आदिकाल / वीरगाथा काल की प्रमुख प्रवृत्तियाँ ( Aadikal / Veergathakal Ki Pramukh Visheshtaen )

हिंदी साहित्य के इतिहास को तीन भागों में बांटा जा सकता है – आदिकाल, मध्यकाल और आधुनिक काल | सम्वत 1050 से सम्वत 1375 तक का साहित्य आदिकाल के नाम से जाना जाता है | आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने इस काल को वीरगाथा काल की संज्ञा दी है | परंतु परंतु इस काल में मिली … Read more

काव्य के प्रमुख तत्त्व ( Kavya Ke Pramukh Tattv )

काव्य की विभिन्न परिभाषाओं का अध्ययन करने पर काव्य के चार प्रमुख तत्त्व सामने आते हैं – भाव तत्त्व, कल्पना तत्त्व, बुद्धि तत्त्व और शैली तत्त्व | कविता के लिए यह सभी तत्त्व आवश्यक हैं परंतु अधिकांश विद्वान भाव तत्त्व और शैली तत्त्व को प्रमुख मानते हैं | क्योंकि अनुभूति के बिना कविता निस्सार और … Read more

काव्य : अर्थ, परिभाषा एवं स्वरूप ( बी ए हिंदी – प्रथम सेमेस्टर )( Kavya ka Arth, Paribhasha Avam Swaroop )

काव्य – अभिनव गुप्त ने काव्य के विषय में लिखा है ‘कवनीय काव्यम’ अर्थात जो कुछ वर्णनीय है, वही काव्य है | अंग्रेजी भाषा में कवि का पर्याय शब्द ‘Poet’ है जिसका अर्थ है – निर्माता या रचनकर्त्ता | अंग्रेजी में काव्य को ‘Poem’ कहते हैं जिसका अर्थ है – निर्माण या रचना | इस … Read more

डॉ धर्मवीर भारती का साहित्यिक परिचय ( Dr Dharamvir Bharati Ka Sahityik Parichay )

जीवन परिचय – डॉ धर्मवीर भारती प्रयोगवादी कविता के प्रमुख कवि थे | इनका जन्म 25 दिसंबर, 1926 को इलाहाबाद में हुआ | इनके पिता का नाम श्री चिरंजीव लाल वर्मा तथा माता का नाम श्रीमती चंदा देवी था | इन्होने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से हिंदी विश्वविद्यालय में पीएचडी की उपाधि प्राप्त की तथा इसी विश्वविद्यालय … Read more

काव्य गुण : अर्थ, परिभाषा और प्रकार ( Kavya Gun : Arth, Paribhasha Aur Swaroop )

काव्य गुण – काव्य के सौंदर्य एवं अभिव्यंजना शक्ति को बढ़ाने वाले तत्त्वों को काव्य गुण कहा जाता है | डॉ नगेन्द्र के अनुसार – “गुण काव्य के उन उत्कर्ष साधक तत्वों को कहते हैं जो मुख्य रूप से रस के और गौण रूप से शब्दार्थ के नित्य धर्म हैं |” काव्य गुणों की संख्या … Read more

छंद ( Chhand )

दोहा छंद ( Doha Chhand ) लक्षण – दोहा मात्रिक अर्द्धसम छंद है | इस छंद में कुल 4 चरण होते हैं | विषम चरणों में ( पहले और तीसरे चरण में ) 13 -13 और सम चरणों ( दूसरे और चौथे चरणों में ) में 11 -11 मात्राएं होती हैं | प्रत्येक पंक्ति के … Read more

सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ का साहित्यिक परिचय

जीवन-परिचय – सूर्यकांत त्रिपाठी निराला ( Suryakant Tripathi Nirala ) जी छायावाद के चार प्रमुख कवियों में से एक प्रमुख कवि थे | केवल छायावाद ही नहीं बल्कि संपूर्ण हिंदी साहित्य में उनका एक विशेष स्थान है | उन्होंने हिंदी कविता को एक नया रूप प्रदान किया | उनका जन्म 1896 ईo में बंगाल के … Read more

मैथिलीशरण गुप्त का साहित्यिक परिचय ( Mathilisharan Gupt Ka Sahityik Parichay )

जीवन परिचय – श्री मैथिलीशरण गुप्त द्विवेदी युग के सर्वाधिक लोकप्रिय कवि थे | उनका जन्म 3 अगस्त, 1886 को उत्तर प्रदेश के झांसी जिले के चिरगांव नामक स्थान पर हुआ | उनके पिता का नाम सेठ रामचरण गुप्त तथा माता का नाम काशी बाई था | वे बचपन से ही साहित्य में रुचि रखते … Read more

