आचार्य रामचंद्र शुक्ल से पूर्व हिंदी आलोचना
आचार्य रामचंद्र शुक्ल से पूर्व हिंदी आलोचना एक स्वतंत्र, विकसित और वैज्ञानिक विधा के रूप में स्थापित नहीं हुई थी। यद्यपि हिंदी साहित्य का इतिहास अत्यंत पुराना है, पर आलोचना की अवधारणा आरंभिक स्तर पर ही थी। यह आलोचना कभी धार्मिक टिप्पणियों, कभी काव्य-शास्त्रीय व्याख्याओं, तो कभी भाषा और समाज-सुधार संबंधी लेखों के रूप में … Read more