‘यशोधरा’ काव्य का भाव पक्ष एवं कला पक्ष

मैथिलीशरण गुप्त जी द्विवेदी युग के प्रमुख कवि थे। उन्होंने ‘यशोधरा’ में गाँधी जी के व्यावहारिक सिद्धान्तों का प्रतिपादन किया है। उनका जीवन-सन्देश वैयक्तिक जीवन को परिष्कृत करने वाला और लोक में वासना, कामना और इन्द्रियों पर विजय प्राप्त करने का दिशा-निर्देश करने वाला है। ‘यशोधरा’ काव्य में गौतम बुद्ध की पत्नी यशोधरा की विरह-वेदना … Read more

औचित्य सिद्धांत : अवधारणा एवं स्थापनाएं

औचित्य सिद्धांत भारतीय काव्यशास्त्र सिद्धांतों में सबसे नवीन सिद्धांत है | भारतीय काव्यशास्त्र के अन्य सभी सिद्धांतों के अस्तित्व में आने के पश्चात इस सिद्धांत का आविर्भाव हुआ | दूसरे शब्दों में इसे संस्कृत काव्यशास्त्र का अंतिम सिद्धांत भी कह सकते हैं | आचार्य क्षेमेंद्र ने औचित्य सिद्धांत का प्रवर्तन किया | यह सिद्धांत आने … Read more

पारिस्थितिक तंत्र : अर्थ, विशेषताएं, संरचना तथा प्रकार

पारिस्थितिक तंत्र का अर्थ पारिस्थितिक तंत्र ( Ecosystem ) शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम ए जी टान्सले ने 1935 में किया | टॉन्सले के अनुसार पारिस्थितिक तंत्र भौतिक तंत्रों का एक विशेष प्रकार होता है जिसकी रचना जीवों तथा अजैविक संघटकों से होती है | यह अपेक्षाकृत स्थिर दशा में होता है | यह विवृत्त तंत्र … Read more

ध्वनि सिद्धांत ( Dhvani Siddhant )

भारतीय काव्यशास्त्र में ध्वनि-सिद्धांत का अभ्युदय 9वीं सदी में हुआ | इससे पूर्व रस सिद्धांत, अलंकार सिद्धांत तथा रीति सिद्धांत को पर्याप्त लोकप्रियता मिल चुकी थी | ध्वनि-सिद्धांत के संस्थापक आनंदवर्धन ने ध्वनि की मौलिक उदभावना करके काव्य के अंतर्तत्त्वों की विशद व्याख्या की | उन्होंने काव्यात्मा के संदर्भ में प्रचलित भ्रांतियों पर व्यापक प्रकाश … Read more

रसखान का साहित्यिक परिचय

जीवन-परिचय रसखान भक्तिकालीन कृष्ण काव्यधारा के प्रमुख कवि थे | उनका जन्म सन 1533 ईस्वी में एक पठान परिवार में उत्तर प्रदेश के हरदोई जिला में पिहानी नामक स्थान पर हुआ | इनका मूल नाम सैयद इब्राहिम था लेकिन इनके काव्य में अत्यधिक रसिकता होने के कारण लोग इन्हें रसखान कहने लगे | वल्लभाचार्य के … Read more

पर्यावरण संरक्षण के अंतरराष्ट्रीय / वैश्विक प्रयास

पर्यावरण असंतुलन बढ़ने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण के प्रयास अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किए जा रहे हैं जिनमें से कुछ का वर्णन इस प्रकार है — (1) स्टॉकहोम अंतरराष्ट्रीय शिखर सम्मेलन ( 1972 ईस्वी ) इस शिखर सम्मेलन में सभी देशों को विशिष्ट जीव-जंतुओं और पौधों से संबंधित संरक्षण कार्यक्रम प्रारंभ करने और इसके लिए पर्यावरण … Read more

घनानंद का साहित्यिक परिचय ( Ghananand Ka Sahityik Parichay )

जीवन परिचय घनानंद रीतिकाल की रीतिमुक्त काव्यधारा के प्रसिद्ध कवि हैं | इनका जन्म 1683 ईस्वी में माना जाता है | इनके जन्म स्थान के विषय में विद्वानों में मतभेद है | अधिकांश विद्वानों के अनुसार घनानंद का जन्म उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले में हुआ था | वे मुगल बादशाह मुहम्मदशाह रंगीला के दरबार … Read more