तुलसीदास का साहित्यिक परिचय ( Tulsidas Ka Sahityik Parichay )

जीवन परिचय – तुलसीदास जी भक्तिकालीन सगुण काव्यधारा की रामकाव्य धारा के सर्वश्रेष्ठ कवि हैं | तुलसीदास जी की जन्म-तिथि व जन्म-स्थान के विषय में विद्वानों में मतभेद है | परंतु फिर भी अधिकांश विद्वान मानते हैं कि इनका जन्म 1532 ईस्वी में उत्तरप्रदेश के बांदा जिले के राजापुर गांव में हुआ | इनके पिता … Read more

व्यंजना शब्द-शक्ति की परिभाषा एवं भेद ( Vyanjana Shabd Shakti : Arth, Paribhasha Evam Bhed )

जहां शब्द का अर्थ अभिधा तथा लक्षणा शब्द-शक्तियों के द्वारा नहीं निकलता वहाँ शब्द की गहराई में छिपे हुए अर्थ को प्रकट करने वाली शक्ति व्यंजना शब्द-शक्ति कहलाती है | इससे जो अर्थ प्रकट होता है, उसे व्यंग्यार्थ कहते हैं | ‘व्यंजना’ शब्द ‘वि+अंजना’ से बना है जिसका अर्थ है – विशेष दृष्टि | इसका … Read more

लक्षणा शब्द-शक्ति का अर्थ व प्रकार ( Lakshna Shabd Shakti Ka Arth V Prakar )

मुख्यार्थ के बाधित होने पर जब किसी अन्य अर्थ का बोध होता है तो उस अर्थ को लक्ष्यार्थ कहते हैं तथा वह शब्द-शक्ति जो यह अर्थ प्रकट करवाती है उसे लक्षणा शब्द-शक्ति कहते हैं | उदाहरण – सुरेश तो निरा बंदर है | इस वाक्य में सुरेश को बंदर बताया गया है जबकि वास्तव में … Read more

अभिधा शब्द-शक्ति : अर्थ व प्रकार ( Abhidha Shabd Shakti Ka Arth V Prakar )

अभिधा शब्द-शक्ति उस शब्द-शक्ति को कहते हैं जो किसी शब्द के कोशगत अथवा उसके प्रसिद्ध सांकेतिक अर्थ को प्रकट करती है | आचार्यों ने इसे ‘प्रथमा’ या ‘अग्रिम’ नाम भी दिया है | उदाहरण – वाटिका में सुंदर फूल खिले हैं | इस वाक्य में ‘फूल’ शब्द का कोशगत अर्थ प्रकट होता है | अत: … Read more

शब्द-शक्ति : अर्थ व प्रमुख भेद ( Shabd Shakti : Arth V Pramukh Bhed )

शब्द और अर्थ का आपस में अभिन्न संबंध होता है | जो बोला या लिखा जाता है वह शब्द होता है तथा उस बोले अथवा लिखे हुए से सुनने वाले की समझ में जो आता है वह अर्थ होता है | उदाहरण के लिए अगर किसी ने बोला ‘गाय’ | इस शब्द को सुनकर सुनने … Read more

प्रेत का बयान ( Pret Ka Bayan ) : नागार्जुन

“ओ रे प्रेत” – कड़क कर बोले नरक के मालिक यमराज “सच-सच बतला ! कैसे मरा तू? भूख से, अकाल से? बुखार, कालाजार से? पेचिश, बदहजमी, प्लेग, महामारी से? कैसे मरा तू, सच-सच बतला?” खड़ खड़ खड़ खड़ हड़ हड़ हड़ हड़ काँपा कुछ हाड़ों का मानवीय ढांचा नचा कर लंबी चमचों-सा पंचगुरा हाथ रूखी … Read more

अकाल और उसके बाद ( Akaal Aur Uske Baad ) : नागार्जुन

कई दिनों तक चूल्हा रोया, चक्की रही उदास कई दिनों तक कानी कुतिया सोई उनके पास, कई दिनों तक लगी भीत पर छिपकलियों की गश्त, कई दिनों तक चूहों की भी हालत रही शिकस्त | दाने आए घर के अंदर कई दिनों के बाद, धुआँ उठा आँगन से ऊपर कई दिनों के बाद, चमक उठी … Read more

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