कक्षा 11 की हिंदी की पाठ्य-पुस्तक 'वितान भाग 1' में संकलित ''आलो आँधारी" ( बेबी हालदार ) का सारांश अभ्यास के प्रश्नों सहित |
प्रस्तुत रचना लेखिका बेबी हालदार की आत्मकथा है| उन्होंने बहुत कम आयु में ही अपने परिवार की जिम्मेदारी अकेले ही सँभाल लिया था| वह अपने पति से अलग तीन बच्चों के साथ किराए के मकान में अकेले ही रहती थी| वह काम की तलाश में इधर-उधर भटकती रहती थी| किसी के घर में नौकरानी का भी मिलता तो मजदूरी बहुत कम होती थी| इस कारण महीने के अंत में किराए की चिंता लगी रहती थी| आस-पास के लोग भी उससे तरह-तरह के सवाल पूछते थे कि वह अपने पति के साथ क्यों नहीं रहती| काम से देर से लौटने पर मकान-मालिक भी सवाल करता कि वह कौन-सा काम करती है| सुनील नाम के युवक की मदद से उसे एक घर में नौकरी मिल गई| वहाँ के मालिक एक सज्जन व्यक्ति थे| लेखिका को वह अपनी बेटी की तरह मानते थे| प्यार से लेखिका उन्हें तातुश कहती थीं|
तातुश को जब यह पता चला कि लेखिका को पढ़ने-लिखने का शौक है तो वे उसे पढ़ने के लिए उत्साहित करने लगे| उन्होंने लेखिका को कुछ किताबें दीं और समय निकाल कर पढ़ने के लिए कहा| उन्होंने लेखिका को अपनी जीवन-कहानी भी लिखने के लिए प्रेरित किया| लेखिका को किराए के घर में अनेक परेशानियों का सामना करना पड़ता था| वहाँ पानी और बाथरूम की असुविधा थी| किसी-किसी दिन उसे घर पहुँचने में देर हो जाती तो मकान-मालिक की पत्नी हजारों सवाल करती कि जब उसका पति नहीं है तो किसके साथ घूमती रहती है| आस-पास के लोग भी कानाफूसी करते रहते कि यह औरत अकेली ही अपने बच्चों के साथ क्यों रहती है| इसका पति साथ क्यों नहीं रहता है| लेखिका को अकेली देखकर कुछ लोग छेड़खानी करना चाहते और कुछ तो घर में जबरदस्ती घुस आते| तातुश के घर जाते ही लेखिका इन बातों को भूल जाती थी क्योंकि वे लेखिका से उसकी पढ़ाई के बारे में पूछते| तातुश अपने मित्रों को लेखिका की पढ़ाई-लिखाई के बारे में बताते रहते थे|
एक दिन लेखिका ने काम से वापस आने पर अपने घर को टूटा हुआ पाया| इस मुसीबत में उनके दोनों भाइयों ने पास रहते हुए भी कोई सहायता नहीं की| तातुश को जब यह बात पता चली तो उन्होंने अपने घर का एक कमरा लेखिका के लिए खाली करवा दिया| तातुश उसका और उसके बच्चों का बहुत ख्याल रखते थे| तातुश ने उसके बेटे का भी पता लगा लिया और उसे बेबी से मिलवाया| लेखिका तातुश को अपने पिता के समान मानती थी| तातुश ने लेखिका के द्वारा लिखे गए लेख अपने मित्रों को भी दिखाया| वे और उनके मित्र हमेशा लेखिका को लिखने के लिए प्रोत्साहित करते थे| तातुश के एक मित्र ने लेखिका से उसकी कहानी को एक मोड़ तक पहुँचाने के लिए चिट्ठी लिखी ताकि उसकी रचना को किसी पत्रिका में छापा जा सके| तातुश के एक मित्र जिसे लेखिका जेठू कहती थी, लेखन के लिए बहुत प्रोत्साहित करते थे| उन्होंने आशापूर्णा देवी का उदाहरण देकर लेखिका का हौसला बढ़ाया| लेखिका चिट्ठियों के माध्यम से तातुश के मित्रों के साथ संपर्क में रहने लगी| उसके लिखे रचनाओं को लोग पसंद करने लगे| तातुश के कारण लेखिका की जीवन दिशा ही बदल गई| आखिरकार वह दिन भी आया जब लेखिका की लिखी रचना पत्रिका में छप गई| पत्रिका में उनकी रचना का शीर्षक था आलो-आँधारि, बेबी हालदार| लेखिका अत्यंत प्रसन्न हुई और तातुश के प्रति उनका मन कृतज्ञता से भर गया| उसने तातुश के पैर छूकर आशीर्वाद प्राप्त किया|
