साकेत की रामचरित मानस से भिन्नता
हिंदी साहित्य में रामकथा एक अमर और अखंड प्रवाह की तरह बहती रही है। इस कथा को सबसे पहले संस्कृत में वाल्मीकि ने कहा, फिर उसे लोकभाषा में अमर रूप दिया गोस्वामी तुलसीदास ने। तुलसीदास का ‘रामचरितमानस’ भक्ति, नीति और धर्म का महासागर है। बाद में आधुनिक युग में जब समाज, संस्कृति और विचारों में … Read more