फीचर लेखन के आवश्यक तत्त्व / बातें या फीचर लेखन की प्रक्रिया / विधि

फीचर लेखन की प्रक्रिया / विधि या प्रविधि

फीचर लिखना केवल सूचनाओं को छापना नहीं है, बल्कि यह एक रचनात्मक कला है। जहाँ समाचार ‘उल्टे पिरामिड शैली’ (महत्वपूर्ण बात सबसे पहले) में लिखा जाता है, वहीं फीचर को एक कथा या कहानी की तरह (कथात्मक शैली में) लिखा जाता है। एक सफल, रोचक और बेहतरीन फीचर लिखने के लिए एक निश्चित प्रविधि या प्रक्रिया (तरीके) का पालन करना होता है, जिसे निम्नलिखित सरल चरणों में समझा जा सकता है:

1. विषय का चयन

फीचर लेखन का सबसे पहला और महत्त्वपूर्ण कदम एक अच्छे विषय का चुनाव करना है।

  • विषय ऐसा होना चाहिए जो ताज़ा हो, रोचक हो और पाठकों के जीवन या उनकी भावनाओं से जुड़ा हो।
  • विषय बहुत बड़ा या उलझा हुआ नहीं होना चाहिए। लेखक को यह भी देखना चाहिए कि क्या उस विषय पर उसके पास लिखने के लिए पर्याप्त सामग्री मिल पाएगी।

2. सामग्री संकलन और शोध

विषय तय होने के बाद हवा में फीचर नहीं लिखा जा सकता; उसके लिए ठोस जानकारी (तथ्य) इकट्ठी करनी पड़ती है।

  • इसके लिए लेखक विषय से जुड़ी किताबें पढ़ता है, पुराने अख़बार देखता है और इंटरनेट का सहारा लेता है।
  • एक अच्छे फीचर के लिए लेखक खुद मौके पर जाता है और उस विषय से जुड़े लोगों के इंटरव्यू लेता है, ताकि फीचर में प्रामाणिकता आ सके।

3. रूपरेखा या ढांचा तैयार करना

सामग्री इकट्ठी करने के बाद, लिखने से पहले फीचर का एक ‘खाका’ (Blueprint) दिमाग या कागज़ पर बना लेना चाहिए।

  • लेखक को यह तय करना होता है कि फीचर की शुरुआत कहाँ से होगी, बीच में कौन-से आँकड़े या कहानियाँ डाली जाएंगी, और अंत कैसे किया जाएगा। रूपरेखा बनाने से फीचर भटकता नहीं है।

4. आकर्षक आमुख या शुरुआत

फीचर की शुरुआत (इंट्रो ) बहुत ही आकर्षक और दमदार होनी चाहिए, क्योंकि अगर शुरुआत बोरिंग हुई तो पाठक उसे आगे नहीं पढ़ेगा।

  • फीचर की शुरुआत किसी चौंकाने वाले आँकड़े, किसी मशहूर कहावत, किसी व्यक्ति की कहानी (किस्से) या पाठकों से कोई सीधा सवाल पूछकर की जा सकती है।
  • शुरुआत ऐसी होनी चाहिए जो पाठक के मन में आगे पढ़ने की उत्सुकता पैदा कर दे।

5. विषय-विस्तार या मुख्य कलेवर

यह फीचर का सबसे बड़ा और मुख्य हिस्सा होता है। यहाँ लेखक विषय को विस्तार से समझाता है।

  • इसमें जानकारी को उबाऊ रिपोर्ट की तरह नहीं, बल्कि एक दिलचस्प कहानी की तरह पिरोकर पेश किया जाता है।
  • इसे उबाऊ होने से बचाने के लिए छोटे-छोटे पैराग्राफ का इस्तेमाल किया जाता है।
  • लोगों के ‘उद्धरण’ और घटनाओं के आँखों-देखे वर्णन से इस हिस्से को रोचक बनाया जाता है। इस बात का ध्यान रखा जाता है कि एक पैराग्राफ दूसरे से जुड़ा रहे यानी भाषा में प्रवाह हो |

6. प्रभावशाली समापन

फीचर का अंत समाचार की तरह अचानक या अधूरा नहीं होना चाहिए।

  • समापन ऐसा होना चाहिए जो पाठक के मन पर एक गहरा प्रभाव छोड़े।
  • अंत में पूरे फीचर का निचोड़ होना चाहिए। इसे किसी गंभीर सवाल, भविष्य की किसी उम्मीद या किसी विचारोत्तेजक बात के साथ खत्म किया जा सकता है ताकि पाठक फीचर पढ़ने के बाद भी उस पर विचार करता रहे।

7. संपादन और पुनरावलोकन

फीचर लिखने के बाद उसे तुरंत प्रकाशन के लिए नहीं भेजना चाहिए। एक अच्छे लेखक को खुद अपना आलोचक बनना पड़ता है।

  • इस चरण में लेखक पूरे फीचर को दोबारा पढ़ता है।
  • वह व्याकरण या स्पेलिंग की गलतियाँ सुधारता है, फालतू और गैर-ज़रूरी शब्दों को काटता है, और यह सुनिश्चित करता है कि फीचर का शीर्षक छोटा और आकर्षक हो।

निष्कर्ष

निष्कर्षतः यह कहा जा सकता है कि फीचर लेखन कोरी कल्पना नहीं है, बल्कि सूचनाओं को भावनाओं और रोचकता की चाशनी में लपेटकर प्रस्तुत करने की एक व्यवस्थित कला है। एक उत्कृष्ट फीचर के निर्माण के लिए सही विषय के चयन से लेकर, गहरे शोध, आकर्षक शुरुआत, सुगठित मुख्य कलेवर और प्रभावशाली समापन जैसी वैज्ञानिक प्रविधि (प्रक्रिया) से गुजरना पड़ता है। इसी विधि का कड़ाई से पालन करके एक लेखक किसी अत्यंत साधारण से विषय को भी पाठकों के लिए एक यादगार और मनोरंजक लेख में बदल सकता है।

Leave a Comment

error: Content is proteced protected !!