मेरी किस्मत में यही अच्छा रहा (चंद्रकांत देवताले )

मैं मरने से नहीं डरता हूँन बेवजह मरने की चाहत सँजोए रखता हूँ एक जासूस अपनी तहक़ीक़ात बख़ूबी करेयही उसकी नियामत है किराए की दुनिया और उधार के समय कीकैंची से आज़ाद हूँ पूरी तरह मुग्ध नहीं करना चाहता किसी कोमेरे आड़े नहीं आ सकती सस्ती और सतही मुस्कुराहटें मैं वेश्याओं की इज़्ज़त कर सकता … Read more

शब्दों की पवित्रता के बारे में ( चंद्रकांत देवताले )

रोटी सेंकती पत्नी से हँसकर कहा मैंनेअगला फुलका बिल्कुल चंद्रमा की तरह बेदाग़ हो तो जानूँउसने याद दिलाया बेदाग़ नहीं होता कभी चंद्रमा तो शब्दों की पवित्रता के बारे में सोचने लगा मैंक्या शब्द रह सकते हैं प्रसन्न या उदास केवल अपने सेवह बोली चकोटी पर पड़ी कच्ची रोटी को दिखातेयह है चंद्रमा जैसी दे … Read more

अब तो पथ यही है ( दुष्यंत कुमार )

दुष्यंत कुमार की कविता ‘अब तो पथ यही है’ निराशा और मजबूरी की भावना को दर्शाती है, जहाँ व्यक्ति जीवन की सच्चाइयों को स्वीकार कर लेता है। इस कविता में कहा गया है कि ज्वार का आवेग अब धीमा हो चला है और आकाश से भी कोई उम्मीद नहीं बची है। जब जीवन की परिस्थितियों … Read more

साये में धूप ( दुष्यंत कुमार )

“साए में धूप” दुष्यंत कुमार की एक प्रसिद्ध ग़ज़ल है, जो उनके संग्रह “साए में धूप” (1975) का हिस्सा है। यह ग़ज़ल हिंदी साहित्य में अपनी गहन संवेदनशीलता और सामाजिक चेतना के लिए जानी जाती है। इसमें दुष्यंत ने 1960 और 1970 के दशक की सामाजिक-राजनीतिक उथल-पुथल, अन्याय और आम आदमी की पीड़ा को व्यक्त … Read more

हो गई है पीर पर्वत सी ( दुष्यंत कुमार )

‘हो गई है पीर पर्वत सी’ सामाजिक और राजनीतिक व्यवस्था के प्रति आक्रोश और परिवर्तन की तीव्र इच्छा को दर्शाती है । यह कविता साधारण व्यक्ति के दुख और पीड़ा को एक विशाल पर्वत के समान बताती है, जिसे पिघलकर समाप्त हो जाना चाहिए। कवि का मानना है कि अब सिर्फ हंगामा खड़ा करना मकसद … Read more

ग्लोबल वार्मिंग : कारण, प्रभाव व रोकथाम के उपाय

ग्लोबल वार्मिंग या भूमण्डलीय तापन वह स्थिति है जब पृथ्वी के वायुमंडल और सतह का औसत तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है। इसका मुख्य कारण ग्रीनहाउस गैसों (जैसे कार्बन डाइऑक्साइड, मीथेन, नाइट्रस ऑक्साइड) की मात्रा में वृद्धि है, जो सूर्य की गर्मी को पृथ्वी पर रोक लेती हैं और उसे वापस अंतरिक्ष में नहीं जाने … Read more

ओजोन की परत : क्षय के कारण, प्रभाव व समाधान

ओजोन की परत ( Ozone Layer ) : ओजोन परत पृथ्वी के वायुमंडल की समताप मंडल (Stratosphere) में स्थित एक गैसीय परत है, जो मुख्यतः ओजोन गैस (O₃) से बनी होती है। यह परत लगभग 10 से 50 किलोमीटर की ऊँचाई पर पाई जाती है और सूर्य से आने वाली हानिकारक पराबैंगनी (Ultraviolet Rays ) … Read more