अभ्यास के प्रश्न
आलो आँधारी ( बेबी हालदार )
प्रश्न 1 – पाठ के किन अंशों से समाज की यह सच्चाई उजागर होती है कि पुरुष के बिना स्त्री का कोई अस्तित्व नहीं है। क्या वर्तमान समय में स्त्रियों कि इस सामाजिक स्थिति में कोई परिवर्तन आया है? तर्क सहित उत्तर दीजिए।
उत्तर – हमारे समाज में ऐसा माना जाता है कि पुरुष के बिना, महिला का कोई अस्तित्व नहीं है। समाज की यह सच्चाई, पाठ के निम्नलिखित भागो से पता चलती है –
लेखिका को घर में बच्चों के साथ अकेला रहते देखकर, सभी लोग पूछते थे कि, क्या वह घर में अकेले रहती हैं?, उसके पति कहां रहते हैं?, वह उस घर में कितने समय से है?, उसके पति उसके साथ क्यों नहीं रहते हैं?, वह वहाँ क्या करती हैं?, क्या लेखिका अकेले रह पाएंगी?, ऐसी बातों को सुनकर, कोई भी आवाज उठाना नहीं चाहेगा। इसलिए वह बच्चों को साथ लेकर उसी वक्त काम खोजने निकल गई।
अगर किसी दिन लेखिका को काम से लौटने में देर हो जाती, तो हर कोई उसकी तरफ ऐसे देखता कि मानो वह कोई अपराध करके आ रही हो। यहां तक कि यदि लेखिका को बाजार में कोई भी वस्तु खरीदने जाना होता था तो मकान मालिक की महिला उसे ताने देती हुई कहती थी कि वह हर दिन कहां जाती है?, उसका तो पति है नहीं, वह तो अकेली है। उसे इतना घूमने की आवश्यकता क्यों है? लेखिका सोचती थी कि अगर उसका पति उसके साथ नहीं है, तो क्या वह अकेले घूम भी नहीं सकती? क्योंकि पति के साथ रहने के बावजूद भी उसे शांति तो नहीं मिली।
यदि किसी दिन काम से घर पहुंचने में देरी हो जाती तो मकान मालिक की महिला उसका कारण पूछने लगती। मकान मालकिन का बड़ा बेटा उसके द्वार पर आकर बैठ जाता है और इस तरह की बातें कहता है जिनका अर्थ था कि यदि वह चाहे तभी बेबी उस घर में रह सकती है।
जब लेखिका काम पर जाती थी, तो आसपास के लोग एक दूसरे से कहते थे कि, इस लड़की का पति यहां नहीं रहता, यह बच्चों के साथ अकेली रहती है।, दूसरे लोग उनकी बातें सुनकर लेखिका को बताना चाहते थे। वह लेखिका से बात करने की कोशिश करते थे। वह पानी पीने के बहाने से लेखिका के घर आ जाते थे।
जब लेखिका बच्चों के साथ कहीं बाहर जाती थी, तो लोग बहुत सी बातें करते थे। लेखिका को देखकर न जाने कितने लोग सिटी बजाते थे और ताना मारा करते थे।
लेखिका को कभी-कभी लगता था कि क्या यह सब इतना आसान है? घर में कोई आदमी नहीं है, तो क्या इसलिए लेखिका को सब से सब कुछ स्वीकार करना पड़ेगा?
जब झुग्गियों पर बुलडोजर चलाया गया तो सभी अपना सामान समेटकर दूसरे घरों में चले गए, पर वह अकेली बच्चों के साथ खुले आसमान के नीचे बैठी रही।
उपर्युक्त अंशों से स्पष्ट होता है कि पुरुष स्त्री पर ज्यादती करे तो भी पूरे समाज की ज्यादतियों से बचने के लिए पुरुष स्त्री का एक सुरक्षा कवच तो है ही।
वर्तमान समय में स्त्रियों की स्थिति में काफी बदलाव आया है। शिक्षा व् कानूनों के कारण स्त्रियों की आमदनी में बढ़ोतरी हुई है। अब वे अकेली रहकर भी जीवन यापन कर सकती हैं। वह अपने पैरों पर खड़ी है और कई तरह के काम करती है। महानगरों में तो कितनी अविवाहित महिला अकेले रह कर अपना जीवन खुशी से जीती है।
प्रश्न 2 – अपने परिवार से तातुश के घर तक के सफर में, बेबी के सामने, रिश्तो की कौन सी सच्चाई उजागर होती है?
