आशा का अंत : बालमुकुंद गुप्त ( Asha Ka Ant : Balmukund Gupt )

( ‘आशा का अंत’ बालमुकुंद गुप्त द्वारा लिखित एक व्यंग्य लेख है जो ब्रिटिश सरकार की शोषणकारी नीतियों व कुशासन पर तीखा प्रहार करता है | ) माई लार्ड! अब के आप के भाषण ने नशा किरकिरा कर दिया | संसार के सब दु:खों और समस्त चिंताओं को जो शिवशंभू शर्मा दो चुल्लू बूँटी पीकर … Read more

बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर ( Baba Saheb Bheemrav Ambedkar )

( यहाँ NCERT की बारहवीं कक्षा की हिंदी की पाठ्य पुस्तक ‘आरोह भाग -2’ में संकलित बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर द्वारा लिखित दो विचारात्मक लेख दिए गए हैं – श्रम विभाजन और जाति प्रथा व मेरी कल्पना का आदर्श समाज ) श्रम विभाजन और जाति प्रथा : डॉ बी आर अंबेडकर ( Shram Vibhajan Aur … Read more

शिरीष के फूल : हजारी प्रसाद द्विवेदी ( Shirish Ke Phool : Hajari Prasad Dwivedi )

( ‘शिरीष के फूल’ हजारी प्रसाद द्विवेदी द्वारा रचित प्रसिद्ध निबंध है जिसमें शिरीष के माध्यम से समाज तथा राजनीति के विभिन्न गूढ़ पक्षों को उजागर किया गया | निबंध में लालित्य, व्यंग्य तथा करुणा का अद्भुत समन्वय है | ) जहाँ बैठकर यह लेख लिख रहा हूँ उसके आगे-पीछे, दाएँ-बाएँ, शिरीष के अनेक पेड़ … Read more

नमक : रज़िया सज्जाद ज़हीर ( Namak : Razia Sajjad Zaheer )

( यहाँ NCERT की कक्षा 12वीं की हिंदी की पाठ्य पुस्तक ‘आरोह भाग -2’ में संकलित ‘नमक’ कहानी के मूल पाठ तथा अभ्यास के प्रश्नों को दिया गया है | ) उन सिख बीबी को देखकर सफिया हैरान रह गई थी, किस कदर वह उसकी माँ से मिलती थी | वही भारी भरकम जिस्म, छोटी-छोटी … Read more

चार्ली चैप्लिन यानी हम सब : विष्णु खरे

( यहाँ NCERT की 12वीं की हिंदी की पाठ्य पुस्तक ‘आरोह भाग 2’ में संकलित ‘चार्ली चैप्लिन यानी हम सब’ का मूल पाठ व अभ्यास के प्रश्न दिए गए हैं | ) यदि यह वर्ष चैप्लिन की जन्मशती का न होता तो भी चैपलिन के जीवन का एक महत्वपूर्ण वर्ष होता क्योंकि आज उनकी पहली … Read more

पहलवान की ढोलक : फणीश्वरनाथ रेणु

जाड़े का दिन | अमावस्या की रात – ठंडी और काली | मलेरिया और हैजे से पीड़ित गाँव भर्यात्त शिशु की तरह थर-थर काँप रहा था | पुरानी और उजड़ी बाँस-फूस की झोपड़ियों में अंधकार और सन्नाटे का सम्मिलित साम्राज्य | अंधेरा और निस्तब्धता | अँधेरी रात चुपचाप आँसू बहा रही थी | निस्तब्धता करुण … Read more

काले मेघा पानी दे : धर्मवीर भारती ( Kale Megha Pani De : Dharmveer Bharti )

( यहाँ NCERT की कक्षा 12वीं की हिंदी की पाठ्य पुस्तक ‘आरोह भाग -2’ में संकलित ‘काले मेघा पानी दे’ अध्याय के मूल पाठ तथा अभ्यास के प्रश्नों को दिया गया है | ) उन लोगों के दो नाम थे – इंदर सेना या मेढक-मंडली | बिल्कुल एक दूसरे के विपरीत | जो लोग उनके … Read more

आओ मिलकर बचाएँ : निर्मला पुतुल ( Aao, Milkar Bachayen : Nirmala Putul )

