जलीय पारिस्थितिक तंत्र : प्रकार व उदाहरण

जलीय पारिस्थितिक तंत्र वे प्राकृतिक तंत्र होते हैं जो जल में विकसित होते हैं। इसमें जल के भीतर और जल की सतह पर पाए जाने वाले सभी जीव-जंतु और वनस्पतियाँ शामिल होती हैं। यह तंत्र जैविक (जैसे मछलियाँ, पौधे) और अजैविक (जैसे पानी, धूप, पोषक तत्व) घटकों से मिलकर बनता है। इन तंत्रों में ऊर्जा … Read more

रघुवीर सहाय का साहित्यिक परिचय

जीवन परिचय रघुवीर सहाय का जन्म 9 दिसंबर 1929 को लखनऊ, उत्तर प्रदेश में एक मध्यवर्गीय परिवार में हुआ। उनके पिता हरदेव सहाय साहित्य के अध्यापक थे जिससे उन्हें साहित्यिक माहौल प्राप्त हुआ। उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से अंग्रेजी साहित्य में एम.ए. किया और 1946 से लेखन शुरू किया। सहाय पत्रकारिता में भी सक्रिय रहे, ‘नवजीवन’, … Read more

अशोक की चिंता : जयशंकर प्रसाद ( Ashok Ki Chinta : Jai Shankar Prasad )

(1)जीवन कितना ? अति लघु क्षण,ये शलभ पुंज-से-कण-कण, तृष्णा वह अनलशिखा बन दिखलाती रक्तिम यौवन । जलने की क्यों न उठे उमंग ?है ऊँचा आज मगध शिर पदतल में विजित पड़ा, दूरांगत क्रन्दन ध्वनि फिर, क्यों गूँज रही हैं अस्थिरकर विजयी का अभिमान भंग ? व्याख्या — सम्राट अशोक कलिंग युद्ध के भयावह दृश्य को … Read more

वन पारिस्थितिक तंत्र (Forest Ecosystem)

वन पारिस्थितिक तंत्र (Forest Ecosystem) एक प्राकृतिक क्षेत्र है जिसमें पेड़-पौधे, जीव-जंतु, सूक्ष्मजीव, मिट्टी, पानी और हवा जैसे जैविक और अजैविक घटक आपस में परस्पर क्रिया करते हैं। यह एक संतुलित प्रणाली है जो जैव विविधता को बनाए रखती है, जलवायु को नियंत्रित करती है, और कार्बन संग्रहण, मिट्टी संरक्षण, जल चक्र जैसे महत्वपूर्ण कार्य … Read more

जल संसाधन : स्रोत के आधार पर वर्गीकरण

जल संसाधन का अर्थ है पृथ्वी पर उपलब्ध जल के सभी स्रोत, जैसे नदियाँ, झीलें, झरने, भूजल, समुद्र, और वर्षा, जो मानव उपयोग के लिए उपलब्ध हैं। ये संसाधन पीने, कृषि, उद्योग, और अन्य गतिविधियों के लिए आवश्यक हैं। स्रोत के आधार पर जल का वर्गीकरण स्रोत के आधार पर जल का वर्गीकरण निम्नलिखित है: … Read more

वन संसाधन: वनोन्मूलन के कारण, वन संरक्षण के उपाय व वनों का महत्त्व

वन संसाधन (Forest Resources ) वन संसाधन (Forest Resources ) उन सभी प्राकृतिक वस्तुओं और सेवाओं को कहते हैं जो हमें वनों से प्राप्त होती हैं। इसमें लकड़ी, बांस, रेज़िन, गोंद, औषधीय पौधे, फल, फूल, पत्तियाँ, शहद आदि शामिल होते हैं। इसके अलावा, वन जलवायु को संतुलित करने, मिट्टी के कटाव को रोकने, वर्षा लाने … Read more

भूमि संसाधन : भूमि निम्नीकरण, गुणवत्तावृद्धि

भूमि संसाधन (Land Resources) ऐसे प्राकृतिक संसाधन हैं जो पृथ्वी की सतह से संबंधित होते हैं और मानव जीवन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। इसमें खेत, जंगल, पहाड़, मैदान, रेगिस्तान, चरागाह आदि शामिल हैं। भूमि के गुणात्मक निम्नीकरण के कारण (1) मृदा अपरदन (Soil Erosion): वनों की कटाई, अत्यधिक चराई और अनुचित कृषि पद्धतियों … Read more

