कलगी बाजरे की ( अज्ञेय ) / Kalgi Bajre Ki ( Agyey ) मूल व व्याख्या
‘कलगी बाजरे की’ ( Kalgi Bajre Ki ) अज्ञेय के काव्य-संग्रह ‘हरी घास पर क्षण भर’ (1949) की अनूठी कविता है | इस कविता में उन्होंने प्रेम और सौंदर्य के परम्परागत उपमानों — कमलिनी, चम्पा, तारिका आदि का प्रतिकार करते हुए प्राकृतिक और स्थानीय प्रतीकों को अपनाया है | इस कविता में अज्ञेय ‘हरी बिछली … Read more