राम की शक्ति पूजा : सूर्यकांत त्रिपाठी निराला ( भाग 3)
(17) व्याख्या : विभीषण श्री राम से कहते हैं — “हाय! जब फल प्राप्ति का समय आया, तब सोचो इस पलायन से कितना श्रम व्यर्थ चला जाएगा? अब तक तो हम लोग विजय-लाभ के लिए काफी खून-पसीना बहा चुके हैं। क्या यह सब व्यर्थ ही न चला जायेगा ? अभी तो जानकी से मिलने का … Read more