सूनी सी सांझ एक ( Sooni Si Sanjh Ek ) : अज्ञेय

सूनी सी सांझ एक दबे पांव मेरे कमरे में आई थी | मुझको भी वहां देख थोड़ा सकुचाई थी | तभी मेरे मन में यह बात आई थी कि ठीक है, यह अच्छी है, उदास है, पर सच्ची है : इसी की साँवली छाँव में कुछ देर रहूँगा इसी की साँस की लहर पर बहूँगा … Read more

हमारा देश ( Hamara Desh ) : अज्ञेय

इन्हीं तृण-फूस छप्पर से ढँके ढुलमुल गँवारू झोपड़ों में ही हमारा देश बसता है | इन्हीं के ढोल-मादल बांसुरी के उमगते स्वर में हमारी साधना का रस बरसता है | इन्हीं के मर्म को अनजान शहरों की ढँकी लोलुप विषैली वासना का सांप डँसता है | इन्हीं में लहरती अल्हड़ अयानी संस्कृती की दुर्दशा पर … Read more

नदी के द्वीप ( Nadi Ke Dvip ) : अज्ञेय

सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन ‘अज्ञेय’ की प्रसिद्ध कविता “नदी के द्वीप” हिंदी साहित्य में एक प्रतीकात्मक और चिंतन-प्रधान रचना है। यह कविता व्यक्ति (द्वीप) और समाज (नदी) के संबंधों को गहराई से दर्शाती है। कवि ने नदी, द्वीप और रेत के प्रतीकों का प्रयोग कर व्यक्ति के अस्तित्व, उसके निर्माण और उसकी नियति को समझाया है।  हम नदी के … Read more

कितनी नावों में कितनी बार ( Kitni Navon Mein Kitni Bar ) : अज्ञेय

कितनी दूरियों से कितनी बार कितनी डगमग नावों में बैठकर मैं तुम्हारीओर आया हूँ ओ मेरी छोटी-सी ज्योति ! कभी कुहासे में तुम्हें न देखता भी पर कुहासे की ही छोटी सी रुपहली झलमल में पहचानता हुआ तुम्हारा ही प्रभा-मंडल | कितनी बार मैं, धीर, आश्वस्त अक्लांत ओ मेरे अनबुझे सत्य ! कितनी बार…… (1) … Read more

यह दीप अकेला ( Yah Deep Akela ) : अज्ञेय

यह दीप, अकेला, स्नेह भरा है गर्व-भरा मदमाता, पर इसको भी पंक्ति को दे दो | यह जन है : गाता गीत जिन्हें फिर और कौन गायेगा? पनडुब्बा : यह मोती सच्चे फिर कौन कृती लायेगा? यह समिधा : ऐसी आग हठीली बिरला सुलगायेगा | यह अद्वितीय : यह मेरा, यह मैं स्वयं विसर्जित : … Read more

साँप ( Saanp ) : अज्ञेय

साँप ! तुम सभ्य तो हुए नहीं नगर में बसना भी तुम्हें नहीं आया | एक बात पूछूं ( उत्तर दोगे? ) तब कैसे सीखा डँसना – विष कहाँ से पाया? प्रसंग — प्रस्तुत कविता हिंदी की पाठ्यपुस्तक ‘समकालीन हिंदी कविता’ में संकलित अज्ञेय द्वारा रचित ‘साँप’ कविता से अवतरित है | प्रस्तुत कविता के … Read more

सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन ‘अज्ञेय’ का साहित्यिक परिचय ( Agyey Ka Sahityik Parichay )

जीवन परिचय – सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन ‘अज्ञेय’ हिंदी के प्रमुख साहित्यकार हैं | प्रयोगवाद के जनक के रूप में पहचाने जाने वाले अज्ञेय जी का जन्म उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में सन 1911 में हुआ | 1925 ईस्वी में इन्होंने मैट्रिक और 1929 ईस्वी में विज्ञान संकाय में स्नातक की परीक्षा उत्तीर्ण की | ये … Read more

नाच ( Naach ) : अज्ञेय

एक तनी हुई रस्सी है जिस पर मैं नाचता हूँ | जिस तनी हुई रस्सी पर मैं नाचता हूँ | वह दो खंभों के बीच है | रस्सी पर मैं जो नाचता हूँ | वह एक खंभे से दूसरे खंबे तक का नाच है | दो खंभों के बीच जिस तनी हुई रस्सी पर मैं … Read more

