भारतेन्दु हरिश्चंद्र कृत ‘अंधेर नगरी’ नाटक की समीक्षा

भारतेन्दु हरिश्चंद्र द्वारा रचित नाटक ‘अंधेर नगरी’ एक प्रहसन है जो एक काल्पनिक कहानी के माध्यम से दूषित प्रशासनिक व्यवस्था और पतन की ओर अग्रसर प्रजा पर व्यंग्य करता है | किसी नाटक की समीक्षा करने के लिये विद्वानों ने साथ तत्त्व बताये हैं — कथानक या कथावस्तु, पात्र व चरित्र-चित्रण, संवाद या कथोपकथन, देशकाल … Read more

हिंदी की प्रासंगिकता या महत्त्व

हिंदी हमारे देश की सबसे ज़्यादा बोली जाने वाली भाषा है। यह भाषा हमारे दिलों को जोड़ती है और हमारी पहचान बनाती है। हिंदी में बोलना, लिखना और पढ़ना हमें अपनी संस्कृति और जड़ों से जोड़ता है। (1) अपनी भाषा, अपनी पहचान हिंदी हमारी मातृभाषा है। जब हम हिंदी में बात करते हैं, तो हमें … Read more

शिक्षा में नेतृत्व का महत्त्व या भूमिका

प्रत्येक संगठन या संस्था में नेतृत्व का महत्व है | नेतृत्व ही उस संगठन या संस्था को दिशा प्रदान करता है | शिक्षा के क्षेत्र में नेतृत्व की भूमिका या महत्व निम्नलिखित बिंदुओं से स्पष्ट है : (1) दृष्टिकोण व मिशन की स्थापना एक सशक्त शैक्षणिक नेतृत्व संस्था के उद्देश्य और दिशा को स्पष्ट करता … Read more

विलियम वर्ड्सवर्थ का काव्य भाषा सिद्धांत ( For B. A.)

विलियम वर्ड्सवर्थ का काव्य भाषा सिद्धांत, जो उन्होंने अपनी पुस्तक “Lyrical Ballads” (1798) की प्रस्तावना में व्यक्त किया, काव्य रचना के लिए एक क्रांतिकारी दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है। यह सिद्धांत रोमांटिक काव्य की आधारशिला माना जाता है। 1. सरल एवं सहज भाषा वर्ड्सवर्थ के अनुसार काव्य की भाषा साधारण जन की बोलचाल की भाषा होनी … Read more

पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986

पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 भारत सरकार द्वारा पारित एक समग्र कानून है जिसका उद्देश्य पर्यावरण की रक्षा और सुधार करना है। इसे 1984 की भोपाल गैस त्रासदी के बाद पर्यावरणीय आपात स्थितियों से निपटने और प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए लागू किया गया था। यह अधिनियम केंद्र सरकार को पर्यावरणीय नियम बनाने, निगरानी करने, … Read more

मध्यकालीन हिंदी कविता ( बी ए 2nd सेमेस्टर ) Hindi NEP KUK

व्याख्या भाग कबीर व्याख्या ( Kabir Vyakhya ) सूरदास व्याख्या ( Surdas Vyakhya ) तुलसीदास व्याख्या ( Tulsidas Vyakhya ) मीराबाई व्याख्या ( Mirabai Vyakhya ) जीवन परिचय कबीरदास का साहित्यिक परिचय ( Kabirdas Ka Sahityik Parichay ) सूरदास का साहित्यिक परिचय ( Surdas Ka Sahityik Parichay ) तुलसीदास का साहित्यिक परिचय ( Tulsidas Ka … Read more

सुमित्रानंदन पंत का साहित्यिक परिचय

जीवन परिचय सुमित्रानंदन पंत (20 मई 1900 – 28 दिसंबर 1977) हिंदी साहित्य के प्रमुख कवियों में से एक थे | पंत जी छायावादी युग के चार स्तंभों में गिने जाते हैं। उनका जन्म अल्मोड़ा, उत्तराखंड के कौसानी गाँव में हुआ था। बचपन में ही माता के निधन के बाद उनका लालन-पालन दादी ने किया। … Read more

Public Speaking In Hindi Language And Leadership ( SEC )

भाषण का अर्थ, प्रकार व अच्छे भाषण की विशेषताएँ या गुण भाषण : उद्देश्य, तत्त्व व प्रकार भाषण की उपयोगिता या महत्त्व भाषण कला का विकास कैसे करें भाषण के विषय चयन की सावधानियाँ सफल वक्ता के गुण नेतृत्व का अर्थ व नेता के गुण विद्यार्थियों के लिये नेतृत्व का महत्त्व शिक्षा में नेतृत्व का … Read more

