वस्तुनिष्ठ प्रश्न ( हिंदी पत्रकारिता,VOC – Hindi, BA -6th Semester KUK )

1. ‘उदन्त मार्तण्ड’ का प्रकाशन कब और कहाँ से हुआ?उत्तर- इसका प्रकाशन 30 मई, 1826 को कलकत्ता (अब कोलकाता) से साप्ताहिक रूप में प्रारंभ हुआ था।2. उदन्त मार्तण्ड पत्र के संपादक कौन थे?उत्तर- उदन्त मार्तण्ड के संपादक पं० जुगल किशोर शुक्ल थे, जो मूल रूप से कानपुर के निवासी थे।3. उदन्त मार्तण्ड का शाब्दिक अर्थ … Read more

भेंटवार्ता का अर्थ, प्रकार व उद्देश्य

भेंटवार्ता (साक्षात्कार): अर्थ, प्रकार और उद्देश्य पत्रकारिता और जनसंचार की दुनिया में समाचार और फीचर के बाद ‘भेंटवार्ता’ सबसे लोकप्रिय और प्रभावी विधा है। इसे हिंदी में ‘साक्षात्कार’ भी कहा जाता है। परीक्षा की दृष्टि से भेंटवार्ता का अर्थ, इसके प्रकार और उद्देश्यों का सरल व विस्तृत विवरण नीचे दिया गया है: भेंटवार्ता (साक्षात्कार) का … Read more

रिपोर्टिंग का अर्थ, प्रकार व प्रक्रिया

रिपोर्टिंग: अर्थ, प्रकार और प्रक्रिया पत्रकारिता की पूरी इमारत ‘समाचारों’ पर टिकी है और समाचारों को जन्म देने का काम ‘रिपोर्टिंग’ (Reporting) के द्वारा ही होता है। रिपोर्टिंग के बिना न कोई अखबार छप सकता है और न कोई न्यूज़ चैनल चल सकता है। परीक्षा के दृष्टिकोण से रिपोर्टिंग का अर्थ, उसके प्रकार और प्रक्रिया … Read more

फीचर लेखन के आवश्यक तत्त्व / बातें या फीचर लेखन की प्रक्रिया / विधि

फीचर लेखन की प्रक्रिया / विधि या प्रविधि फीचर लिखना केवल सूचनाओं को छापना नहीं है, बल्कि यह एक रचनात्मक कला है। जहाँ समाचार ‘उल्टे पिरामिड शैली’ (महत्वपूर्ण बात सबसे पहले) में लिखा जाता है, वहीं फीचर को एक कथा या कहानी की तरह (कथात्मक शैली में) लिखा जाता है। एक सफल, रोचक और बेहतरीन … Read more

फीचर के प्रकार

फीचर और उसके प्रमुख प्रकार पत्रकारिता की दुनिया में ‘फीचर’ एक बहुत ही रोचक, रचनात्मक और मनोरंजक विधा है। जहाँ समाचार का काम केवल तथ्य और सूचना देना होता है, वहीं ‘फीचर’ सूचना देने के साथ-साथ पाठक का मनोरंजन भी करता है और उसे शिक्षित भी करता है। यह समाचार की तुलना में अधिक भावपूर्ण, … Read more

संपादन कला क्या है? संपादन कला के सामान्य सिद्धांत

संपादन कला: अर्थ और प्रमुख सिद्धांत पत्रकारिता की दुनिया में ‘संपादन’ (Editing) का बहुत महत्त्वपूर्ण स्थान है। कोई भी समाचार पत्र, पत्रिका या पुस्तक बिना संपादन के अपने पाठकों तक नहीं पहुँच सकती। यह पत्रकारिता की रीढ़ की हड्डी है। 1. संपादन कला का अर्थ ‘संपादन’ का सामान्य अर्थ है— रिपोर्टर (संवाददाता) द्वारा लाई गई … Read more

पत्रकारिता के मूल / अनिवार्य या आवश्यक तत्त्व

पत्रकारिता केवल घटनाओं को इकट्ठा करने और उन्हें छापने या दिखाने का नाम नहीं है। यह एक ज़िम्मेदार और संवेदनशील पेशा है, जिसकी इमारत कुछ निश्चित सिद्धांतों की नींव पर खड़ी होती है। एक ‘आदर्श पत्रकारिता’ के लिए निम्नलिखित मूल तत्त्वों का होना अत्यंत आवश्यक है: 1. सत्यता पत्रकारिता का पहला और सबसे बड़ा तत्त्व … Read more

