स्पीति में बारिश ( कृष्णनाथ ) / Sptiti Mein Barish ( Krishan Nath )

स्पीति हिमाचल प्रदेश के लाहुल-स्पीति जिले की तहसील है। लाहुल-स्पीति का यह योग भी आकस्मिक ही है। इनमें बहुत योगायोग नहीं है। ऊँचे दरों और कठिन रास्तों के कारण इतिहास में भी कम रहा है। अलंघ्य भूगोल यहाँ इतिहास का एक बड़ा कारक है। अब जबकि संचार में कुछ सुधार हुआ है तब भी लाहुल-स्पीति … Read more

विदाई संभाषण ( निबंध ) : बालमुकुंद गुप्त

माई लार्ड! अंत को आपके शासन-काल का इस देश में अंत हो गया। अब आप इस देश से अलग होते हैं। इस संसार में सब बातों का अंत है। इससे आपके शासन-काल का भी अंत होता, चाहे आपकी एक बार की कल्पना के अनुसार आप यहाँ के चिरस्थायी वायसराय भी हो जाते। किंतु इतनी जल्दी … Read more

अपु के साथ ढाई साल ( संस्मरण ): सत्यजित राय

पथेर पाँचाली फ़िल्म की शूटिंग का काम ढाई साल तक चला था! इस ढाई साल के कालखंड में हर रोज़ तो शूटिंग होती नहीं थी। मैं तब एक विज्ञापन कंपनी में नौकरी करता था। नौकरी के काम से जब फ़ुर्सत मिलती थी, तब शूटिंग करता था। मेरे पास उस समय पर्याप्त पैसे भी नहीं थे। … Read more

मियाँ नसिरुद्दीन ( रेखाचित्र ) : कृष्णा सोबती

साहबों, उस दिन अपन मटियामहल की तरफ़ से न गुज़र जाते तो राजनीति, साहित्य और कला के हज़ारों-हज़ार मसीहों के धूम-धड़क्के में नानबाइयों के मसीहा मियाँ नसीरुद्दीन को कैसे तो पहचानते और कैसे उठाते लुत्फ़ उनके मसीही अंदाज़ का!हुआ यह कि हम एक दुपहरी जामा मस्जिद के आड़े पड़े मटियामहल के गढ़ैया मुहल्ले की ओर … Read more

गलता लोहा ( शेखर जोशी )/ Galta Loha ( Shekhar Joshi )

मोहन के पैर अनायास ही शिल्पकार टोले की ओर मुड़ गए। उसके मन के किसी कोने में शायद धनराम लुहार के ऑफ़र की वह अनुगूँज शेष थी जिसे वह पिछले तीन-चार दिनों से दुकान की ओर जाते हुए दूर से सुनता रहा था। निहाई पर रखे लाल गर्म लोहे पर पड़ती हथौड़े की धप्-धप् आवाज़, … Read more

नमक का दारोगा ( हिंदी कहानी) : प्रेमचंद / Namak Ka Daroga : Premchand

जब नमक का नया विभाग बना और ईश्वरप्रदत्त वस्तु के व्यवहार करने का निषेध हो गया तो लोग चोरी-छिपे इसका व्यापार करने लगे। अनेक प्रकार के छल-प्रपंचों का सूत्रपात हुआ, कोई घूस से काम निकालता था, कोई चालाकी से। अधिकारियों के पौ-बारह थे। पटवारीगिरी का सर्वसम्मानित पद छोड-छोडकर लोग इस विभाग की बरकंदाजी करते थे। … Read more

बच्चे काम पर जा रहे हैं ( राजेश जोशी )

( यहाँ NCERT की कक्षा 9वीं की हिंदी की पाठ्य पुस्तक ‘क्षतिज भाग 1’ में संकलित ‘बच्चे काम पर जा रहे हैं ( राजेश जोशी )’ अध्याय के मूल पाठ, व्याख्या तथा अभ्यास के प्रश्नों को दिया गया है | ) व्याख्या — यह कविता बाल मज़दूरी की गंभीर समस्या और उस पर समाज की … Read more

चंद्रकांत देवताले ( Chandrkant Devtale) का साहित्यिक परिचय

जीवन परिचय चंद्रकांत देवताले ( Chandrkant Devtale) हिंदी साहित्य के प्रमुख कवियों में से एक थे, जिनका जन्म 7 नवंबर 1936 को मध्य प्रदेश के बैतूल जिले के जौलखेड़ा गाँव में एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ। बचपन से ही साहित्यिक वातावरण में पलने वाले देवताले ने प्रारंभिक और उच्च शिक्षा इंदौर से प्राप्त की, जहाँ … Read more