विद्यार्थियों के लिये नेतृत्व का महत्त्व

विद्यार्थियों के लिए नेतृत्व का महत्व निम्नलिखित बिंदुओं में स्पष्ट किया जा सकता है : (1) आत्मविश्वास का विकास: नेतृत्व विद्यार्थियों में आत्मविश्वास को बढ़ाता है। नेतृत्व की भूमिका निभाने से वे अपनी क्षमताओं पर भरोसा करना सीखते हैं। यह आत्मविश्वास उन्हें चुनौतियों का सामना करने और निर्णय लेने में सक्षम बनाता है। (2) टीमवर्क … Read more

अंधेर नगरी ( भारतेन्दु हरिश्चन्द्र ) नाटक में वर्णित समस्याएँ या उद्देश्य

“अंधेर नगरी” नाटक में भारतेन्दु हरिश्चन्द्र ने तत्कालीन समाज और शासन व्यवस्था की विभिन्न समस्याओं को व्यंग्यात्मक और प्रतीकात्मक ढंग से प्रस्तुत किया है। नाटक के माध्यम से निम्नलिखित समस्याओं को उजागर किया गया है : (1) भ्रष्ट शासन व्यवस्था “अंधेर नगरी” नाटक में राजा की शासन प्रणाली पूरी तरह से भ्रष्ट और अव्यवस्थित दिखाई … Read more

कुंवर नारायण का साहित्यिक परिचय

जीवन परिचय — कुंवर नारायण का जन्म 19 सितंबर,1927 को उत्तर प्रदेश के फैजाबाद (अयोध्या) में एक संपन्न परिवार में हुआ। उनके परिवार का माहौल साहित्यिक और बौद्धिक था, जहां आचार्य नरेंद्र देव, आचार्य कृपलानी और राम मनोहर लोहिया जैसे व्यक्तियों का प्रभाव रहा। इस माहौल ने उनकी स्वतंत्र चिंतन और गंभीर अध्ययन की प्रवृत्ति … Read more

मरुस्थलीय पारिस्थितिक तंत्र : प्रकार व उदाहरण

मरुस्थलीय पारिस्थितिक तंत्र (Desert Ecosystem) वे पारिस्थितिक तंत्र होते हैं जहाँ वर्षा अत्यंत कम होती है और वातावरण शुष्क रहता है। यहाँ तापमान अत्यधिक गर्म या बहुत ठंडा हो सकता है, और जीव-जंतु तथा वनस्पतियाँ इस कठोर वातावरण के अनुकूल विकसित होती हैं। इन्हें रेगिस्तान का पारिस्थितिक तंत्र भी कहते हैं | इन तंत्रों में … Read more

चरागाह का पारिस्थितिक तंत्र: अर्थ, प्रकार व उदाहरण

चरागाह पारिस्थितिक तंत्र (Grassland Ecosystem) वे प्राकृतिक तंत्र हैं जहाँ प्रमुख रूप से घास और घास जैसी वनस्पतियाँ पाई जाती हैं। ये क्षेत्र पेड़ों की अपेक्षा अधिक खुले और समतल होते हैं और जानवरों के लिए चारे का प्रमुख स्रोत होते हैं। इन तंत्रों में ऊर्जा का प्रवाह मुख्यतः पौधों से शाकाहारी जानवरों और फिर … Read more

जलीय पारिस्थितिक तंत्र : प्रकार व उदाहरण

जलीय पारिस्थितिक तंत्र वे प्राकृतिक तंत्र होते हैं जो जल में विकसित होते हैं। इसमें जल के भीतर और जल की सतह पर पाए जाने वाले सभी जीव-जंतु और वनस्पतियाँ शामिल होती हैं। यह तंत्र जैविक (जैसे मछलियाँ, पौधे) और अजैविक (जैसे पानी, धूप, पोषक तत्व) घटकों से मिलकर बनता है। इन तंत्रों में ऊर्जा … Read more

रघुवीर सहाय का साहित्यिक परिचय

जीवन परिचय रघुवीर सहाय का जन्म 9 दिसंबर 1929 को लखनऊ, उत्तर प्रदेश में एक मध्यवर्गीय परिवार में हुआ। उनके पिता हरदेव सहाय साहित्य के अध्यापक थे जिससे उन्हें साहित्यिक माहौल प्राप्त हुआ। उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से अंग्रेजी साहित्य में एम.ए. किया और 1946 से लेखन शुरू किया। सहाय पत्रकारिता में भी सक्रिय रहे, ‘नवजीवन’, … Read more

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