स्वत्व-रक्षा (हिंदी कहानी) : मुंशी प्रेमचंद

Swatwa Raksha (Hindi Kahani) : Munshi Premchand मीर दिलावर अली के पास एक बड़ी रास का कुम्मैत घोड़ा था। कहते तो वह यही थे कि मैंने अपनी जिन्दगी की आधी कमाई इस पर खर्च की है, पर वास्तव में उन्होंने इसे पलटन से सस्ते दामों मोल लिया था। यों कहिए कि यह पलटन का निकाला … Read more

दूध का दाम (हिंदी कहानी) : मुंशी प्रेमचंद

Doodh Ka Daam (Hindi Kahani) : Munshi Premchand अब बड़े-बड़े शहरों में दाइयाँ, नर्सें और लेडी डाक्टर, सभी पैदा हो गयी हैं; लेकिन देहातों में जच्चेखानों पर अभी तक भंगिनों का ही प्रभुत्व है और निकट भविष्य में इसमें कोई तब्दीली होने की आशा नहीं। बाबू महेशनाथ अपने गाँव के जमींदार थे, शिक्षित थे और … Read more

ठाकुर का कुआँ (हिंदी कहानी) : मुंशी प्रेमचंद

Thakur Ka Kuan (Hindi Kahani) : Munshi Premchand जोखू ने लोटा मुँह से लगाया तो पानी में सख्त बदबू आयी । गंगी से बोला- यह कैसा पानी है ? मारे बास के पिया नहीं जाता । गला सूखा जा रहा है और तू सड़ा पानी पिलाये देती है | गंगी प्रतिदिन शाम पानी भर लिया … Read more

पूस की रात ( प्रेमचंद )

हल्कू ने आकर स्त्री से कहा—सहना आया है, लाओ, जो रुपए रखे हैं, उसे दे दूँ, किसी तरह गला तो छूटे।मुन्नी झाड़ू लगा रही थी। पीछे फिरकर बोली—तीन ही तो रुपए हैं, दे दोगे तो कम्मल कहाँ से आवेगा? माघ-पूस की रात हार में कैसे कटेगी? उससे कह दो, फसल पर दे देंगे। अभी नहीं। … Read more

सद्गति ( हिंदी कहानी ) : मुंशी प्रेमचंद

Sadgati ( Hindi Kahani ) : Munshi Premchand दुखी चमार द्वार पर झाड़ू लगा रहा था और उसकी पत्नी झुरिया घर को गोबर से लीप रही थी। दोनों अपने-अपने काम से फुरसत पा चुके तो चमारिन ने कहा,‘‘तो जाके पंडित बाबा से कह आओ न ! ऐसा न हो, कहीं चले जाएँ।’’दुखी—‘‘हाँ जाता हूँ; लेकिन … Read more

गुल्ली-डंडा ( हिंदी कहानी ): मुंशी प्रेमचंद

Gulli -Danda ( Hindi Kahani ): Munshi Premchand हमारे अँग्रेजी दोस्त मानें या न मानें मैं तो यही कहूँगा कि गुल्ली-डंडा सब खेलों का राजा है। अब भी कभी लड़कों को गुल्ली-डंडा खेलते देखता हूँ, तो जी लोट-पोट हो जाता है कि इनके साथ जाकर खेलने लगूँ। न लान की जरूरत, न कोर्ट की, न … Read more

पंच परमेश्वर ( हिंदी कहानी ) : मुंशी प्रेमचंद

Panch Parmeshvar ( Hindi Kahani ) : Munshi Premchand जुम्मन शेख अलगू चौधरी में गाढ़ी मित्रता थी। साझे में खेती होती थी। कुछ लेन-देन में भी साझा था। एक को दूसरे पर अटल विश्वास था। जुम्मन जब हज करने गये थे, तब अपना घर अलगू को सौंप गये थे, और अलगू जब कभी बाहर जाते, … Read more

बड़े भाई साहब ( हिंदी कहानी ) : मुंशी प्रेमचंद

Bade Bhai Sahab (Hindi Kahani ): Munshi Premchand मेरे भाई साहब मुझसे पाँच साल बडे थे, लेकिन तीन दरजे आगे। उन्‍होने भी उसी उम्र में पढना शुरू किया था जब मैने शुरू किया; लेकिन तालीम जैसे महत्‍व के मामले में वह जल्‍दीबाजी से काम लेना पसंद न करते थे। इस भवन कि बुनियाद खूब मजबूत … Read more

