प्रेमचंद के फटे जूते ( हरिशंकर परसाई )/ Premchand Ke Phate Joote ( Harishankar Parsai )

( यहाँ NCERT की कक्षा 9वीं की हिंदी की पाठ्य पुस्तक ‘क्षतिज भाग 1’ में संकलित ‘प्रेमचंद के फटे जूते ( हरिशंकर परसाई )’ अध्याय के मूल पाठ तथा अभ्यास के प्रश्नों को दिया गया है | ) प्रेमचंद का एक चित्र मेरे सामने है, पत्नी के साथ फ़ोटो खिंचा रहे हैं। सिर पर किसी … Read more

नाना साहब की पुत्री देवी मैना को भस्म कर दिया गया ( चपला देवी )

( यहाँ NCERT की कक्षा 9वीं की हिंदी की पाठ्य पुस्तक ‘क्षतिज भाग 1’ में संकलित ‘नाना साहब की पुत्री देवी मैना को भस्म कर दिया गया’ अध्याय के मूल पाठ तथा अभ्यास के प्रश्नों को दिया गया है | ) सन् 1857 ई. के विद्रोही नेता धुंधूपंत नाना साहब कानपुर में असफल होने पर … Read more

साँवले सपनों की याद ( जाबिर हुसैन )/ Sanwle Sapnon Ki Yad ( Zabir Husain )

( यहाँ NCERT की कक्षा 9वीं की हिंदी की पाठ्य पुस्तक ‘क्षतिज भाग 1’ में संकलित ‘साँवले सपनों की याद’ अध्याय के मूल पाठ तथा अभ्यास के प्रश्नों को दिया गया है | ) सुनहरे परिंदों के खूबसूरत पंखों पर सवार साँवले सपनों का एक हुजूम मौत की खामोश वादी की तरफ़ अग्रसर है। कोई … Read more

उपभोक्तावाद की संस्कृति ( श्यामाचरण दुबे )

( यहाँ NCERT की कक्षा 9वीं की हिंदी की पाठ्य पुस्तक ‘क्षतिज भाग 1’ में संकलित ‘उपभोक्तावाद की संस्कृति’ अध्याय के मूल पाठ तथा अभ्यास के प्रश्नों को दिया गया है | ) धीरे-धीरे सब कुछ बदल रहा है। एक नई जीवन-शैली अपना वर्चस्व स्थापित कर रही है। उसके साथ आ रहा है एक नया … Read more

हिंदी ( कक्षा 9) — क्षितिज भाग 1 और कृतिका भाग 1

यहाँ NCERT की कक्षा 9वीं की हिंदी की पाठ्य-पुस्तक ‘क्षितिज भाग 1’ में संकलित सभी अध्यायों का मूल पाठ, कविताओं की व्याख्या और अभ्यास के प्रश्न दिए गए हैं जो विद्यार्थियों के लिए परीक्षापयोगी होंगे | गद्य खंड (1) दो बैलों की कथा ( मुंशी प्रेमचंद) / Do Bailon Ki Katha ( Munshi Premchand ) … Read more

ल्हासा की ओर ( राहुल सांकृत्यायन )/ Lhasa Ki Or ( Rahul Sankrityayan )

( यहाँ NCERT की कक्षा 9वीं की हिंदी की पाठ्य पुस्तक ‘क्षतिज भाग 1’ में संकलित ‘ल्हासा की ओर’ अध्याय के मूल पाठ तथा अभ्यास के प्रश्नों को दिया गया है | ) वह नेपाल से तिब्बत जाने का मुख्य रास्ता है। फरी-कलिङ्पोङ् का रास्ता जब नहीं खुला था, तो नेपाल ही नहीं हिंदुस्तान की … Read more

दो बैलों की कथा ( मुंशी प्रेमचंद) / Do Bailon Ki Katha ( Munshi Premchand )

( यहाँ NCERT की कक्षा 9वीं की हिंदी की पाठ्य पुस्तक ‘क्षतिज भाग 1’ में संकलित ‘दो बैलों की कथा’ अध्याय के मूल पाठ तथा अभ्यास के प्रश्नों को दिया गया है | ) जानवरों में गधा सबसे ज्यादा बुद्धिमान समझा जाता है। हम जब किसी आदमी को पहले दर्जे का बेवकूफ कहना चाहते हैं, … Read more

कबीरदास ( एम ए तृतीय सेमेस्टर ) पेपर – 3 ( M24-HIN-303 / DEC – 3) ( KUK )

इकाई 1 ▪️व्याख्या हेतु : कबीर ग्रंथावली ( संपादक हजारी प्रसाद द्विवेदी पद संख्या 65-150) इकाई 2 ▪️भक्ति आंदोलन : उद्भव एवं विकास ( Bhakti Andolan : Udbhav Evam Vikas ) ▪️भक्तिकाल की परिस्थितियाँ ▪️ संतकाव्य का वैचारिक आधार ▪️संतकाव्य परम्परा ▪️ संतकाव्य की प्रमुख प्रवृत्तियाँ ▪️संतकाव्य की प्रासंगिकता ▪️कबीरदास का साहित्यिक परिचय ( Kabirdas … Read more

