भारत माता ( जवाहरलाल नेहरू ) / Bharat Mata ( Jawaharlal Nahru )

कक्षा 11 की हिंदी की पाठ्य-पुस्तक 'आरोह भाग 1' में संकलित ''भारत माता" ( जवाहरलाल नेहरू) का मूल पाठ अभ्यास के प्रश्नों सहित |

अकसर जब मैं एक जलसे से दूसरे जलसे में जाता होता, और इस तरह चक्कर काटता रहता होता था, तो इन जलसों में मैं अपने सुनने वालों से अपने इस हिंदुस्तान या भारत की चर्चा करता। भारत एक संस्कृत शब्द है और इस जाति के परंपरागत संस्थापक के नाम से निकला हुआ है। मैं शहरों में ऐसा बहुत कम करता, क्योंकि वहाँ के सुनने वाले कुछ ज़्यादा सयाने थे और उन्हें दूसरे ही किस्म की गिजा की जरूरत थी। लेकिन किसानों से, जिनका नज़रिया महदूद था, मैं इस बड़े देश की चर्चा करता, जिसकी आजादी के लिए हम लोग कोशिश कर रहे थे और बताता कि किस तरह देश का एक हिस्सा दूसरे से जुदा होते हुए भी हिंदुस्तान एक था। मैं उन मसलों का जिक्र करता, जो उत्तर से लेकर दक्खिन तक और पूरब से लेकर पच्छिम तक, किसानों के लिए यक-साँ थे, और स्वराज्य का भी जिक्र करता, जो थोड़े लोगों के लिए नहीं, बल्कि सभी के फ़ायदे के लिए हो सकता था।

मैं उत्तर-पच्छिम में खैबर के दरें से लेकर धुर दक्खिन में कन्याकुमारी तक की अपनी यात्रा का हाल बताता और यह कहता कि सभी जगह किसान मुझसे एक से सवाल करते, क्योंकि उनकी तकलीफें एक-सी थीं यानी गरीबों, कर्जदारों, पूँजीपतियों के शिकंजे, जमींदार, महाजन, कड़े लगान और सूद, पुलिस के जुल्म, और ये सभी बातें गुँथी हुई थीं, उस ढड्डे के साथ, जिसे एक विदेशी सरकार ने हम पर लाद रखा था और इनसे छुटकारा भी सभी को हासिल करना था। मैंने इस बात की कोशिश की कि लोग पारे हिंदुस्तान के बारे में सोचें और कुछ हद तक इस बड़ी दुनिया के बारे में भी, जिसके रूप एक जुज हैं। मैं अपनी बातचीत में चीन, स्पेन, अबीसिनिया, मध्य यूरोप, मिस्त्र और पच्छिमी एशिया में होनेवाले कशमकशों का जिक्र भी ले आता। मैं उन्हें सोवियत यूनियन में होने वाली अचरज-भरी तब्दीलियों का हाल बताता और कहता कि अमरीका ने कैसी तरक्की की है। यह काम आर न था, लेकिन जैसा मैंने समझ रखा था, वैसा मुश्किल भी न था। इसकी वजह यह थी कि हमारे पुराने महाकाव्यों ने और पुराणों की कथा कहानियों ने, जिन्हें वे खूब जानते थे, उन्हें इस देश की कल्पना करा दी थी, और हमेशा कुछ लोग ऐसे मिल जाते थे, जिन्होंने हमारे बड़े-बड़े तीर्थों की यात्रा कर रखी थी, जो हिंदुस्तान के चारों कोनों पर हैं। या हमें पुराने सिपाही मिल जाते, जिन्होंने पिछली बड़ी जंग में या और धावों के सिलसिले में विदेशों में नौकरियाँ की थीं। सन् तीस के बाद जो आर्थिक मंदी पैदा हुई थी, उसकी वजह से दूसरे मुल्कों के बारे में मेरे हवाले उनकी समझ में आ जाते थे।

कभी ऐसा भी होता कि जब मैं किसी जलसे में पहुँचता, तो मेरा स्वागत “भारत माता की जय!” इस नारे से ज़ोर के साथ किया जाता। मैं लोगों से अचानक पूछ बैठता कि इस नारे से उनका क्या मतलब है? यह भारत माता कौन है, जिसकी वे जय चाहते हैं। मेरे सवाल से उन्हें कुतूहल और ताज्जुब होता और कुछ जवाब न बन पड़ने पर वे एक-दूसरे की तरफ़ या मेरी तरफ़ देखने लग जाते। मैं सवाल करता ही रहता। आखिर एक हट्टे-कट्टे जाट ने, जो अनगिनत पीढ़ियों से किसानी करता आया था, जवाब दिया कि भारत माता से उनका मतलब धरती से है। कौन-सी धरती ? खास उनके गाँव की धरती या जिले की या सूबे की या सारे हिंदुस्तान की धरती से उनका मतलब है? इस तरह सवाल-जवाब चलते रहते, यहाँ तक कि वे ऊबकर मुझसे कहने लगते कि मैं ही बताऊँ। मैं इसकी कोशिश करता और बताता कि हिंदुस्तान वह सब कुछ है, जिसे उन्होंने समझ रखा है, लेकिन वह इससे भी बहुत ज्यादा है। हिंदुस्तान के नदी और पहाड़, जंगल और खेत, जो हमें अन्न देते हैं, ये सभी हमें अजीज़ हैं। लेकिन आखिरकार जिनकी गिनती है, वे हैं हिंदुस्तान के लोग, उनके और मेरे जैसे लोग, जो इस सारे देश में फैले हुए हैं। भारत माता दरअसल यही करोड़ों लोग हैं, और “भारत माता की जय!” से मतलब हुआ इन लोगों की जय का। मैं उनसे कहता कि तुम इस भारत माता के अंश हो, एक तरह से तुम ही भारत माता हो, और जैसे-जैसे ये विचार उनके मन में बैठते, उनकी आँखों में चमक आ जाती, इस तरह, मानो उन्होंने कोई बड़ी खोज कर ली हो।