उत्तर – बेबी के अपने परिवार में माता-पिता, भाई-भाभी, बहन आदि सभी थे, पर नाम के ही थे। बिना सोचे-समझे, एक तेरह वर्ष की लड़की को अधेड़ पुरुष के साथ बाँध दिया गया। पति से अपना रिश्ता टूटने के बाद, अपनों से लेकर तातुश के घर तक, बेबी ने रिश्ते की सच्चाई जानी। उसने जाना की रिश्ते दिल से जुड़े होते हैं, अन्यथा रिश्तो में दरार पड़ जाती है। पति के चले जाने के बाद, वह अकेली और असहाय हो गई थी। वह बच्चों के साथ किराए के घर में अकेले रहने लगी थी। हालांकि, भाई और रिश्तेदार उसके घर के पास ही रहते थे, परंतु फिर भी कोई उसकी मदद नहीं करता था। कोई उससे मिलने भी नहीं आया। यहां तक कि उसे अपनी मां की मृत्यु की खबर 6 महीने के बाद अपने पिता से मिली। बाहरी लोगों ने ही उसकी ज्यादातर सहायता की। सुनील नामक एक युवक ने उसे तातुश के घर में काम दिलवाया। तातुश ने उसे अपनी बेटी की तरह माना और उसकी बहुत सहायता की। उन्हीं के प्रोत्साहन के कारण, वह एक लेखिका बन गई। वास्तव में, उन्होंने जैसा व्यवहार किया ऐसे बहुत कम उदाहरण हैं। ये बताते हैं करुणा, दया और स्नेह के संबंध खून के रिश्तों से कहीं बढ़कर होते हैं।
प्रश्न 3 – इस पाठ से घरों में काम करने वालों के जीवन की जटिलताओं के बारे में पता चलता है। घरेलू नौकरों को, और किन किन समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इस पर विचार कीजिए।
उत्तर – इस पाठ से हमें घर में काम करने वाले नौकरों के जीवन की जटिलताओं का पता चलता है। कुछ परेशानियाँ, जिसका उन्हें सामना करना पड़ता है, निम्नलिखित है:-
घरेलू नौकरी में वित्तीय सुरक्षा नहीं मिलती है। उन्हें नौकरी पर से कभी भी निकाला जा सकता है।
उन्हें गंदे एवं सस्ते घरों में रहना पड़ता है क्योंकि वह ज्यादा किराया देकर अच्छा मकान लेने में सक्षम नहीं होते हैं।
मालिक के घरों में इनका शारीरिक शोषण भी होता है। ज्यादातर, लड़कियाँ शारीरिक शोषण का शिकार होती हैं।
दूसरों के घर में काम करने वाली औरतों के प्रति दूसरे लोगों का व्यवहार आपत्तिजनक होता है।
किसी पर्व-त्योहार में, उनका काम दोगुना हो जाता है। मालिक अपने नौकरों को घर की साफ सफाई में लगा देते हैं। घर के मालिक नौकरों के पर्व के बारे में नहीं सोचते।
दूसरों के घर में काम करने वाली औरतों के बच्चों को पर्याप्त भोजन एवं शिक्षा नहीं मिल पाती। यहां तक कि बच्चों को भी कम उम्र से ही काम करना पड़ता है।
इनके काम के घंटे भी अधिक होते हैं।
चिकित्सा सुविधा व खाने के अभाव में ये अशिक्षित रहते हैं।
प्रश्न 4 – आलो-अंधारी रचना, बेबी के व्यक्तिगत समस्याओं के साथ-साथ कई सामाजिक मुद्दों को समेटे हुए हैं। किन्हीं दो समस्याओं पर अपने विचार प्रकट कीजिए।
उत्तर – ‘आलो- आंधारि’, लेखिका की आत्मकथा है। लेखिका की आत्मकथा होने के साथ लेखिका हमें एक अनोखी दुनिया के दर्शन करवाती है। इस पाठ में हमें एक ऐसी दुनिया देखने को मिलती है, जो हमारे पड़ोस में ही है परंतु उसमें ताक झाक करना असंवेदनशील माना जाता है। इस पाठ के दो प्रमुख समस्याएं निहित है :