तुलसीदास के पदों की व्याख्या

( यहाँ KU /MDU /CDLU द्वारा निर्धारित बी ए प्रथम सेमेस्टर – हिंदी की पाठ्य पुस्तक ‘मध्यकालीन काव्य कुंज’ में संकलित तुलसीदास के पदों की सप्रसंग व्याख्या की गई है | ) दैहिक दैविक भौतिक तापा | राम राज नहिं काहुहि ब्यापा || सब नर करहिं परस्पर प्रीति | चलहिं स्वधर्म निरत श्रुति नीती || … Read more

मीराबाई का साहित्यिक परिचय

मीराबाई भक्तिकालीन हिंदी साहित्य की सगुण भक्तिधारा की कृष्णकाव्य धारा की प्रमुख कवयित्री हैं | मीराबाई का साहित्यिक परिचय निम्नलिखित बिंदुओं में दिया जा सकता है — जीवन-परिचय मीराबाई भक्तिकालीन कृष्णकाव्य धारा की प्रसिद्ध कवियत्री हैं | इनके आराध्य श्री कृष्ण हैं | इनका जन्म राव दादू जी के चौथे पुत्र रतन सिंह के घर … Read more

कवि बिहारी का साहित्यिक परिचय ( Kavi Bihari Ka Sahityik Parichay )

जीवन-परिचय कवि बिहारी रीतिकाल के सबसे लोकप्रिय कवि माने जाते हैं | इनका जन्म संवत् 1652 ( 1595 ईस्वी ) में ग्वालियर के निकट बसुआ गोविंदपुर गाँव में एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था | इनके पिता का नाम केशवराय था इन्होंने रीतिकाल के प्रसिद्ध कवि केशवदास से काव्य और शास्त्र की शिक्षा ग्रहण की … Read more

सूरदास के पदों की व्याख्या ( बी ए हिंदी – प्रथम सेमेस्टर )

यहाँ हरियाणा के विभिन्न विश्वविद्यालयों द्वारा बी ए प्रथम सेमेस्टर ( हिंदी ) की पाठ्य पुस्तक ‘मध्यकालीन काव्य कुंज’ में संकलित सूरदास के पदों की सप्रसंग व्याख्या दी गई है | अविगत-गति कछु कहत न आवै | ज्यों गूंगे मीठे फल कौ रस अन्तरगत ही भावै | परम स्वाद सबही सु निरन्तर अमित तोष उपजावै … Read more

लोक प्रशासन पर संसदीय नियंत्रण

लोकतांत्रिक देशों में प्रशासन पर विधायिका ( व्यवस्थापिका या संसद ) का नियंत्रण होता है | विधायिका सब प्रशासनिक शक्तियों का स्रोत है | विधायिका ही सरकारी नीति निर्धारित करती है, प्रशासन का स्वरूप और क्षेत्र निश्चित करती है | इस प्रकार लोक प्रशासन पर संसदीय नियंत्रण बना रहता है | व्यवस्थापिका ( विधायिका ) … Read more

बजट : अर्थ, परिभाषा, प्रकार, महत्त्व व निर्माण-प्रक्रिया

बजट वित्तीय प्रशासन का सर्वाधिक महत्वपूर्ण उपकरण है | इसे वित्तीय प्रशासन का केंद्र बिंदु माना जाता है | बजट के माध्यम से राज्य की वित्तीय स्थिति प्रकट होती है | बजट के माध्यम से ही किसी सरकार की आर्थिक नीतियों की झलक मिलती है | बजट की अवधारणा को समझने से पूर्व इसके अर्थ … Read more

प्रशिक्षण का अर्थ, परिभाषा, उद्देश्य / महत्व व प्रकार ( Prashikshan Ka Arth, Paribhasha, Uddeshya / Mahatva V Prakar )

प्रशिक्षण का अर्थ है – किसी विशेष कला या व्यवसाय में निर्देश या अनुशासन | सामान्य शब्दों में जब किसी अधिकारी के कौशल में वृद्धि करने के लिए कुछ निर्देश दिए जाते हैं तो उसे प्रशिक्षण कहते हैं | ग्लैडन के अनुसार — “किसी व्यक्ति के कौशल, शक्ति या बुद्धि में वृद्धि तथा उसके विचारों … Read more

पदोन्नति का अर्थ, परिभाषा, विशेषताएं व आधार या सिद्धांत

पदोन्नति का अर्थ जानने के लिए इसकी व्युत्पत्ति को जानना आवश्यक होगा | पदोन्नति को अंग्रेजी भाषा में ‘प्रमोशन’ ( Promotion ) कहते हैं जो लैटिन भाषा के ‘प्रियोवीर’ शब्द से बना है जिसका अर्थ है – पद, स्तर या सम्मान में वृद्धि होना या आगे बढ़ना | पदोन्नति की परिभाषा ( Padonnati Ki paribhasha … Read more

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