन विहंसाती ।कोई सु बोलसरि पुहुपावती । कोइ जाही जूही सेवती ।5।कोइ सोनजरद जेउं केसरि । … Read more

पद्मावत : नागमती वियोग खण्ड ( Padmavat : Nagmati Viyog Khand )

(1)नागमती चितउर पंथ हेरा। पिउ जो गए फिरि कीन्ह न फेरा।।नागरि नारि काहु बस परा । ते बियोहि मो सौं चितु हरा ।।सुवा काल होइ लेइगा पीऊ। पिऊ नहिं जात, जा बरु जीऊ ।।भएउ नरायन बाँवन करा। राज करत राजा बलि छरा ।।करन वान लीन्हेउ कै छंदू। विप्र रूप धरि झिलमिल इन्दू ।।मानत भोग गोपी … Read more

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