पत्रकारिता के उद्देश्य

पत्रकारिता के उद्देश्य लोकतांत्रिक व्यवस्था में पत्रकारिता को विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका के बाद ‘चौथा स्तंभ’ (Fourth Pillar) माना जाता है। पत्रकारिता का काम केवल कुछ घटनाओं की सूचना देना या कागज़ पर शब्द छापना नहीं है, बल्कि यह समाज का मार्गदर्शन करने वाला एक बड़ा ‘मिशन’ है।परीक्षा के दृष्टिकोण से पत्रकारिता के प्रमुख उद्देश्यों … Read more

हिंदी रंगमंच: समस्याएँ, चुनौतियाँ और समाधान

हिंदी रंगमंच का इतिहास अत्यंत गौरवशाली रहा है। भारतेंदु युग के नवजागरण से लेकर आधुनिक यथार्थवादी नाटकों तक, हिंदी रंगमंच ने समाज को दिशा देने का महत्वपूर्ण कार्य किया है। लेकिन, आज के वर्तमान परिदृश्य में समकालीन हिंदी रंगमंच एक दोराहे पर खड़ा है। एक तरफ इसमें अपार कलात्मक संभावनाएँ हैं, तो दूसरी तरफ इसके … Read more

हिंदी का व्यावसायिक रंगमंच: अर्थ और विकास-यात्रा

कला और साहित्य के क्षेत्र में रंगमंच (थियेटर) को हमेशा एक बहुत ही पवित्र और सामाजिक बदलाव का माध्यम माना गया है। लेकिन, किसी भी कला को लंबे समय तक ज़िंदा रखने के लिए और कलाकारों को अपना जीवन चलाने के लिए आर्थिक सहारे (पैसे) की ज़रूरत होती है। यहीं से ‘व्यावसायिक रंगमंच’ (Commercial Theatre) … Read more

हिंदी रंगमंच की प्रमुख शैलियाँ

रंगमंच एक जीवंत और परिवर्तनशील कला है। समय, परिस्थिति, और दर्शकों की रुचि के अनुसार नाटकों को मंच पर प्रस्तुत करने के तरीके निरंतर बदलते रहे हैं। नाटक के प्रस्तुतीकरण (Presentation) के इन्हीं अलग-अलग तरीकों को ‘रंगमंच की शैली’ (Style of Theatre) कहा जाता है। एक ही नाटक को अलग-अलग शैलियों में खेला जा सकता … Read more

हिंदी रंगमंच का उद्भव और विकास-यात्रा

रंगमंच हमेशा से समाज का दर्पण रहा है। भारत में रंगमंच की परंपरा बहुत पुरानी है, जिसकी शुरुआत संस्कृत नाटकों (जैसे कालिदास और भवभूति की रचनाओं) से हुई थी। लेकिन जब हम ‘हिंदी रंगमंच’ की बात करते हैं, तो इसका इतिहास मुख्य रूप से 19वीं शताब्दी से शुरू होता है। हिंदी रंगमंच ने अपने जन्म … Read more

नाटक और रंगमंच: परिभाषा, व्यापक अर्थ और एक-दूसरे के पूरक

साहित्य और कला के क्षेत्र में ‘नाटक’ और ‘रंगमंच’ दो ऐसे शब्द हैं जिनका उल्लेख हमेशा एक साथ किया जाता है। हालाँकि दोनों की अपनी स्वतंत्र पहचान है, लेकिन कलात्मक पूर्णता के लिए दोनों को एक-दूसरे की आवश्यकता होती है। 1. नाटक का अर्थ एवं परिभाषा हिंदी का ‘नाटक’ शब्द संस्कृत की ‘नट्’ धातु से … Read more

रंगमंच का अर्थ, स्वरूप व हिंदी रंगमंच

रंगमंच का अर्थ, स्वरूप और हिंदी रंगमंच की अवधारणा रंगमंच का अर्थ ‘रंगमंच’ मुख्य रूप से दो शब्दों के मेल से बना है— ‘रंग’ और ‘मंच’। ‘रंग’ का अर्थ है आकर्षण, भाव, रंग-सज्जा या दर्शकों का मनोरंजन, और ‘मंच’ का अर्थ है वह चबूतरा या निर्धारित स्थान जहाँ अभिनय किया जाता है।सरल शब्दों में कहें … Read more

साहित्यिक अनुवाद : अर्थ, प्रकार व विशेषताएँ

अर्थ (Meaning) साहित्यिक अनुवाद का मतलब किसी एक भाषा (स्रोत भाषा) में रचे गए साहित्य—जैसे कविता, कहानी, नाटक या उपन्यास—को दूसरी भाषा (लक्ष्य भाषा) में इस तरह बदलना है कि उसका मूल भाव, सुंदरता और प्रभाव ज्यों का त्यों बना रहे। यह केवल शब्दों का मशीनी अनुवाद नहीं है, बल्कि यह भावनाओं, विचारों, संस्कृति और … Read more

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