अभिहितान्वयवाद : अर्थ, परिभाषा, विशेषताएँ व व्याख्या
भारतीय भाषा-दर्शन और काव्य-शास्त्र में “वाक्यार्थ-निर्णय” एक अत्यंत महत्वपूर्ण विषय रहा है। जब भी हम कोई वाक्य पढ़ते या सुनते हैं, तो हमारे मन में जो अर्थ बनता है, वह कैसे बनता है—यह प्रश्न प्राचीन काल से विद्वानों के सामने रहा है। इसी समस्या का समाधान प्रस्तुत करने के लिए विभिन्न आचार्यों ने अपने-अपने सिद्धांत … Read more