आँसू ( Aansu ) : जयशंकर प्रसाद
इस करुणा कलित हृदय में अब विकल रागिनी बजती क्यों हाहाकार स्वरों में वेदना असीम गरजती? शीतल ज्वाला जलती है ईंधन होता दृग जल का यह व्यर्थ सांस चल-चलकर करती है काम अनिल का | (1) जो घनीभूत पीड़ा थी मस्तक में स्मृति-सी छायी दुर्दिन में आँसू बनकर वह आज बरसने आयी शशि मुख पर … Read more