महाजनी सभ्यता ( हिंदी निबंध ) : प्रेमचंद

मुज़द: ए दिल कि मसीहा नफ़से मी आयद; कि जे़ अनफ़ास खुशश बूए कसे मी आयद। ( हृदय तू प्रसन्न हो कि पीयूषपाणि मसीहा सशरीर तेरी ओर आ रहा है। देखता नहीं कि लोगों की साँसों से किसी की सुगन्धि आ रही है।) जागीरदारी सभ्यता में बलवान भुजाएँ और मजबूत कलेजा जीवन की आवश्यकताओें में … Read more

उर्दू, हिन्दी और हिन्दुस्तानी (हिन्दी निबंध) : मुंशी प्रेमचंद

Urdu, Hindi Aur Hindustani (Hindi Nibandh) : Munshi Premchand यह बात सभी लोग मानते हैं कि राष्ट्र को दृढ़ और बलवान बनाने के लिए देश में सांस्कृतिक एकता का होना बहुत आवश्यक है। और किसी राष्ट्र की भाषा तथा लिपि इस सांस्कृतिक एकता का एक अंग है। श्रीमती खलीदा अदीब खानम ने अपने एक भाषण … Read more

साम्प्रदायिकता और संस्कृति ( हिंदी निबंध ) : प्रेमचंद

Sampradayikta Aur Sanskriti ( Hindi Nibandh ) : Premchand साम्प्रदायिकता सदैव संस्कृति की दुहाई दिया करती है। उसे अपने असली रूप में निकलने में शायद लज्जा आती है, इसलिए वह उस गधे की भाँति जो सिंह की खाल ओढ़कर जंगल में जानवरों पर रोब जमाता फिरता था, संस्कृति का खोल ओढ़कर आती है। हिन्दू अपनी … Read more

मंत्र ( मुंशी प्रेमचंद )

मुंशी प्रेमचंद द्वारा लिखित कहानी मंत्र समाज के कठोर यथार्थ और मानव मूर्तियों पर आधारित एक मार्मिक कहानी है यह कहानी एक घमंडी डॉक्टर और एक दयालु गरीब बुद्ध भगत के बीच की भावनात्मक और नैतिक लड़ाई की कहानी है | कहानी का मुख्य संदेश है कि हमें अमीर-गरीब के साथ समान व्यवहार करना चाहिए … Read more

शतरंज के खिलाड़ी ( मुंशी प्रेमचंद )

मुंशी प्रेमचंद की कहानी शतरंज के खिलाड़ी पहली बार अक्टूबर 1924 में हिंदी पत्रिका ‘माधुरी’ में प्रकाशित हुई। यह कहानी अवध के नवाबी युग की पृष्ठभूमि पर आधारित है, जो लखनऊ के दो जमींदारों, मिर्जा सज्जाद अली और मीर रोशन अली की शतरंज के प्रति जुनूनी लत को दर्शाती है। प्रेमचंद ने इस कहानी के … Read more

मोहन राकेश का साहित्यिक परिचय

मोहन राकेश का जीवन परिचय ( Mohan Rakesh Ka Jivan Parichay ) मोहन राकेश का जन्म 8 जनवरी 1925 को अमृतसर, पंजाब में एक सिंधी परिवार में हुआ। उनका मूल नाम मदन मोहन गुगलानी था। पिता कर्मचंद गुगलानी वकील थे। प्रारंभिक शिक्षा अमृतसर में हुई, फिर पंजाब विश्वविद्यालय से हिंदी और अंग्रेजी में एम.ए. किया। … Read more

यही मेरा वतन है : प्रेमचंद ( कहानी )

आज पूरे साठ बरस के बाद मुझे अपने वतन, प्यारे वतन का दर्शन फिर नसीब हुआ। जिस वक़्त मैं अपने प्यारे देश से विदा हुआ और क़िस्मत मुझे पच्छिम की तरफ़ ले चली, मेरी उठती जवानी थी। मेरी रगों में ताज़ा खून दौड़ता था और सीना उमंगों और बड़े-बड़े इरादों से भरा हुआ था। मुझे … Read more

error: Content is proteced protected !!