सबसे खतरनाक : पाश ( Sabse Khatarnak : Pash )

मेहनत की लूट सबसे ख़तरनाक नहीं होती पुलिस की मार सबसे ख़तरनाक नहीं होती गद्दारी-लोभ की मुट्ठी सबसे ख़तरनाक नहीं होती बैठे-बिठाए पकड़े जाना – बुरा तो है सहमी-सी चुप में जकड़े जाना – बुरा तो है पर सबसे ख़तरनाक नहीं होता कपट के शोर में सही होते हुए भी दब जाना – बुरा तो … Read more

अक्क महादेवी ( Akka Mahadevi )

पद 1 हे भूख! मत मचल प्यास, तड़प मत हे नींद! मत सता क्रोध, मचा मत उधल-पुथल हे मोह! पाश अपने ढील लोभ, मत ललचा हे मद! मत कर मदहोश ईर्ष्या, जला मत ओ चराचर! मत चूक अवसर आई हूँ संदेश लेकर चन्नमलिकार्जुन का | 1️⃣ व्याख्या – प्रस्तुत पद में कवयित्री अक्क महादेवी इंद्रियों … Read more

साये में धूप ( दुष्यंत कुमार )

कहाँ तो तय था चिरागाँ हरेक घर के लिए, कहाँ चिराग मयस्सर नहीं शहर के लिए | 1️⃣ व्याख्या – उपरोक्त पंक्तियों में उन नेताओं पर व्यंग्य किया है जो चुनाव के वक्त जनता को रंग-बिरंगे, लोक-लुभावने सपने दिखाते हैं मगर सत्ता में आते ही जनता से किए वादों को भूल जाते हैं। प्रस्तुत पंक्तियों … Read more

चंपा काले काले अच्छर नहीं चीन्हती : त्रिलोचन

चंपा काले काले अच्छर नहीं चीन्हती मैं जब पढ़ने लगता हूँ वह आ जाती है खड़ी खड़ी चुपचाप सुना करती है उसे बड़ा अचरज होता है ; इन काले चिन्हों से कैसे ये सब स्वर निकला करते हैं | 1️⃣ व्याख्या – कवि चंपा नामक लड़की, जो की अनपढ़ है, उसकी निरक्षरता के बारे में … Read more

घर की याद : भवानी प्रसाद मिश्र ( Ghar Ki Yad : Bhawani Prasad Mishra )

आज पानी गिर रहा है, बहुत पानी गिर रहा है, रात भर गिरता रहा है, प्राण मन घिरता रहा है, बहुत पानी गिर रहा है, घर नजर में तिर रहा है, घर की मुझसे दूर है जो, घर खुशी का पूर है जो, 1️⃣ व्याख्या –– इन पंक्तियों में कवि अपने घर से दूर जेल … Read more

हम तौ एक एक करि जांनां कबीर ( Kabir Ke Pad Class 11)

पद 1 हम तौ एक एक करि जाना | दोइ कहैं तिनहीं कौँ दोजग जिन नाहिंन पहिचांनां || एकै पवन एक ही पानीं एकै जोति समांनां | एकै खाक गढ़े सब भांडै एकै कोंहरा सांनां || जैसे बाढ़ी काष्ट ही काटै अगिनी न काटै कोई | सब घटि अंतरि तूँही व्यापक धरै सरूपै सोई || … Read more

मेरे तो गिरधर गोपाल, दूसरो न कोई / मीरा( मीराबाई)

( यहाँ NCERT की हिंदी की पाठ्य पुस्तक ‘आरोह भाग 1’ में संकलित मीरा ( Mirabai ) के पदों की व्याख्या तथा अभ्यास के प्रश्न दिए गए हैं |) पद 1 मेरे तो गिरधर गोपाल, दूसरो न कोई जा के सिर मोर-मुकुट, मेरो पति सोई छांडि दयी कुल की कानि, कहा करिहै कोई? संतन ढिग … Read more

वे आँखें ( सुमित्रानंदन पंत )

अंधकार की गुहा सरीखी उन आँखों से डरता है मन, भरा दूर तक उनमें दारुण दैन्य दुख का नीरव रोदन! वह स्वाधीन किसान रहा, अभिमान भरा आँखों में इसका, छोड़ उसे मँझधार आज संसार कगार सदृश बह खिसका | 1️⃣ व्याख्या — प्रस्तुत काव्यांश में, कवि पंत जी के द्वारा भारतीय कृषकों के शोषण व … Read more

