भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन में नेताजी सुभाष चंद्र बोस का योगदान ( Bhartiy Rashtriy Andolan Me Subhash Chandra Bose Ka Yogdan )

नेताजी सुभाष चंद्र बोस एक महान क्रांतिकारी तथा महान विचारक थे | उनके जीवन तथा उनकी उपलब्धियों का वर्णन इस प्रकार है : – प्रारंभिक जीवन सुभाष चंद्र बोस का जन्म 23 जनवरी, 1897 को उड़ीसा के कटक नामक स्थान पर हुआ | उनके पिता का नाम जानकीनाथ बोस तथा माता का नाम प्रभावती देवी … Read more

भारत छोड़ो आंदोलन : आरंभ, कारण, कार्यक्रम व महत्व ( Bharat Chhodo Andolan : Karan, Karykram, Arambh, Mahattv )

भारत छोड़ो आंदोलन भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन का सबसे अंतिम का सबसे महत्वपूर्ण आंदोलन था यह आंदोलन 1942 ईस्वी में महात्मा गांधी जी ने चलाया | इस आंदोलन का विस्तृत वर्णन इस प्रकार है :- भारत छोड़ो आंदोलन के प्रमुख कारण ( Bharat Chhodo Andolan Ke Pramukh Karan ) भारत छोड़ो आंदोलन के प्रमुख कारण निम्नलिखित … Read more

सविनय अवज्ञा आंदोलन : कारण, कार्यक्रम, प्रगति और महत्त्व ( Savinay Avagya Andolan : Karan, Karykram, Pragti Aur Mahattv )

सविनय अवज्ञा आंदोलन 1930 ईस्वी में महात्मा गांधी ने चलाया | इस आंदोलन का विस्तृत वर्णन किस प्रकार है :- सविनय अवज्ञा आंदोलन के प्रमुख कारण ( Savinay Avagya Aandolan ke Pramukh Karan ) 1. साइमन कमीशन साइमन कमीशन 1928 ईस्वी में भारत आया | यह कमीशन 1919 ईस्वी के सुधारों का जायजा लेने आया … Read more

असहयोग आंदोलन : कारण, आरंभ व प्रसार, कार्यक्रम और महत्व ( Asahyog Andolan : Karan, Karykram, Arambh, Prasar V Mahattv )

असहयोग आंदोलन 1920 ईस्वी में महात्मा गांधी ने चलाया |असहयोग आंदोलन का विस्तृत वर्णन इस प्रकार है :- असहयोग का अर्थ असहयोग का सामान्य अर्थ है – सहयोग ने करना | असहयोग आंदोलन का मुख्य कार्यक्रम सरकार का हर क्षेत्र में असहयोग करना था | सरकारी उपाधियों का त्याग करना, सरकारी अदालतों को त्याग देना, … Read more

1905 ईo से 1922 ईo के मध्य भारत में सांप्रदायिक राजनीति का विकास

उन्नीसवीं सदी के आरंभ में भारत में सांप्रदायिकता के चिह्न नजर नहीं आते थे परंतु 1890 ईस्वी के बाद हिंदू-मुसलमानों में मनमुटाव बढ़ने लगा | कांग्रेस की स्थापना के पश्चात अंग्रेज मुसलमानों का समर्थन करने लगे थे ताकि कांग्रेस के प्रभाव को कम किया जा सके | इस प्रकार अंग्रेजों ने ‘फूट डालो और राज … Read more

राष्ट्रीय आंदोलन के विकास में सहायक तत्व या कारक ( Rashtriya Andolan Ke Vikas Mein Sahayak Tattv Ya Karak )

1857 ईo क्रांति असफल हो गई थी परंतु इस क्रांति के पश्चात भारत में राष्ट्रीयता का तेजी से विकास होने लगा | 1857 ईo की क्रांति ने लोगों को इस बात का एहसास करा दिया कि अगर वे संगठित होकर अंग्रेजों के विरुद्ध आंदोलन करें तो वह दिन दूर नहीं जब अंग्रेजों को भारत से … Read more

सांप्रदायिकता : अर्थ, परिभाषा, उद्भव एवं विकास ( Sampradayikta Ka Arth, Paribhasha, Udbhav Evam Vikas )

उन्नीसवीं सदी के अंत तक राष्ट्रवाद के साथ-साथ सांप्रदायिकता का विकास होने लगा था | इसके विकास के साथ-साथ राष्ट्रीय आंदोलन की एकता के लिए खतरा उत्पन्न होने लगा था | सांप्रदायिकता के उद्भव और विकास को जानने से पहले इसके अर्थ को जानना आवश्यक है | सांप्रदायिकता का अर्थ ( Sampradayikta Ka Arth ) … Read more

