काव्य में लोक-मंगल की साधनावस्था : आचार्य रामचन्द्र शुक्ल / Kavya Mein Lok-Mangal Ki Sadhanavastha : Acharya Ramchandra Shukla

तदेजति तन्नैजति—ईशावास्योपनिषद् आत्मबोध और जगद्बोधा के बीच ज्ञानियों ने गहरी खाई खोदी पर हृदय ने कभी उसकी परवा न की; भावना दोनों को एक ही मनकर चलती रही। इस जगत् के बीच जिस आनंद मंगल की विभूति का साक्षात्कार होता रहा उसी के स्वरूप की नित्य और चरम भावना द्वारा भक्तों के हृदय में भगवान् … Read more

क्रोध (निबन्ध) : आचार्य रामचन्द्र शुक्ल / Krodh (Nibandh) : Acharya Ramchandra Shukla

क्रोध दुःख के चेतन कारण के साक्षात्कार या अनुमान से उत्पन्न होता है। साक्षात्कार के समय दुःख और उसके कारण के सम्बन्ध का परिज्ञान आवश्यक है। तीन चार महीने के बच्चे को कोई हाथ उठा कर मार दे तो उसने हाथ उठाते तो देखा है पर अपनी पीड़ा और उस हाथ उठाने से क्या सम्बन्ध … Read more

आचार्य रामचंद्र शुक्ल ( एम ए प्रथम सेमेस्टर ) पेपर -5 ( KUK )

इकाई 1 ▪️उत्साह : आचार्य रामचंद्र शुक्ल ( Utsah : Acharya Ramchandra Shukla ) ▪️लोभ और प्रीति (निबन्ध) : आचार्य रामचन्द्र शुक्ल / Lobh Aur Preeti (Nibandh) : Acharya Ramchandra Shukla ▪️क्रोध (निबन्ध) : आचार्य रामचन्द्र शुक्ल / Krodh (Nibandh) : Acharya Ramchandra Shukla ▪️काव्य में लोक-मंगल की साधनावस्था : आचार्य रामचन्द्र शुक्ल / Kavya … Read more

लोभ और प्रीति (निबन्ध) : आचार्य रामचन्द्र शुक्ल / Lobh Aur Preeti (Nibandh) : Acharya Ramchandra Shukla

जिस प्रकार सुख या आनंद देनेवाली वस्तु के संबंध में मन की ऐसी स्थिति को जिसमें उस वस्तु के अभाव की भावना होते ही प्राप्ति, सान्निध्य या रक्षा की प्रबल इच्छा जग पड़े, लोभ कहते हैं। दूसरे की वस्तु का लोभ करके उसे लोग लेना चाहते हैं, अपनी वस्तु का लोभ करके उसे लोग देना … Read more

फिर आई फ़स्ल-ए-गुल फिर ज़ख़्म-ए-दिल रह रह के पकते हैं ( भारतेन्दु हरिश्चन्द्र )

ज़ख़्म-ए-दिल रह रह के पकते हैंमगर दाग़-ए-जिगर पर सूरत-ए-लाला लहकते हैं नसीहत है अबस नासेह बयाँ नाहक़ ही बकते हैंजो बहके दुख़्त-ए-रज़ से हैं वो कब इन से बहकते हैं कोई जा कर कहो ये आख़िरी पैग़ाम उस बुत सेअरे आ जा अभी दम तन में बाक़ी है सिसकते हैं न बोसा लेने देते हैं … Read more

अंधेर नगरी : भारतेंदु हरिश्चंद्र / Andher Nagri : Bharatendu Harishchandra

प्रथम दृश्य(वाह्य प्रान्त) (महन्त जी दो चेलों के साथ गाते हुए आते हैं)सब : राम भजो राम भजो राम भजो भाई।राम के भजे से गनिका तर गई,राम के भजे से गीध गति पाई।राम के नाम से काम बनै सब,राम के भजन बिनु सबहि नसाई ॥राम के नाम से दोनों नयन बिनुसूरदास भए कबिकुलराई।राम के नाम … Read more

नये जमाने की मुकरी : भारतेंदु हरिश्चंद्र

भारतेन्दु हरिश्चंद्र की मुकरियाँ 1 सब गुरुजन को बुरो बतावै ।अपनी खिचड़ी अलग पकावै ।भीतर तत्व न झूठी तेजी ।क्यों सखि साजन ? नहिं अँगरेजी । 2 तीन बुलाए तेरह आवैं ।निज निज बिपता रोइ सुनावैं ।आँखौ फूटे भरा न पेट ।क्यों सखि साजन ? नहिं ग्रैजुएट । 3 सुंदर बानी कहि समुझावै ।बिधवागन सों … Read more

वैदिकी हिंसा हिंसा न भवति : भारतेंदु हरिश्चंद्र / Vaidiki Hinsa Hinsa Na Bhavati : Bharatendu Harishchandra

