राजस्थान की रजत बूंदें ( अनुपम मिश्र ) / Rajasthan Ki Rajat Boonden ( Anupam Mishra )

पसीने में तरबतर चेलवांजी कुंई के भीतर काम कर रहे हैं। कोई तीस-पैंतीस हाथ गहरी खुदाई हो चुकी है। अब भीतर गरमी बढ़ती ही जाएगी। कुंई का व्यास, घेरा बहुत ही संकरा है। उखरू ( उकडूं ) बैठे चेलवांजी की पीठ और छाती से एक-एक हाथ की दूरी पर मिट्टी है। इतनी संकरी जगह में … Read more

भारतीय गायिकाओं में बेजोड़ : लता मंगेशकर ( कुमार गन्धर्व )

Bhartiya Gayikaon Mein Bejod : Lata Mangeshkar ( Kumar Gandharv ) बरसों पहले की बात है। मैं बीमार था। उस बीमारी में एक दिन मैंने सहज ही रेडियो लगाया और अचानक एक अद्वितीय स्वर मेरे कानों में पड़ा। स्वर सुनते ही मैंने अनुभव किया कि यह स्वर कुछ विशेष है, रोज़ का नहीं। यह स्वर … Read more

परंपरा ( रामधारी सिंह दिनकर )/ Parampara (Ramdhari Singh Dinkar )

यह भी देखें हिंदी भाषा एवं आधुनिक हिंदी कविता ( बी ए प्रथम सेमेस्टर ) ( पूरा सिलेबस ) हिंदी भाषा एवं /और आधुनिक हिंदी कविता ( बी ए प्रथम सेमेस्टर kuk ) ▪️मैथिलीशरण गुप्त का साहित्यिक परिचय ( Mathilisharan Gupt Ka Sahityik Parichay ) ▪️सखी, वे मुझसे कहकर जाते ( मैथिलीशरण गुप्त ) ▪️मातृमंदिर … Read more

रजनी ( मन्नू भंडारी )/ Rajani ( Mannu Bhandari )

(मध्यवर्गीय परिवार के फ़्लैट का एक कमरा. एक महिला रसोई में व्यस्त है. घंटी बजती है. बाई दरवाज़ा खोलती है. रजनी का प्रवेश.) रजनी: लीला बेन कहां हो…बाज़ार नहीं चलना क्या? लीला: (रसोई में से हाथ पोंछती हुई निकलती है) चलना तो था पर इस समय तो अमित आ रहा होगा अपना रिज़ल्ट लेकर. आज … Read more

आत्मा का ताप ( सैयद हैदर रज़ा ) / Aatma Ka Taap ( Saiyad Haidar Raza )

नागपुर स्कूल की परीक्षा में मैं कक्षा में प्रथम आया, दस में से नौ विषयों में मुझे विशेष योग्यता प्राप्त हुई। इससे मुझे बड़ी मदद मिली। पिता जी रिटायर हो चुके थे। अब मुझे नौकरी ढूँढ़नी थी। मैं गोंदिया’ में ड्राइंग का अध्यापक बन गया। महीने भर में ही मुझे बंबई में ‘जे.जे. स्कूल ऑफ … Read more

भारत माता ( जवाहरलाल नेहरू ) / Bharat Mata ( Jawaharlal Nahru )

अकसर जब मैं एक जलसे से दूसरे जलसे में जाता होता, और इस तरह चक्कर काटता रहता होता था, तो इन जलसों में मैं अपने सुनने वालों से अपने इस हिंदुस्तान या भारत की चर्चा करता। भारत एक संस्कृत शब्द है और इस जाति के परंपरागत संस्थापक के नाम से निकला हुआ है। मैं शहरों … Read more

जामुन का पेड़ ( कृश्न चंदर ) / Jamun Ka Ped ( Krishan Chandar )

रात को बड़े ज़ोर का अंधड़ चला. सेक्रेटेरिएट के लॉन में जामुन का एक पेड़ गिर पड़ा. सुबह जब माली ने देखा तो उसे मालूम हुआ कि पेड़ के नीचे एक आदमी दबा पड़ा है.माली दौड़ा-दौड़ा चपरासी के पास गया, चपरासी दौड़ा-दौड़ा क्‍लर्क के पास गया, क्‍लर्क दौड़ा-दौड़ा सुपरिन्‍टेंडेंट के पास गया. सुपरिन्‍टेंडेंट दौड़ा-दौड़ा बाहर … Read more

स्पीति में बारिश ( कृष्णनाथ ) / Sptiti Mein Barish ( Krishan Nath )