मध्यकालीन हिंदी काव्य ( एम ए तृतीय सेमेस्टर ) पेपर – 2 ( M24-HIN-302 / CC 10 ) ( KUK )

इकाई 1 ▪️ केवल व्याख्या के लिए : पद्मावत ( मानसरोदक खंड, नागमती विरह खंड ) इकाई 2 ▪️ कबीर ▪️कबीरदास का साहित्यिक परिचय ( Kabirdas Ka Sahityik Parichay ) ▪️कबीर की भक्ति-भावना ( Kabir Ki Bhakti Bhavna ) ▪️कबीर की रहस्य-साधना ( रहस्यानुभूति ) / कबीर का रहस्यवाद ▪️कबीर की सामाजिक चेतना ( Kabir … Read more

आचार्य शुक्ल से पूर्व हिंदी साहित्येतिहास लेखन

हिंदी साहित्य का इतिहास आज जिस विकसित और वैज्ञानिक रूप में हमारे सामने उपस्थित है, वह आचार्य रामचंद्र शुक्ल के (1900–1941) प्रयासों का परिणाम है। किंतु उनके पहले भी हिंदी साहित्य का संकलन, वर्गीकरण और विवरण गंभीरता से किया जा रहा था। 19वीं सदी और 20वीं सदी के पूर्वार्ध में हिंदी भाषा और साहित्य के … Read more

आचार्य रामचंद्र शुक्ल से पूर्व हिंदी आलोचना

आचार्य रामचंद्र शुक्ल से पूर्व हिंदी आलोचना एक स्वतंत्र, विकसित और वैज्ञानिक विधा के रूप में स्थापित नहीं हुई थी। यद्यपि हिंदी साहित्य का इतिहास अत्यंत पुराना है, पर आलोचना की अवधारणा आरंभिक स्तर पर ही थी। यह आलोचना कभी धार्मिक टिप्पणियों, कभी काव्य-शास्त्रीय व्याख्याओं, तो कभी भाषा और समाज-सुधार संबंधी लेखों के रूप में … Read more

आचार्य रामचंद्र शुक्ल से पूर्व हिंदी निबंध लेखन की स्थिति

हिंदी साहित्य के इतिहास में आचार्य रामचंद्र शुक्ल (1884-1941) एक युगप्रवर्तक विद्वान के रूप में प्रतिष्ठित हैं। उनकी कृति ‘हिंदी साहित्य का इतिहास’ (1929) न केवल ऐतिहासिक दृष्टि का बोध कराती है, बल्कि आलोचनात्मक मानदंड भी स्थापित करती है। उनके निबंध—चिंतनशील, व्यंग्यात्मक, विचारप्रधान और आलोचनात्मक—हिंदी गद्य की एक नई ऊँचाई को चिह्नित करते हैं। किंतु … Read more

आचार्य रामचंद्र शुक्ल की काव्य संबंधी आलोचना

आचार्य रामचंद्र शुक्ल हिंदी साहित्य की आलोचना के क्षेत्र में एक युगपुरुष के रूप में जाने जाते हैं। उनका जन्म 4 अक्टूबर 1884 को उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले के अगौना गांव में हुआ था। उनके पिता चंद्रबली शुक्ल एक कानूनगो थे, और परिवार की आर्थिक स्थिति सामान्य थी। शुक्ल जी की शिक्षा मिश्रित रही—उन्होंने … Read more

काव्य में रहस्यवाद (निबन्ध) : आचार्य रामचन्द्र शुक्ल / Kavya Mein Rahasyavaad (Nibandh) : Acharya Ramchandra Shukla

[यह निंबध केवल इस उद्देश्य से लिखा गया कि ‘रहस्यवाद’ या ‘छायावाद’ की कविता के संबंध में भ्रांतिवश या जानबूझकर जो अनेक प्रकार की बे सिर पैर की बातों का प्रचार किया जाता है, वह बंद हो। कोई कहता है’यही वर्तमन युग की कविता है’, कोई कहता है’इसमें आजकल की आकांक्षाएँ भरी रहती हैं’ और … Read more

साधारणीकरण और व्यक्ति-वैचित्र्यवाद (निबन्ध) : आचार्य रामचन्द्र शुक्ल

किसी काव्य का श्रोता या पाठक जिन विषयों को मन में लाकर रति, करुणा, क्रोध, उत्साह इत्यादि भावों तथा सौंदर्य, रहस्य, गांभीर्य आदि भावनाओं का अनुभव करता है, वे अकेले उसी के हृदय से संबंध रखनेवाले नहीं होते; मनुष्य मात्र की भावात्मक सत्ता पर प्रभाव डालनेवाले होते हैं। इसी से उक्त काव्य को एक साथ … Read more

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