आलोक धन्वा का साहित्यिक परिचय

जीवन परिचय आलोक धन्वा का जन्म 2 जुलाई 1948 को बिहार के मुंगेर जिले के बेलबिहमा गाँव में एक साधारण परिवार में हुआ। वे हिंदी साहित्य के सशक्त जनकवि हैं, जिन्होंने 1970 के दशक में नई कविता को सामाजिक चेतना से जोड़ा। उनकी पहली कविता ‘जनता का आदमी’ ने 1972 में ‘वाम’ पत्रिका में प्रकाशित … Read more

चाँद और कवि ( रामधारी सिंह दिनकर )

रात यों कहने लगा मुझसे गगन का चाँद,आदमी भी क्या अनोखा जीव है!उलझनें अपनी बनाकर आप ही फँसता,और फिर बेचैन हो जगता, न सोता है। जानता है तू कि मैं कितना पुराना हूँ?मैं चुका हूँ देख मनु को जनमते-मरतेऔर लाखों बार तुझ-से पागलों को भीचाँदनी में बैठ स्वप्नों पर सही करते। आदमी का स्वप्न? है … Read more

कुकुरमुत्ता ( सूर्यकांत त्रिपाठी निराला )

कुकुरमुत्ता भाग 1 एक थे नव्वाब, फ़ारस के मँगाए थे गुलाब।बड़ी बाड़ी में लगाए देशी पौधे भी उगाएरखे माली कई नौकर ग़ज़नवी का बाग़ मनहरलग रहा था। एक सपना जग रहा था साँस पर तहज़ीब की, गोद पर तरतीब की।क्यारियाँ सुंदर बनी चमन में फैली घनी।फूलों के पौधे वहाँ लग रहे थे ख़ुशनुमा।बेला, गुलशब्बो, चमेली, … Read more

सरदार पूर्ण सिंह का साहित्यिक परिचय

जीवन परिचय सरदार पूर्ण सिंह जिन्हें अध्यापक पूर्ण सिंह के नाम से जाना जाता है, का जन्म 17 फरवरी 1881 को एबटाबाद (वर्तमान पाकिस्तान) के सलहड़ गाँव में एक सिख परिवार में हुआ था। उनके पिता करतार सिंह राजस्व विभाग में कार्यरत थे, जबकि माता परमा देवी धार्मिक प्रवृत्ति की थीं। प्रारंभिक शिक्षा रावलपिंडी से … Read more

पीछे मत फेंकिये ( निबंध ) : बालमुकुंद गुप्त / Piche Mat Fenkiye ( Nibandh ) : Balmukund Gupt

‘पीछे मत फेंकिये’ ( निबंध ) का मूल पाठ माई लार्ड! सौ साल पूरे होने में अभी कई महीनों की कसर है। उस समय ईस्ट इण्डिया कम्पनी ने लार्ड कार्नवालिस को दूसरी बार इस देश का गवर्नर-जनरल बनाकर भेजा था। तबसे अब तक आप ही को भारतवर्ष का फिर से शासक बनकर आने का अवसर … Read more

‘बूढ़ी काकी’ कहानी की तात्विक समीक्षा / ‘Budhi Kaki’ Kahani Ki Tatvik Samiksha

मुंशी प्रेमचंद की कहानी ‘बूढ़ी काकी’ हिंदी साहित्य की एक मार्मिक कृति है, जो बुढ़ापे की लाचारी, पारिवारिक उपेक्षा और मानवीय संवेदनाओं को यथार्थवादी ढंग से उजागर करती है। कहानी-कला के छह प्रमुख तत्वों—कथावस्तु, पात्र एवं चरित्र-चित्रण, कथोपकथन या संवाद, देशकाल या वातावरण, उद्देश्य तथा भाषा-शैली—के आधार पर इसकी तात्विक समीक्षा निम्नलिखित है : (1) … Read more

‘मजदूरी और प्रेम’ निबंध का सारांश व मूल भाव या संदेश

सरदार पूर्ण सिंह का निबंध ‘मजदूरी और प्रेम’ हिंदी साहित्य की एक महत्वपूर्ण रचना है, जो श्रम की गरिमा, पवित्रता और प्रेम के साथ इसके संयोग को काव्यात्मक तथा दार्शनिक शैली में प्रस्तुत करता है। निबंध का उद्देश्य आधुनिक समाज में श्रम की उपेक्षा की आलोचना करना और प्रेमपूर्ण श्रम को ईश्वरीय बताना है। निबंध … Read more

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