पथिक ( रामनरेश त्रिपाठी )

प्रतिक्षण नूतन वेश बनाकर रंग-बिरंग निराला | रवि के सम्मुख थिरक रही है नभ में वारिद-माला | नीचे नील समुद्र मनोहर ऊपर नील गगन है | घन पर बैठ, बीच में बिचरूँ यही चाहता मन है || 1️⃣ रत्नाकर गर्जन करता है, मलयानिल बहता है | हरदम यह हौसला हृदय में प्रिये! भरा रहता है … Read more

बाजार दर्शन : जैनेंद्र कुमार ( Bajar Darshan : Jainendra Kumar )

एक बार की बात कहता हूँ | मित्र बाजार गए तो थे कोई एक मामूली चीज लेने पर लौटे तो एकदम बहुत से बंडल पास थे | मैंने कहा – यह क्या? बोले – यह जो साथ थी | उनका आशय था कि यह पत्नी की महिमा है | उस महिमा का मैं कायल हूँ … Read more

भक्तिन ( महादेवी वर्मा )

भक्तिन ( महादेवी वर्मा ) छोटे क़द और दुबले शरीरवाली भक्तिन अपने पतले ओठों के कोनों में दृढ़ संकल्प और छोटी आँखों में एक विचित्र समझदारी लेकर जिस दिन पहले-पहले मेरे पास आ उपस्थित हुई थी तब से आज तक एक युग का समय बीत चुका है। पर जब कोई जिज्ञासु उससे इस संबंध में … Read more

बादल राग : सूर्यकांत त्रिपाठी निराला ( Badal Raag : Suryakant Tripathi Nirala )

(1) तिरती है समीर-सागर परअस्थिर सुख पर दुःख की छाया-जग के दग्ध हृदय परनिर्दय विप्लव की प्लावित माया-यह तेरी रण-तरीभरी आकांक्षाओं से,घन, भेरी-गर्जन से सजग सुप्त अंकुरउर में पृथ्वी के, आशाओं सेनवजीवन की, ऊँचा कर सिर,ताक रहे है, ऐ विप्लव के बादल!फिर-फिर! प्रसंग – प्रस्तुत काव्यांश हमारी हिंदी की पाठ्यपुस्तक में संकलित ‘बादल राग’ नामक … Read more

कवि बिहारी की काव्य-कला ( Kavi Bihari Ki Kavya Kala )

बिहारी रीतिकाल के प्रसिद्ध कवि हैं | रीतिसिद्ध काव्य-परंपरा के यह सर्वश्रेष्ठ कवि माने जाते हैं | इनकी एक मात्र रचना ‘बिहारी सतसई’ है जिसमें 713 दोहे हैं | कवि बिहारी की काव्य-कला का विवेचन भाव पक्ष और कला पक्ष इन दो दृष्टिकोणों से किया जा सकता है | कवि बिहारी का भाव पक्ष या … Read more

बिहारीलाल के दोहों की व्याख्या ( Biharilal Ke Dohon Ki Vyakhya )

( यहाँ कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय द्वारा निर्धारित हिंदी की पाठ्य पुस्तक ‘मध्यकालीन काव्य कुंज’ में संकलित बिहारीलाल के दोहों की व्याख्या दी गई है | ) मेरी भव बाधा हरौ, राधा नागरिक सोइ | जा तन की झाईं परैं स्यामु हरित-दुति होइ || (1) प्रसंग — प्रस्तुत दोहा हिंदी की पाठ्यपुस्तक ‘मध्यकालीन काव्य कुंज’ में संकलित … Read more

लक्ष्मण मूर्छा और राम का विलाप ( Lakshman Murcha Aur Ram Ka Vilap ) : तुलसीदास

( यहाँ कक्षा 12वीं की हिंदी की पाठ्य पुस्तक ‘आरोह भाग 2’ में संकलित तुलसीदास कृत रामचरितमानस से अवतरित ‘लक्ष्मण मूर्छा और राम का विलाप’ काव्यांश का मूल पाठ तथा सप्रसंग व्याख्या दी गई है | ) दोहा तव प्रताप उर राखि प्रभु जैहउँ नाथ तुरंत ।अस कहि आयसु पाइ पद बंदि चलेउ हनुमंत ॥ … Read more

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