(क) परित्यक्त महिला की समाज में स्थिति – यह पुस्तक एक परित्यक्ता स्त्री की कहानी कहती है और इस रचना में वह परित्यक्त महिला बेबी है। वह एक किराए के घर में रहती है और अपना और अपने बच्चों का पालन पोषण करने के लिए दूसरों के घर में घरेलू नौकरानी का काम करती है। उसके प्रति अन्य लोगों का व्यवहार बहुत ही खराब प्रतीत होता है। स्वयं औरतें ही उस पर ताना मारती हैं। हर व्यक्ति उस पर अपना अधिकार समझता है तथा उसका शोषण करना चाहता है। उसे सदा संदेह की दृष्टि से देखा जाता है। एक अकेली औरत को हर कोई असहाय समझता है। इस पाठ में भी, बेबी का मानसिक और आर्थिक रुप से शोषण किया गया है। बेबी के सहायता के लिए कोई भी आगे नहीं आता। सहायता के नाम पर उसका मजाक उड़ाया जाता है।
(ख) स्वच्छता का अभाव और गंदी बस्तियां – इस पाठ में, मलिन बस्तियों और उसके आसपास के गंदे क्षेत्रों की खुलकर चर्चा की गई है। यह बस्तियां, नीचे तबके में रहने वाले लोगों के लिए है। इन बस्तियों में गरीब लोग रहते हैं और यहां शौचालय की भी सुविधा नहीं है। महिलाओं को इस मामले में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे गंदे इलाके में बसी हुई इन बस्तियों में कई बीमारियों का भी खतरा होता है। सरकारें भी इन सब चीजों के प्रति अपनी आंखें बंद कर कर रखती है।
प्रश्न 5 – “तुम दूसरी आशापूर्णा देवी बन सकती हो।” जेठू का यह कथन, रचना संसार के किस सत्य को उद्घाटित करता है?
उत्तर – रचना संसार और इसमें रहने वाले लोगों की अपनी एक अलग ही जीवन-शैली है। ये लोग लेखन कार्य के लिए सारी सारी रात जाग सकते हैं, या यूँ कहें कि जागते हैं। ‘तुम दूसरी आशापूर्णा देवी बन सकती हो’ जेठू के इस कथन से, यह समझा जा सकता है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी मुश्किल क्यों ना हो, मनुष्य की इच्छा शक्ति यदि प्रबल हो तो वह अपनी इच्छाशक्ति से कोई भी लक्ष्य प्राप्त कर सकता है।
आशापूर्णा देवी एक सामान्य गृहिणी थी जो पूरे दिन घर के कामों में व्यस्त रहा करती थी। उन्हें लिखने का बहुत शौक था। जब पूरा परिवार सोता था, तब वह लिखा करती थी। वह स्वयं लिख लिख कर एक बहुत ही प्रसिद्ध कथाकार बन गई। हां, यह बात सत्य है कि उनकी अपेक्षा बेबी की स्थिति बहुत खराब है। बेबी वित्तीय संकट से जूझ रही है। लेकिन, यदि वह हमेशा लिखते रहेगी तो अपने लेखन शैली को और बेहतर बना सकती है। यदि बेबी खुद को व्यस्त जीवन से निकाल पाए तो वह अपने आप एक प्रसिद्ध लेखिका बन सकती है। यह सच है रचना संसार में लेखन का एक नशा होता है, जैसा मुंशी प्रेमचंद को भी था, जो कई मील पैदल चलकर आते, खाने-पीने का ठिकाना न था, फिर भी डिबरी की रोशनी में कई-कई घंटे बैठकर लेखन कार्य करते थे। ऐसी ही बेबी हालदार ने भी किया। जब सारी झुग्गी बस्ती सो जाती तो वह लेखन कार्य करती रहती थी।
प्रश्न 6 – बेबी की जिंदगी में, तातुश का परिवार ना आया होता तो उसका जीवन कैसा होता? कल्पना करके लिखिए।
उत्तर – बेबी के जीवन मे बहुत परेशानियां थी। पति के जाने के पश्चात उस पर मानव दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। बेबी ने बहुत परेशानियां झेली। उसके साथ-साथ उसके बच्चे भी थे। सभी बहुत बुरी स्थिति में थे। बेबी के जीवन में तातुश एक सौभाग्य की भाँति हैं। तातुश जैसे लोग सबको नहीं मिलते। जब से बेबी तातुश के परिवार से मिली, उसे भोजन, आवास आदि समस्याओं से मुक्ति मिल गई। उसके बच्चों का पालन पोषण भी अच्छे तरीके से होने लगा। यदि