साकेत ( मैथिलीशरण गुप्त ) : विशेषताएँ, महत्त्व व रामकाव्य परम्परा में स्थान
हिंदी साहित्य में रामकाव्य परंपरा अत्यंत प्राचीन और समृद्ध रही है। आदिकवि वाल्मीकि से लेकर तुलसीदास तक और फिर आधुनिक कवियों तक, राम भारतीय जनमानस के आदर्श पुरुष, मर्यादा, नीति और धर्म के प्रतीक रूप में प्रतिष्ठित रहे हैं। रामकथा का निरंतर पुनर्लेखन, पुनर्व्याख्या और पुनर्पाठ इस बात का प्रमाण है कि यह कथा भारतीय … Read more