अभ्यास के प्रश्न ( भारत माता )

प्रश्न 1 – भारत की चर्चा नेहरू जी कब और किससे करते थे?

उत्तर – नेहरू जी कांग्रेस के सक्रिय कार्यकर्ता थे। वे देश के विभिन्न जगहों में होने वाले जलसों में जाया करते थे। वे किसानों की सभा में ‘भारत’ की चर्चा अवश्य करते थे। उन्हें लगता था कि किसानों को संपूर्ण भारत के बारे में जानकारी कम है तथा उनका दृष्टिकोण सीमित है। वे उन्हें बताते थे कि हिंदुस्तान का नाम भारत इस देश के संस्थापक के नाम से निकला हुआ है। भारत शब्द संस्कृत भाषा का है। इस देश का एक हिस्सा दूसरे से अलग होते हुए भी देश एक है। यह ही भारत है तथा इसे अंग्रेजों से मुक्त कराने के लिए आंदोलन की प्रेरणा देते थे।

प्रश्न 2 – नेहरू जी भारत के सभी किसानों से कौन-सा प्रश्न बार-बार करते थे?

उत्तर – नेहरू जी भारत के सभी किसानों से निम्नलिखित प्रश्न बार-बार करते थे –
भारत माता की जय से वे क्या समझते हैं? यह भारत माता कौन है? धरती का अर्थ कहां की धरती से है? वह धरती कौन-सी है जिसे वे भारत माता कहते हैं – गाँव की, जिले की, सूबे की या पूरे हिंदुस्तान की। इन प्रश्नों को सुनकर ग्रामीण कुतूहल व ताज्जुब से भर जाते थे।

प्रश्न 3 – दुनिया के बारे में किसानों को बताना नेहरू जी के लिए क्यों आसान था?

उत्तर – नेहरू जी अपने भाषणों में किसानों को दुनिया के बारे में बताते हैं। दुनिया के बारे में उन्हें जानकारी देना आसान था, ऐसा मानने के कई कारण थे –
पुराने महाकाव्यों व पुराणों की कथा-कहानियों से किसान पहले से परिचित थे।
कुछ लोगों ने हमारे देश के चारों कोनों में स्थित बड़े -बड़े तीर्थों की यात्रायें की थी यानी पूरे देश का भ्रमण किया था। कुछ सिपाहियों ने प्रथम विश्वयुद्ध में भाग लिया था।
कुछ लोग विदेशों में नौकरियाँ करते थे। 1930 की आर्थिक मंदी के कारण दूसरे मुल्कों के बारे में जानकारी थी।

प्रश्न 4 – किसान सामान्यतः भारत माता का क्या अर्थ लेते थे?

उत्तर – किसान सामान्यतः भारत माता का अर्थ अपने देश की धरती से लेते थे। नेहरू जी ने उन्हें समझाया कि उनके गाँव, जिले, नदियाँ, पहाड़, जंगल, खेत, करोड़ों भारतीय सभी भारत माता हैं।

प्रश्न 5 – भारत माता के प्रति नेहरू जी की क्या अवधारणा थी?

उत्तर – भारत माता के प्रति नेहरू जी की अवधारणा यह थी कि यहाँ की धरती, पहाड़, जंगल, नदी, खेत आदि के साथ-साथ यहाँ के करोड़ों निवासी भी भारत माता हैं। भारत जितना भी हमारी समझ था उससे भी परे जितना है उससे कहीं अधिक व्यापक है। ‘भारत माता की जय’ से मतलब यहाँ के लोगों की जय से है।

प्रश्न 6 – आजादी से पूर्व किसानों को किन समस्याओं का सामना करना पड़ता था?

उत्तर – आजादी से पूर्व किसान अनेक समस्याओं से जूझ रहे थे। अधिकतर किसान गरीबी , कर्जदारी , पूजीपतियों के शिकंजे में फंसे थे। जमींदार और महाजन उनसे ज्यादा सूद (ब्याज) वसूलते थे। अंग्रेज सरकार उनसे अत्यधिक लगान लेती थी और ऊपर से पुलिस भी उनपर खूब जुल्म करती थी और यह सब एक विदेशी सरकार यानि अंग्रेज सरकार के कारण हो रहा था। गरीबी , कर्जदारी , शोषण , अन्याय , अंग्रेज सरकार के मनमाने टैक्स , पुलिस प्रशाशन का गैरजिम्मेदाराना रवैया आदि किसानों की मुख्य समस्याएं थी।

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