आलेख : अर्थ, विशेषताएँ व प्रकार

“आलेख” का शाब्दिक अर्थ होता है “लिखित विवरण”। यह एक प्रकार का गद्यात्मक वर्णन होता है, जिसमें किसी विषय पर सुव्यवस्थित, तर्कसंगत और विस्तृत रूप से विचार प्रस्तुत किए जाते हैं। परिभाषा : “आलेख एक लिखित रचना है जिसमें किसी विषय पर लेखक अपने विचारों, तर्कों और अनुभवों को व्यवस्थित और सुसंगत ढंग से प्रस्तुत … Read more

बूढ़ी काकी ( मुंशी प्रेमचंद )( Budhi Kaki : Premchand )

बुढ़ापा बहुधा बचपन का पुनरागमन हुआ करता है। बूढ़ी काकी में जिह्वा-स्वाद के सिवा और कोई चेष्टा शेष न थी और न अपने कष्टों की ओर आकर्षित करने का, रोने के अतिरिक्त कोई दूसरा सहारा ही। समस्त इन्द्रियाँ, नेत्र, हाथ और पैर जवाब दे चुके थे। पृथ्वी पर पड़ी रहतीं और घरवाले कोई बात उनकी … Read more

रामधारी सिंह दिनकर का साहित्यिक परिचय

जीवन-परिचय — श्री रामधारी सिंह ‘दिनकर’ हिंदी के प्रसिद्ध साहित्यकार हैं | वे बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे | उन्होंने गद्य तथा पद्य की विभिन्न विधाओं पर अपनी लेखनी चला कर हिंदी साहित्य को समृद्ध किया | रामधारी सिंह ‘दिनकर’ का जन्म बिहार के बेगूसराय जिले के सिमरिया घाट गाँव में 23 सितंबर, सन् 1908 … Read more

भारत की बहुद्देशीय परियोजनाएँ

भारत की जलवायु वर्ष भर कृषि उत्पादकता के अनुकूल है और यहां की मिट्टी उपजाऊ है परंतु यहां वर्ष के सभी महीनों में जल की आपूर्ति नहीं हो पाती | अतः यहां सिंचाई आवश्यक हो जाती है | सिंचाई की इस आवश्यकता को पूरा करने के लिए भारत में बहुद्देशीय परियोजनाएँ विकसित की गई हैं … Read more

भारतीय वन, राष्ट्रीय उद्यान व जीव अभयारण्य क्षेत्र

भारत में वन, राष्ट्रीय उद्यान व जीव अभयारण्य क्षेत्र देश के सभी भागों में मिलते हैं लेकिन भारत में वन क्षेत्रों का वितरण बड़ा असमान है। ये उन प्रदेशों में बहुत कम पाए जाते हैं, जहां इनकी बहुत अधिक आवश्यकता है। उदाहरणत: गंगा के अधिक जनसंख्या तथा कृषि वाले मैदान के केवल 5% भाग पर … Read more

भारत की मिट्टियां : विभिन्न प्रकार, विशेषताएँ व वितरण

‘भारत की मिट्टियां’ विषय का विस्तृत विवेचन करने से पूर्व मृदा शब्द के अर्थ को जानना अति आवश्यक होगा | मृदा ( Soil ) पृथ्वी की ऊपरी सतह पर मोटे, मध्यम और बारीक कार्बनिक तथा अकार्बनिक कणों को मृदा कहते हैं | ऊपरी सतह पर से मिट्टी हटाने पर प्रायः चट्टान पाई जाती है कभी-कभी … Read more

भारत में बाढ़ और अनावृष्टि के प्रमुख कारण

भारत क्षेत्रफल की दृष्टि से एक विशाल देश है | भौगोलिक दृष्टि से इसमें अनेक विभिन्नतायें पाई जाती हैं | यही कारण है भारत में वर्षा की मात्रा भी एक समान नहीं है | इसके विभिन्न भागों में बाढ़ के साथ-साथ अनावृष्टि भी देखी जा सकती है | भारत में बाढ़ तथा अनावृष्टि के अनेक … Read more

पृथ्वी के प्रमुख स्थल रूप ( भूगोल, कक्षा-6) ( Major Landforms Of The Earth )

पर्वत, पठार, मैदान आदि पृथ्वी के प्रमुख स्थल रूप हैं जिनका निर्माण भूमि अपरदन, निक्षेपण आदि का परिणाम है | ◼️ पृथ्वी की सतह के टूटकर घिस जाने को अपरदन( Erosion ) कहते हैं | ◼️ अपरदन ( Erosion ) की क्रिया के द्वारा भूमि नीची हो जाती है तथा निक्षेपण ( Deposition ) की … Read more

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