तातुश का परिवार उसके जीवन में ना आया होता, तो उसका जीवन नरक के समान हो जाता। उसके बच्चों को भी अच्छी शिक्षा नहीं मिल पाती। उसके बच्चों को भी छोटी उम्र में ही कहीं काम करना पड़ता। बेबी का समाज में रहना बहुत मुश्किल हो जाता। उसे लोगों के द्वारा आपत्तिजनक बातें सुनने को मिलती। उसका बड़ा बेटा शायद ही उसे मिल पाता। उसके पिता भी उसे याद नहीं करते और इसी तरह उसे अपनी मां के मृत्यु की खबर भी नहीं मिलती। उसका और उसके बच्चों का जीवन चुनौतीपूर्ण एवं धूमिल हो जाता। यदि तातुश बेबी के जीवन में न आते तो बेबी स्वयं कभी अपनी क्षमता को पहचान न पाती। वह भी घृणास्पद अज्ञात कुचक्र के-से जीवन में कहीं खोकर रह जाती। हमें उसकी आत्मकथा पढ़ने का अवसर न मिल पाता।
अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्न
प्रश्न 1– बेबी हालदार के चरित्र की विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
उत्तर – ‘आलो आँधारि’ बेबी की आत्मकथा है। बेबी हालदार के चरित्र की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं :
(क) साहसी – बेबी को एक साहसी महिला के रूप में प्रस्तुत किया गया है। वह अपने पति से अलग होकर अपने बच्चों के साथ किराए के मकान में रहती है और लोगों के घर में काम-काज करके अपना तथा अपने बच्चों का पालन-पोषण करती है। एक जगह काम छूट जाने पर भी घबराती नहीं है बल्कि दूसरा काम ढूंढना शुरू कर देती है। तातुश के घर में काम करते हुए जब उसका घर तोड़ दिया जाता है तो वह सारी रात खुले में अपने बच्चों और सामान के साथ प्रत्येक स्थिति का साहसपूर्वक सामना करती है।
(ख) परिश्रमी – बेबी बहुत ही परिश्रमी महिला है। तातुश के घर का सारा काम-काज वह थोड़े-से समय में ही निपटा देती थी। तातुश उससे पूछते हैं कि वह इतना ढेर सारा काम इतने कम समय में और इतनी अच्छी तरह कैसे कर लेती है तो बेबी कहती है कि उसे बचपन से ही घर के काम-काज करने का अभ्यास है, इसलिए उसे यह कार्य करते हुए कोई असुविधा नहीं होती है। बेबी सुबह-सवेरे ही तातुश के घर काम करने आ जाती थी। उसे लगातार काम करते देख कर तातुश उसकी सहायता करने के लिए कभी बर्तन पोंछने लगते थे तो कभी झाड़ लेकर जाले निकालने लगते थे। बेबी उन्हें यह सब करने से रोकती थी और कहती थी कि उन्हें यह सब नहीं करना चाहिए, वह कर देगी।
(ग) अध्ययनशीला – बेबी को इस बात का दुःख है कि वह बचपन में पढ़-लिख नहीं सकी थी। तातुश के घर अलमारियाँ साफ़ करते हुए उनमें रखी हुई पुस्तकों को खोलकर देखती थी और सोचती थी कि इन्हें कौन पढ़ता होगा। वह स्वयं छठी कक्षा तक पढ़ी थी। तातुश के पूछने पर उसने रवींद्रनाथ ठाकुर, काजी नज़रूल इस्लाम, शरतचंद्र आदि के नाम भी गिना दिए थे। तब तातुश ने उसे तसलीमा नसरिन की ‘आमार मेये बेला’ पुस्तक पढ़ने के लिए दी और बाद में कॉपी और पेन भी दिया कि इसमें वह अपने बारे में कुछ-कुछ लिखती रहा करे। इस प्रकार तातुश की प्रेरणा से वह पढ़ने लगी और उसने अपनी आत्मकथा लिखना भी शुरू कर दिया।