वैदिकी हिंसा हिंसा न भवति : प्रहसन नांदी दोहा – बहु बकरा बलि हित कटैं, जाके। बिना प्रमान।सो हरि की माया करै, सब जग को कल्यान ।। सूत्रधार और नटी आती हैं,सूत्रधार : अहा हा! आज की संध्या की कैसी शोभा है। सब दिशा ऐसा लाल हो रही है, मानो किसी ने बलिदान किया है … Read more

बंदर सभा ( भारतेन्दु हरिश्चंद्र )/ Bandar Sabha : Bharatendu Harishchandra

आना राजा बन्दर का बीच सभा के, सभा में दोस्तो बन्दर की आमद आमद है। गधे औ फूलों के अफसर जी आमद आमद है। मरे जो घोड़े तो गदहा य बादशाह बना। उसी मसीह के पैकर की आमद आमद है। व मोटा तन व थुँदला थुँदला मू व कुच्ची आँख व मोटे ओठ मुछन्दर की … Read more

स्वर्ग में विचार-सभा का अधिवेशन ( हिंदी निबंध ) : भारतेंदु हरिश्चंद्र

स्‍वामी दयानन्‍द सरस्‍वती और बाबू केशवचन्‍द्रसेन के स्‍वर्ग में जाने से वहां एक बहुत बड़ा आंदोलन हो गया। स्‍वर्गवासी लोगों में बहुतेरे तो इनसे घृणा करके धिक्‍कार करने लगे और बहुतेरे इनको अच्‍छा कहने लगे। स्‍वर्ग में भी ‘कंसरवेटिव’ और ‘लिबरल’ दो दल हैं। जो पुराने जमाने के ऋषि-मुनि यज्ञ कर-करके या तपस्‍या करके अपने-अपने … Read more

भारतेन्दु हरिश्चंद्र( एम ए प्रथम सेमेस्टर ) पेपर -5 ( KUK )

इकाई 1 व्याख्या के लिए :👇 ▪️प्रेम सरोवर ▪️बंदर सभा ( भारतेन्दु हरिश्चंद्र )/ Bandar Sabha : Bharatendu Harishchandra ▪️नये जमाने की मुकरी : भारतेंदु हरिश्चंद्र ▪️ स्फुट रचना ( गज़ल 1) ▪️फिर आई फ़स्ल-ए-गुल फिर ज़ख़्म-ए-दिल रह रह के पकते हैं ( भारतेन्दु हरिश्चन्द्र ) इकाई 2 ▪️अंधेर नगरी : भारतेंदु हरिश्चंद्र / Andher … Read more

भारतवर्ष की उन्नति कैसे हो सकती है (हिंदी निबंध ) : भारतेंदु हरिश्चंद्र

आज बड़े आनंद का दिन है कि छोटे से नगर बलिया में हम इतने मनुष्यों को एक बड़े उत्साह से एक स्थान पर देखते हैं। इस अभागे आलसी देश में जो कुछ हो जाए वही बहुत है। बनारस ऐसे-ऐसे बड़े नगरों में जब कुछ नहीं होता तो हम यह न कहेंगे कि बलिया में जो … Read more

लोकतंत्र में पत्रकारिता का दायित्व

लोकतंत्र में पत्रकारिता को समाज का चौथा स्तंभ कहा जाता है, क्योंकि यह शासन–प्रशासन, जनता और सत्ता के बीच सेतु का कार्य करती है। लोकतांत्रिक व्यवस्था जनता की सहभागिता पर आधारित होती है और जनता तभी सही निर्णय ले सकती है जब उसे सत्य, निष्पक्ष और संपूर्ण जानकारी प्राप्त हो। पत्रकारिता का दायित्व केवल समाचार … Read more

देवनागरी लिपि का मानकीकरण

देवनागरी लिपि भारत की प्रमुख लिपियों में से एक है, जिसका उपयोग हिंदी, संस्कृत, मराठी, नेपाली आदि भाषाओं के लेखन के लिए होता है। यह लिपि प्राचीन ब्राह्मी लिपि की उत्तरी-शैली से विकसित हुई है | यह लगभग 8वीं–10वीं शताब्दी के आसपास आधुनिक रूप ले चुकी थी। समय के साथ, क्षेत्र, समय और प्रयोजन के … Read more

प्रूफ शोधन : अर्थ, परिभाषा, महत्त्व व प्रक्रिया

पत्रकारिता का मूल उद्देश्य सत्य, सटीकता और स्पष्टता के साथ सूचना को जनता तक पहुँचाना है। मीडिया चाहे प्रिंट हो या डिजिटल—समाचार पत्र, पत्रिकाएँ, वेब पोर्टल, विज्ञापन, रिपोर्ट, संपादकीय, फीचर, भाषण या पुस्तकें—सभी में भाषा और तथ्यात्मक शुद्धता सर्वोपरि मानी जाती है। यदि समाचार में भाषा की त्रुटियाँ हों, वर्तनी गलत हो, अर्थ अस्पष्ट हो … Read more

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