उड़ चल, हारिल ( Ud Chal Haaril ) : अज्ञेय

उड़ चल, हारिल, लिये हाथ में यही अकेला ओछा तिनका उषा जाग उठी प्राची में -कैसी बाट भरोसा किनका ! शक्ति रहे तेरे हाथों में – छूट ना जाय यह चाह जीवन की ; शक्ति रहे तेरे हाथों में – रुक ना जाय यह गति जीवन की ! (1) ऊपर-ऊपर-ऊपर-ऊपर-बढा चीरता चल दिक् मण्डल, अनथक … Read more

जयशंकर प्रसाद का साहित्यिक परिचय ( Jaishankar Prasad Ka Sahityik Parichay )

जीवन परिचय – जयशंकर प्रसाद का जन्म सन 1889 में काशी में हुआ था | जयशंकर प्रसाद जी धनी परिवार से संबंध रखते थे | इनका बचपन बहुत खुशहाली से बीता | इनकी आरंभिक शिक्षा घर पर ही हुई परंतु वह केवल सातवीं कक्षा तक अपनी पढ़ाई जारी रख सके | जब वे 12 वर्ष … Read more

गीतिकाव्य : अर्थ, परिभाषा, प्रवृत्तियाँ /विशेषताएँ व स्वरूप ( Gitikavya : Arth, Paribhasha, Visheshtayen V Swaroop )

सामान्य शब्दों में गीतिकाव्य का अर्थ ( Geetikavya Ka Arth ) है – ‘गाया जा सकने वाला काव्य‘ परंतु प्रत्येक गाए जाने वाले काव्य को गीतिकाव्य नहीं कहा जा सकता | जिस गीत में तीव्र भावानुभूति, संगीतात्मकता, वैयक्तिकता आदि गुण होते हैं, उसे गीतिकाव्य कहते हैं | मानव सभ्यता में गीत की प्राचीन परंपरा है … Read more

भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन में भगत सिंह का योगदान ( Bhartiy Rashtriy Andolan Me Bhagat Singh Ka Yogdan )

भगत सिंह एक महान क्रांतिकारी तथा महान विचारक थे | भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में उनका अद्वितीय योगदान है | छोटी आयु में ही उन्होंने ऐसे महान कार्य किए कि विश्व की सबसे बड़ी साम्राज्यवादी शक्ति भयभीत हो गई | उन्होंने ‘नौजवान भारत सभा’ तथा ‘हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन’ जैसे क्रांतिकारी संगठनों की स्थापना की | … Read more

भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन में नेताजी सुभाष चंद्र बोस का योगदान ( Bhartiy Rashtriy Andolan Me Subhash Chandra Bose Ka Yogdan )

नेताजी सुभाष चंद्र बोस एक महान क्रांतिकारी तथा महान विचारक थे | उनके जीवन तथा उनकी उपलब्धियों का वर्णन इस प्रकार है : – प्रारंभिक जीवन सुभाष चंद्र बोस का जन्म 23 जनवरी, 1897 को उड़ीसा के कटक नामक स्थान पर हुआ | उनके पिता का नाम जानकीनाथ बोस तथा माता का नाम प्रभावती देवी … Read more

जागो फिर एक बार ( Jago Fir Ek Bar ) ( सूर्यकांत त्रिपाठी निराला ): व्याख्या व प्रतिपाद्य

जागो फिर एक बार ( निराला ) : सप्रसंग व्याख्या जागो फिर एक बार ! समर में अमर कर प्राण, गान गाये महासिंधु-से, सिंधु-नद तीरवासी ! सेंधव सुरंगों पर चतुरंग-चमू-संग ; “सवा-सवा लाख पर एक को चढाऊंगा, गोविंद सिंह निज नाम जब कहाऊंगा |” किसी ने सुनाया यह वीर-जनमोहन, अति दुर्जय संग्राम-राग, फाग था खेला … Read more

तोड़ती पत्थर ( Todti Patthar ) (सूर्यकांत त्रिपाठी निराला): व्याख्या व प्रतिपाद्य

‘तोड़ती पत्थर’ कविता की व्याख्या वह तोड़ती पत्थर ; देखा उसे मैंने इलाहाबाद के पथ पर वह तोड़ती पत्थर नहीं छायादार पेड़ वह जिसके तले बैठी हुई स्वीकार ; श्याम तन भर बंधा यौवन, नत-नयन, प्रिय-कर्म-रत मन, गुरु हथौड़ा हाथ, करती बार-बार प्रहार सामने तरु-मालिका अट्टालिका, प्राकार | (1) चढ़ रही थी धूप, गर्मियों के … Read more

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