(घ) ममतामयी – बेबी को अपने बच्चों के भविष्य की बहुत चिंता रहती है। वह उन्हें पढ़ा-लिखाकर सभ्य नागरिक बनाना चाहती है। तातुश की सहायता से वह दो बच्चों को स्कूल में प्रवेश दिला देती है। उसका बड़ा लड़का कहीं नौकरी करता था। उसका उसे पता नहीं चलता तो वह व्याकुल हो उठती है। तातुश उसे उसके बड़े लड़के से मिलवाते हैं और बाद में किसी अच्छे घर में उसे काम भी दिलवा देते हैं। वह पूजा के अवसर पर अपने बड़े लड़के को भी तातुश के घर ले आती है। बच्चों के सुखद भविष्य के लिए वह कठोर परिश्रम करती है।
इस प्रकार स्पष्ट है कि बेबी एक परिश्रमी, साहसी, ममतामयी स्वाभिमानिनी एवं अध्ययनशीला महिला थी।
प्रश्न 2 – ‘आलो-आँधारि’ पाठ का उद्देश्य / मूल भाव या संदेश स्पष्ट कीजिए।
उत्तर – ‘आलो-आँधारि’ पाठ के माध्यम से लेखिका ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी को थोड़ा-सा सहारा और उचित मार्गदर्शन मिल जाता है तो वह विपरीत परिस्थितियों में भी अपना और अपने परिवार का भविष्य उज्ज्वल बना लेता है। इस पाठ की नायिका बेबी एक घरेलू नौकरानी है। वह पति से अलग रहती है। उसके बच्चे उसके साथ है। इनका पालन-पोषण करने के लिए वह लोगों के घर में काम करती है। जहाँ वह काम करती थी वहाँ से काम छूट जाने पर उसे सुनील की सहायता से तातुश के घर काम मिल जाता है। तातुश उसकी बहुत सहायता करते हैं। उसे बच्चों के साथ रहने के लिए अपनी छत पर कमरा दे देते हैं। उसके बच्चों को स्कूल में प्रवेश दिला देते हैं। उसे लिखने-पढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं। तातुश के घर रहते हुए उसके बच्चों का भविष्य संवर जाता है और वह एक लेखिका बन जाती है। उसकी रचना बंगाली पत्रिका में प्रकाशित हो जाती है। इस प्रकार एक भले आदमी का सहारा और प्रेरणा उसके जीवन की दिशा ही बदल देते हैं।
यह भी देखें :
▪️हिंदी ( कक्षा 11) — आरोह व वितान ( पूरा सिलेबस एक साथ )
आरोह भाग 1 ( गद्य खंड )
▪️नमक का दारोगा ( हिंदी कहानी) : प्रेमचंद / Namak Ka Daroga : Premchand
▪️मियाँ नसिरुद्दीन ( रेखाचित्र ) : कृष्णा सोबती
▪️अपु के साथ ढाई साल ( संस्मरण ): सत्यजित राय
▪️विदाई संभाषण ( निबंध ) : बालमुकुंद गुप्त
▪️गलता लोहा ( शेखर जोशी )/ Galta Loha ( Shekhar Joshi )
▪️स्पीति में बारिश ( कृष्णनाथ ) / Sptiti Mein Barish ( Krishan Nath )
▪️रजनी ( मन्नू भंडारी )/ Rajani ( Mannu Bhandari )
▪️जामुन का पेड़ ( कृश्न चंदर ) / Jamun Ka Ped ( Krishan Chandar )
▪️भारत माता ( जवाहरलाल नेहरू ) / Bharat Mata ( Jawaharlal Nahru )
▪️आत्मा का ताप ( सैयद हैदर रज़ा ) / Aatma Ka Taap ( Saiyad Haidar Raza )
आरोह भाग 1 ( काव्य खंड )
▪️हम तौ एक एक करि जांनां कबीर ( Kabir Ke Pad Class 11)
▪️मेरे तो गिरधर गोपाल, दूसरो न कोई / मीरा( मीराबाई)
▪️वे आँखें ( सुमित्रानंदन पंत )
▪️घर की याद : भवानी प्रसाद मिश्र ( Ghar Ki Yad : Bhawani Prasad Mishra )
▪️चंपा काले काले अच्छर नहीं चीन्हती : त्रिलोचन
▪️साये में धूप ( दुष्यंत कुमार )
▪️साये में धूप ( दुष्यंत कुमार )
▪️अक्क महादेवी ( Akka Mahadevi )
▪️सबसे खतरनाक : पाश ( Sabse Khatarnak : Pash )
▪️आओ मिलकर बचाएँ : निर्मला पुतुल ( Aao, Milkar Bachayen : Nirmala Putul )
वितान भाग 1 ( कक्षा 11)
▪️भारतीय गायिकाओं में बेजोड़ : लता मंगेशकर ( कुमार गन्धर्व )
▪️राजस्थान की रजत बूंदें ( अनुपम मिश्र ) / Rajasthan Ki Rajat Boonden ( Anupam Mishra )
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