स्पीति हिमाचल प्रदेश के लाहुल-स्पीति जिले की तहसील है। लाहुल-स्पीति का यह योग भी आकस्मिक ही है। इनमें बहुत योगायोग नहीं है। ऊँचे दरों और कठिन रास्तों के कारण इतिहास में भी कम रहा है। अलंघ्य भूगोल यहाँ इतिहास का एक बड़ा कारक है। अब जबकि संचार में कुछ सुधार हुआ है तब भी लाहुल-स्पीति … Read more

विदाई संभाषण ( निबंध ) : बालमुकुंद गुप्त

माई लार्ड! अंत को आपके शासन-काल का इस देश में अंत हो गया। अब आप इस देश से अलग होते हैं। इस संसार में सब बातों का अंत है। इससे आपके शासन-काल का भी अंत होता, चाहे आपकी एक बार की कल्पना के अनुसार आप यहाँ के चिरस्थायी वायसराय भी हो जाते। किंतु इतनी जल्दी … Read more

अपु के साथ ढाई साल ( संस्मरण ): सत्यजित राय

पथेर पाँचाली फ़िल्म की शूटिंग का काम ढाई साल तक चला था! इस ढाई साल के कालखंड में हर रोज़ तो शूटिंग होती नहीं थी। मैं तब एक विज्ञापन कंपनी में नौकरी करता था। नौकरी के काम से जब फ़ुर्सत मिलती थी, तब शूटिंग करता था। मेरे पास उस समय पर्याप्त पैसे भी नहीं थे। … Read more

मियाँ नसिरुद्दीन ( रेखाचित्र ) : कृष्णा सोबती

साहबों, उस दिन अपन मटियामहल की तरफ़ से न गुज़र जाते तो राजनीति, साहित्य और कला के हज़ारों-हज़ार मसीहों के धूम-धड़क्के में नानबाइयों के मसीहा मियाँ नसीरुद्दीन को कैसे तो पहचानते और कैसे उठाते लुत्फ़ उनके मसीही अंदाज़ का!हुआ यह कि हम एक दुपहरी जामा मस्जिद के आड़े पड़े मटियामहल के गढ़ैया मुहल्ले की ओर … Read more

गलता लोहा ( शेखर जोशी )/ Galta Loha ( Shekhar Joshi )

मोहन के पैर अनायास ही शिल्पकार टोले की ओर मुड़ गए। उसके मन के किसी कोने में शायद धनराम लुहार के ऑफ़र की वह अनुगूँज शेष थी जिसे वह पिछले तीन-चार दिनों से दुकान की ओर जाते हुए दूर से सुनता रहा था। निहाई पर रखे लाल गर्म लोहे पर पड़ती हथौड़े की धप्-धप् आवाज़, … Read more

नमक का दारोगा ( हिंदी कहानी) : प्रेमचंद / Namak Ka Daroga : Premchand

जब नमक का नया विभाग बना और ईश्वरप्रदत्त वस्तु के व्यवहार करने का निषेध हो गया तो लोग चोरी-छिपे इसका व्यापार करने लगे। अनेक प्रकार के छल-प्रपंचों का सूत्रपात हुआ, कोई घूस से काम निकालता था, कोई चालाकी से। अधिकारियों के पौ-बारह थे। पटवारीगिरी का सर्वसम्मानित पद छोड-छोडकर लोग इस विभाग की बरकंदाजी करते थे। … Read more

बच्चे काम पर जा रहे हैं ( राजेश जोशी )

( यहाँ NCERT की कक्षा 9वीं की हिंदी की पाठ्य पुस्तक ‘क्षतिज भाग 1’ में संकलित ‘बच्चे काम पर जा रहे हैं ( राजेश जोशी )’ अध्याय के मूल पाठ, व्याख्या तथा अभ्यास के प्रश्नों को दिया गया है | ) व्याख्या — यह कविता बाल मज़दूरी की गंभीर समस्या और उस पर समाज की … Read more

चंद्रकांत देवताले ( Chandrkant Devtale) का साहित्यिक परिचय

जीवन परिचय चंद्रकांत देवताले ( Chandrkant Devtale) हिंदी साहित्य के प्रमुख कवियों में से एक थे, जिनका जन्म 7 नवंबर 1936 को मध्य प्रदेश के बैतूल जिले के जौलखेड़ा गाँव में एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ। बचपन से ही साहित्यिक वातावरण में पलने वाले देवताले ने प्रारंभिक और उच्च शिक्षा इंदौर से प्राप्त की, जहाँ … Read more

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