शरद जोशी का साहित्यिक परिचय

जीवन परिचय — हिंदी साहित्य के शीर्ष और सबसे लोकप्रिय व्यंग्यकारों में गिने जाने वाले शरद जोशी का जन्म 21 मई 1931 को मध्य प्रदेश के उज्जैन में हुआ था। उन्होंने अपना पूरा जीवन स्वतंत्र लेखन और व्यंग्य को समर्पित कर दिया। सरकारी नौकरी छोड़कर उन्होंने पत्रकारिता को अपनाया। उन्होंने ‘ये जो है ज़िंदगी’ और … Read more

कन्हैयालाल मिश्र प्रभाकर का साहित्यिक परिचय

जीवन परिचय — प्रसिद्ध निबंधकार, रेखाचित्रकार और कुशल पत्रकार कन्हैयालाल मिश्र ‘प्रभाकर’ का जन्म 29 मई 1906 को उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले के देवबंद में हुआ था। इन्होंने अपनी शिक्षा संस्कृत में प्राप्त की। वे एक सच्चे देशभक्त थे और आज़ादी की लड़ाई में भाग लेने के कारण उन्हें कई बार जेल भी जाना … Read more

रामवृक्ष बेनीपुरी का साहित्यिक परिचय

जीवन परिचय — ‘कलम के जादूगर’ के नाम से मशहूर रामवृक्ष बेनीपुरी जी का जन्म 23 दिसंबर 1899 को बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के ‘बेनीपुर’ गाँव में हुआ था। बचपन में ही माता-पिता का साया उठने के कारण उनका प्रारंभिक जीवन काफी संघर्षों भरा रहा। वे केवल एक उत्कृष्ट साहित्यकार ही नहीं, बल्कि एक महान … Read more

हरिवंश राय बच्चन का साहित्यिक परिचय

जीवन परिचय — हालावाद के प्रवर्तक और हिंदी के लोकप्रिय कवि हरिवंश राय बच्चन का जन्म 27 नवंबर 1907 को प्रयागराज (इलाहाबाद) में हुआ था। उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से अंग्रेजी में एम.ए. और कैंब्रिज विश्वविद्यालय से पीएचडी की डिग्री हासिल की। उन्होंने कुछ समय तक विश्वविद्यालय में प्राध्यापक के रूप में पढ़ाया और बाद में … Read more

माधवप्रसाद मिश्र का साहित्यिक परिचय

जीवन परिचय : हिंदी साहित्य के द्विवेदी युग के सशक्त हस्ताक्षर और प्रसिद्ध पत्रकार पं. माधवप्रसाद मिश्र का जन्म सन् 1871 ई. में हरियाणा के भिवानी जिले के ‘कूंगड़’ नामक गाँव में हुआ था। उनके पिता पं. रामजीदास अपने समय के जाने-माने विद्वान थे, जिसका गहरा सकारात्मक प्रभाव मिश्र जी पर पड़ा। बचपन से ही … Read more

‘नीड़ का निर्माण फिर’ आत्मकथा के तत्त्वों के आधार पर समीक्षा

प्रश्न: आत्मकथा के तत्त्वों के आधार पर हरिवंशराय बच्चन की आत्मकथा ‘नीड़ का निर्माण फिर’ की समीक्षा कीजिए।उत्तर: आत्मकथा (ऑटोबायोग्राफी) साहित्य का वह रूप है जिसमें लेखक अपने जीवन की सच्ची घटनाओं को खुद लिखता है। एक अच्छी आत्मकथा में सच्चाई, घटनाओं का सही क्रम, निष्पक्षता और खुद का मूल्यांकन (आत्म-विश्लेषण) जैसे गुण होने चाहिए। … Read more

माधव प्रसाद मिश्र के पत्र

प्रश्न: 1 “पत्र आत्मीयता और सामाजिक संबंधों के प्रतीक होते हैं”- मिश्र जी के पत्रों के आलोक में इस कथन की सार्थकता स्पष्ट कीजिए। उत्तर: पत्रों में हमारा अपनापन, प्यार और सीधापन झलकता है, इसलिए इन्हें आपसी और सामाजिक रिश्तों का एक बहुत मजबूत आधार माना जाता है। पत्र लिखना इंसान की एक स्वाभाविक और … Read more