अपनी बस्तियों को नंगी होने से शहर की आबो-हवा से बचाएँ उसे बचाएँ डूबने से पूरी की पूरी बस्ती को हड़िया में (1) व्याख्या – प्रस्तुत पंक्तियों में कवयित्री झारखंड की अपनी संथाली आदिवासी संस्कृति को शहरी सभ्यता-संस्कृति के कुप्रभाव से दूर रखना चाहती हैं क्योंकि अब आदिवासी लोग भी अपनी संस्कृति को छोड़कर धीरे-धीरे … Read more

सबसे खतरनाक : पाश ( Sabse Khatarnak : Pash )

मेहनत की लूट सबसे ख़तरनाक नहीं होती पुलिस की मार सबसे ख़तरनाक नहीं होती गद्दारी-लोभ की मुट्ठी सबसे ख़तरनाक नहीं होती बैठे-बिठाए पकड़े जाना – बुरा तो है सहमी-सी चुप में जकड़े जाना – बुरा तो है पर सबसे ख़तरनाक नहीं होता कपट के शोर में सही होते हुए भी दब जाना – बुरा तो … Read more

अक्क महादेवी ( Akka Mahadevi )

पद 1 हे भूख! मत मचल प्यास, तड़प मत हे नींद! मत सता क्रोध, मचा मत उधल-पुथल हे मोह! पाश अपने ढील लोभ, मत ललचा हे मद! मत कर मदहोश ईर्ष्या, जला मत ओ चराचर! मत चूक अवसर आई हूँ संदेश लेकर चन्नमलिकार्जुन का | 1️⃣ व्याख्या – प्रस्तुत पद में कवयित्री अक्क महादेवी इंद्रियों … Read more

साये में धूप ( दुष्यंत कुमार )

कहाँ तो तय था चिरागाँ हरेक घर के लिए, कहाँ चिराग मयस्सर नहीं शहर के लिए | 1️⃣ व्याख्या – उपरोक्त पंक्तियों में उन नेताओं पर व्यंग्य किया है जो चुनाव के वक्त जनता को रंग-बिरंगे, लोक-लुभावने सपने दिखाते हैं मगर सत्ता में आते ही जनता से किए वादों को भूल जाते हैं। प्रस्तुत पंक्तियों … Read more

चंपा काले काले अच्छर नहीं चीन्हती : त्रिलोचन

चंपा काले काले अच्छर नहीं चीन्हती मैं जब पढ़ने लगता हूँ वह आ जाती है खड़ी खड़ी चुपचाप सुना करती है उसे बड़ा अचरज होता है ; इन काले चिन्हों से कैसे ये सब स्वर निकला करते हैं | 1️⃣ व्याख्या – कवि चंपा नामक लड़की, जो की अनपढ़ है, उसकी निरक्षरता के बारे में … Read more

घर की याद : भवानी प्रसाद मिश्र ( Ghar Ki Yad : Bhawani Prasad Mishra )

आज पानी गिर रहा है, बहुत पानी गिर रहा है, रात भर गिरता रहा है, प्राण मन घिरता रहा है, बहुत पानी गिर रहा है, घर नजर में तिर रहा है, घर की मुझसे दूर है जो, घर खुशी का पूर है जो, 1️⃣ व्याख्या –– इन पंक्तियों में कवि अपने घर से दूर जेल … Read more

हम तौ एक एक करि जांनां कबीर ( Kabir Ke Pad Class 11)

पद 1 हम तौ एक एक करि जाना | दोइ कहैं तिनहीं कौँ दोजग जिन नाहिंन पहिचांनां || एकै पवन एक ही पानीं एकै जोति समांनां | एकै खाक गढ़े सब भांडै एकै कोंहरा सांनां || जैसे बाढ़ी काष्ट ही काटै अगिनी न काटै कोई | सब घटि अंतरि तूँही व्यापक धरै सरूपै सोई || … Read more

मेरे तो गिरधर गोपाल, दूसरो न कोई / मीरा( मीराबाई)

( यहाँ NCERT की हिंदी की पाठ्य पुस्तक ‘आरोह भाग 1’ में संकलित मीरा ( Mirabai ) के पदों की व्याख्या तथा अभ्यास के प्रश्न दिए गए हैं |) पद 1 मेरे तो गिरधर गोपाल, दूसरो न कोई जा के सिर मोर-मुकुट, मेरो पति सोई छांडि दयी कुल की कानि, कहा करिहै कोई? संतन ढिग … Read more

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