1857 ईo की क्रांति के पश्चात प्रशासनिक व्यवस्था में परिवर्तन

1858 ईस्वी में भारत में प्रशासनिक व्यवस्था में व्यापक परिवर्तन किए गए | भारत में कंपनी के शासन का अंत कर दिया गया और भारत का शासन ब्रिटेन की संसद के अधीन कर दिया गया | 1858 ईo में प्रशासनिक व्यवस्था में किए गए परिवर्तनों का वर्णन इस प्रकार : – (क ) केंद्रीय प्रशासन … Read more

1857 ईo की क्रांति की प्रकृति या स्वरूप ( 1857 Ki Kranti Ki Prakriti Ya Swaroop )

1857 ईo की क्रांति ( Revolution of 1857 ) के स्वरूप के संबंध में विभिन्न विद्वानों के भिन्न-भिन्न मत हैं | कुछ इतिहासकार जैसे सर जॉन लॉरेंस, सीले, मार्शमैन, सर सैयद अहमद खां के अनुसार यह भारतीय सैनिकों का अंग्रेजों के विरुद्ध विद्रोह था | सर जॉन लॉरेंस के अनुसार – “यह क्रांति वास्तव में … Read more

1857 ईo की क्रांति के परिणाम ( 1857 Ki Kranti Ke Parinam )

1857 ईo का विद्रोह ( The Revolt of 1857 ) भारतीय इतिहास में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है | इस विद्रोह में विद्रोहियों ने अदम्य साहस का परिचय दिया और अंग्रेजों को हिला कर रख दिया | एक बार तो ऐसा लगता था कि अंग्रेजों को भारत छोड़ना पड़ेगा परंतु अंग्रेज इस विद्रोह को दबाने … Read more

प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के कारण ( Pratham Svatantrta Sangram Ke Karan )

1857 की क्रांति भारतीय इतिहास की एक महत्वपूर्ण घटना थी | इस क्रांति ने भारतवासियों को एकता के सूत्र में बांधा और अंग्रेजों के विरुद्ध क्रांति का बिगुल बजाया | इस क्रांति को भारत का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की कहा जाता है | 1857 की क्रांति के कारण 1857 की क्रांति ( The Revolution of … Read more

सिख गुरु और उनके कार्य ( Sikh Guru Aur Unke Karya )

1. गुरु नानक देव ( Guru Nanak Dev ) जन्म- 15 अप्रैल, 1469 ( तलवंडी / ननकाना साहिब, पाकिस्तानी पंजाब मृत्यु – 22 सितम्बर, 1539 ( करतारपुर, पाकिस्तान ) पिता – मेहता कालू माता – तृप्ता बहन – नानकी पत्नी – सुलक्खनी पुत्र – श्री चंद ( उदासी संप्रदाय के प्रवर्तक ), लख्मीदास प्रमुख कार्य … Read more

मुगल वंश / Mughal Vansh ( 1526 ई o से 1857 ईo )

मुगल वंशावली 1. जहीरूद्दीन मुहम्मद बाबर ( 1626-1530 ) 2. नसीरुद्दीन हुमायूं ( 1530-1540; 1555-1556) 3. जलालुद्दीन मुहम्मद अकबर ( 1556-1605) 4. जहांगीर ( 1605-1627) 5. शाहजहां ( 1627-1658 ) 6. औरंगजेब ( 1658-1707 ) 7. बहादुर शाह ( 1707-1712) 8. जहांदार शाह ( 1712-1713 ) 9. फर्रूखसियर ( 1713-1719 ) 10 मुहम्मद शाह ( … Read more

सल्तनत काल / Saltnat Kaal ( 1206 ईo – 1526 ईo )

सल्तनत कालीन वंशावली (A) गुलाम वंश / दास वंश (B) ख़िलजी वंश (C) तुग़लक़ वंश (D) सैयद वंश (E) लोदी वंश ( A ) गुलाम वंश कुतुबद्दीन ऐबक ( 1206 ईo से 1210 ईo ) 2. इल्तुतमिश ( 1211 ईo से 1236 ईo ) 3. रजिया बेगम ( 1236 ईo से 1240 ईo ) 4. … Read more

मौर्य वंश ( Mauryan Dynasty )

मौर्य काल ( Mauryan Empire ) चंद्रगुप्त मौर्य ( Chandragupt Maurya ) ने 322 ई० पू० में नंद वंश के राजा घनानंद ( Ghananand ) को पराजित कर मगध पर अपनी सत्ता स्थापित की । इसके साथ ही नंद वंश का स्थान मौर्य वंश ने ले लिया । मौर्य वंश के राजाओं ने 322 ई० … Read more

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