हिंदी ( कक्षा 11) — आरोह व वितान

आरोह भाग 1 (गद्य खंड) नमक का दारोगा ( कहानी) : प्रेमचंद मियाँ नसिरुद्दीन ( रेखाचित्र ) : कृष्णा सोबती अपु के साथ ढाई साल ( संस्मरण ): सत्यजित राय विदाई संभाषण ( निबंध ) : बालमुकुंद गुप्त गलता लोहा ( शेखर जोशी ) स्पीति में बारिश ( कृष्णनाथ ) रजनी ( मन्नू भंडारी )/ … Read more

आओ मिलकर बचाएँ : निर्मला पुतुल ( Aao, Milkar Bachayen : Nirmala Putul )

अपनी बस्तियों को नंगी होने से शहर की आबो-हवा से बचाएँ उसे बचाएँ डूबने से पूरी की पूरी बस्ती को हड़िया में (1) व्याख्या – प्रस्तुत पंक्तियों में कवयित्री झारखंड की अपनी संथाली आदिवासी संस्कृति को शहरी सभ्यता-संस्कृति के कुप्रभाव से दूर रखना चाहती हैं क्योंकि अब आदिवासी लोग भी अपनी संस्कृति को छोड़कर धीरे-धीरे … Read more

सबसे खतरनाक : पाश ( Sabse Khatarnak : Pash )

मेहनत की लूट सबसे ख़तरनाक नहीं होती पुलिस की मार सबसे ख़तरनाक नहीं होती गद्दारी-लोभ की मुट्ठी सबसे ख़तरनाक नहीं होती बैठे-बिठाए पकड़े जाना – बुरा तो है सहमी-सी चुप में जकड़े जाना – बुरा तो है पर सबसे ख़तरनाक नहीं होता कपट के शोर में सही होते हुए भी दब जाना – बुरा तो … Read more

अक्क महादेवी ( Akka Mahadevi )

पद 1 हे भूख! मत मचल प्यास, तड़प मत हे नींद! मत सता क्रोध, मचा मत उधल-पुथल हे मोह! पाश अपने ढील लोभ, मत ललचा हे मद! मत कर मदहोश ईर्ष्या, जला मत ओ चराचर! मत चूक अवसर आई हूँ संदेश लेकर चन्नमलिकार्जुन का | 1️⃣ व्याख्या – प्रस्तुत पद में कवयित्री अक्क महादेवी इंद्रियों … Read more

साये में धूप ( दुष्यंत कुमार )

कहाँ तो तय था चिरागाँ हरेक घर के लिए, कहाँ चिराग मयस्सर नहीं शहर के लिए | 1️⃣ व्याख्या – उपरोक्त पंक्तियों में उन नेताओं पर व्यंग्य किया है जो चुनाव के वक्त जनता को रंग-बिरंगे, लोक-लुभावने सपने दिखाते हैं मगर सत्ता में आते ही जनता से किए वादों को भूल जाते हैं। प्रस्तुत पंक्तियों … Read more

चंपा काले काले अच्छर नहीं चीन्हती : त्रिलोचन

चंपा काले काले अच्छर नहीं चीन्हती मैं जब पढ़ने लगता हूँ वह आ जाती है खड़ी खड़ी चुपचाप सुना करती है उसे बड़ा अचरज होता है ; इन काले चिन्हों से कैसे ये सब स्वर निकला करते हैं | 1️⃣ व्याख्या – कवि चंपा नामक लड़की, जो की अनपढ़ है, उसकी निरक्षरता के बारे में … Read more

घर की याद : भवानी प्रसाद मिश्र ( Ghar Ki Yad : Bhawani Prasad Mishra )

आज पानी गिर रहा है, बहुत पानी गिर रहा है, रात भर गिरता रहा है, प्राण मन घिरता रहा है, बहुत पानी गिर रहा है, घर नजर में तिर रहा है, घर की मुझसे दूर है जो, घर खुशी का पूर है जो, 1️⃣ व्याख्या –– इन पंक्तियों में कवि अपने घर से दूर जेल … Read more

हम तौ एक एक करि जांनां कबीर ( Kabir Ke Pad Class 11)

पद 1 हम तौ एक एक करि जाना | दोइ कहैं तिनहीं कौँ दोजग जिन नाहिंन पहिचांनां || एकै पवन एक ही पानीं एकै जोति समांनां | एकै खाक गढ़े सब भांडै एकै कोंहरा सांनां || जैसे बाढ़ी काष्ट ही काटै अगिनी न काटै कोई | सब घटि अंतरि तूँही व्यापक धरै सरूपै सोई || … Read more

मेरे तो गिरधर गोपाल, दूसरो न कोई / मीरा( मीराबाई)

( यहाँ NCERT की हिंदी की पाठ्य पुस्तक ‘आरोह भाग 1’ में संकलित मीरा ( Mirabai ) के पदों की व्याख्या तथा अभ्यास के प्रश्न दिए गए हैं |) पद 1 मेरे तो गिरधर गोपाल, दूसरो न कोई जा के सिर मोर-मुकुट, मेरो पति सोई छांडि दयी कुल की कानि, कहा करिहै कोई? संतन ढिग … Read more

वे आँखें ( सुमित्रानंदन पंत )

अंधकार की गुहा सरीखी उन आँखों से डरता है मन, भरा दूर तक उनमें दारुण दैन्य दुख का नीरव रोदन! वह स्वाधीन किसान रहा, अभिमान भरा आँखों में इसका, छोड़ उसे मँझधार आज संसार कगार सदृश बह खिसका | 1️⃣ व्याख्या — प्रस्तुत काव्यांश में, कवि पंत जी के द्वारा भारतीय कृषकों के शोषण व … Read more

पथिक ( रामनरेश त्रिपाठी )

प्रतिक्षण नूतन वेश बनाकर रंग-बिरंग निराला | रवि के सम्मुख थिरक रही है नभ में वारिद-माला | नीचे नील समुद्र मनोहर ऊपर नील गगन है | घन पर बैठ, बीच में बिचरूँ यही चाहता मन है || 1️⃣ रत्नाकर गर्जन करता है, मलयानिल बहता है | हरदम यह हौसला हृदय में प्रिये! भरा रहता है … Read more

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