उनको प्रणाम ( Unko Pranam ) :नागार्जुन
जो नहीं हो सके पूर्ण-काम मैं उनको करता हूँ प्रणाम ! कुछ कुंठित औ’ कुछ लक्ष्य भ्रष्ट जिनके अभिमंत्रित तीर हुए ; रण की समाप्ति के पहले ही जो वीर रिक्त तूणीर हुए ! (1) प्रसंग — प्रस्तुत काव्यांश हिंदी की पाठ्यपुस्तक ‘समकालीन हिंदी कविता’ में संकलित नागार्जुन द्वारा रचित ‘उनको प्रणाम’ कविता से अवतरित … Read more