हिंदी का मानकीकरण / हिंदी वर्तनी के नियम

​हिंदी भाषा का मानकीकरण और वर्तनी के नियम ​किसी भी भाषा के विस्तृत क्षेत्र में प्रयोग, शिक्षा, प्रशासन और मुद्रण के लिए यह आवश्यक है कि उसके स्वरूप में एकरूपता हो। इसी एकरूपता को स्थापित करने की प्रक्रिया को मानकीकरण (Standardization) कहा जाता है। ​हिंदी का मानकीकरण: एक परिचय ​हिंदी एक विशाल भू-भाग में बोली … Read more

हिंदी भाषण ध्वनियाँ / हिंदी की ध्वनि संरचना

हिंदी भाषण ध्वनियों (Hindi Speech Sounds) का अध्ययन हिंदी भाषण ध्वनियों का अध्ययन भाषाविज्ञान का एक अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह हमें यह समझने में सहायता करता है कि हमारे मुख से निकलने वाली विभिन्न ध्वनियाँ किस प्रकार आपस में मिलकर अर्थपूर्ण शब्दों और वाक्यों का निर्माण करती हैं। हिंदी एक पूर्णतः वैज्ञानिक भाषा है, … Read more

अनुवाद का अर्थ, क्षेत्र व महत्व

अनुवाद एक भाषा में व्यक्त विचारों को दूसरी भाषा में समान रूप से प्रस्तुत करने की कला और विज्ञान है। यह केवल शब्दों का रूपांतरण नहीं, बल्कि दो संस्कृतियों के बीच सेतु का कार्य करता है। ​अनुवाद: अर्थ एवं परिभाषा ​अर्थ: ‘अनुवाद’ शब्द संस्कृत की ‘वद्’ धातु में ‘अनु’ उपसर्ग लगाकर बना है। ‘वद्’ का … Read more

तनाव प्रबंधन का अर्थ व आवश्यकता / महत्त्व

तनाव प्रबंधन (Stress Management) उन तकनीकों, रणनीतियों और जीवनशैली के बदलावों का समूह है, जिनका उपयोग मानसिक और शारीरिक तनाव को नियंत्रित करने और कम करने के लिए किया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य व्यक्ति को कठिन और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों का शांतिपूर्वक सामना करने के लिए तैयार करना है। तनाव प्रबंधन का मतलब तनाव को … Read more

तनाव का अर्थ व कारण

तनाव (Stress) एक शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक प्रतिक्रिया है, जो तब उत्पन्न होती है जब व्यक्ति किसी चुनौतीपूर्ण, कठिन या अत्यधिक मांग वाली परिस्थिति का सामना करता है। सरल शब्दों में, जब हमारी क्षमता और परिस्थिति की मांगों के बीच असंतुलन पैदा हो जाता है, तो मस्तिष्क और शरीर में जो खिंचाव या दबाव महसूस … Read more

समय प्रबंधन का अर्थ, तत्त्व / अंग और महत्त्व /लाभ

समय प्रबंधन (Time Management) का सरल अर्थ है—अपने उपलब्ध समय का सही और बुद्धिमानी से नियोजन (Planning) करना ताकि आप कम समय में अधिक और बेहतर कार्य कर सकें। यह केवल घड़ी देखना नहीं है, बल्कि अपने जीवन और कार्यों पर नियंत्रण पाना है। समय प्रबंधन के प्रमुख तत्त्व या अंग (1) लक्ष्यों का निर्धारण … Read more

हिंदी की प्रासंगिकता / वर्तमान में हिंदी का महत्त्व

हिंदी केवल बातचीत का माध्यम नहीं है, बल्कि यह करोड़ों भारतीयों के दिलों की धड़कन और हमारी पहचान है। आज के बदलते दौर में, जहाँ अंग्रेजी का बोलबाला बढ़ रहा है, हिंदी ने अपनी सरलता और लचीलेपन के कारण अपनी प्रासंगिकता को और भी मजबूत किया है। चाहे बाजार हो, तकनीक हो या मनोरंजन, हिंदी … Read more

हरिवंश राय बच्चन की आत्मकथा ‘नीड़ का निर्माण फिर’ की समीक्षा

साहित्य में ‘आत्मकथा’ उस विधा को कहते हैं जिसमें कोई लेखक अपने ही जीवन की कहानी को खुद लिखता है। हिंदी साहित्य में महान कवि हरिवंशराय बच्चन जी की आत्मकथा का बहुत ऊँचा स्थान है। उन्होंने अपने जीवन की कहानी को चार भागों में लिखा था। इनमें से दूसरा भाग है— ‘नीड़ का निर्माण फिर’।इस … Read more

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