अम्लीय वर्षा : अर्थ, परिभाषा, कारण और प्रभाव

अम्लीय वर्षा : अर्थ, परिभाषा, कारण और प्रभाव (Acid Rain : Meaning, Definition, Causes and Effects ) अर्थ: अम्लीय वर्षा वह वर्षा है जिसमें पानी के साथ अम्लीय तत्व जैसे सल्फ्यूरिक और नाइट्रिक अम्ल घुल जाते हैं। परिभाषा: जब वायुमंडल में मौजूद सल्फर डाइऑक्साइड (SO₂) और नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOₓ) जलवाष्प के साथ मिलकर अम्ल बनाते … Read more

वस्तुनिष्ठ प्रश्न ( पाश्चात्य काव्यशास्त्र एवं साहित्यालोचन )

प्लेटो ( 427 ईo पूo से 347 ईo पूo ) (1) प्लेटो ने काव्य को किस प्रकार का अनुकरण माना है? उत्तर: यथार्थ का त्रितीय अनुकरण। (2) प्लेटो ने कवियों को गणराज्य से क्यों निष्कासित करने को कहा ? उत्तर: क्योंकि वे तर्क की अपेक्षा भावनाओं को उत्तेजित करते हैं। (3) प्लेटो के अनुसार काव्य … Read more

जैव विविधता : अर्थ, प्रकार, महत्त्व, ह्रास के कारण व संरक्षण के उपाय

जैव विविधता (Biodiversity) पारिस्थितिकी तंत्र में पाए जाने वाले जीवों की विभिन्नता को संदर्भित करती है। यह पृथ्वी पर जीवन की समृद्धि और पारिस्थितिक संतुलन को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। जैव विविधता की परिभाषा जैव विविधता का अर्थ है किसी विशेष क्षेत्र में विभिन्न जीवों, पौधों, सूक्ष्मजीवों और पारिस्थितिकी तंत्रों की विभिन्नता। … Read more

भारतेन्दु हरिश्चंद्र कृत नाटक ‘अंधेर नगरी’ का कथासार

प्रथम दृश्य- (स्थान-बाहरी प्रान्त) महंत गुरु और दो शिष्य नारायण दास और गोबर्धन दास । प्रथम दृश्य में महंत और उनके दोनों शिष्य भजन गाते हुए एक नगर में प्रवेश करते हैं। महंत अपने शिष्यों को शिक्षा देते हैं कि व्यक्ति को अपने जीवन में लोभ का परित्याग करना चाहिए। लोभ एक ऐसी प्रवृति है … Read more

पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986

पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 भारत सरकार द्वारा पारित एक समग्र कानून है जिसका उद्देश्य पर्यावरण की रक्षा और सुधार करना है। इसे 1984 की भोपाल गैस त्रासदी के बाद पर्यावरणीय आपात स्थितियों से निपटने और प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए लागू किया गया था। यह अधिनियम केंद्र सरकार को पर्यावरणीय नियम बनाने, निगरानी करने, … Read more

कुंवर नारायण का साहित्यिक परिचय

जीवन परिचय — कुंवर नारायण का जन्म 19 सितंबर,1927 को उत्तर प्रदेश के फैजाबाद (अयोध्या) में एक संपन्न परिवार में हुआ। उनके परिवार का माहौल साहित्यिक और बौद्धिक था, जहां आचार्य नरेंद्र देव, आचार्य कृपलानी और राम मनोहर लोहिया जैसे व्यक्तियों का प्रभाव रहा। इस माहौल ने उनकी स्वतंत्र चिंतन और गंभीर अध्ययन की प्रवृत्ति … Read more

मरुस्थलीय पारिस्थितिक तंत्र : प्रकार व उदाहरण

मरुस्थलीय पारिस्थितिक तंत्र (Desert Ecosystem) वे पारिस्थितिक तंत्र होते हैं जहाँ वर्षा अत्यंत कम होती है और वातावरण शुष्क रहता है। यहाँ तापमान अत्यधिक गर्म या बहुत ठंडा हो सकता है, और जीव-जंतु तथा वनस्पतियाँ इस कठोर वातावरण के अनुकूल विकसित होती हैं। इन्हें रेगिस्तान का पारिस्थितिक तंत्र भी कहते हैं | इन तंत्रों में … Read more

चरागाह का पारिस्थितिक तंत्र: अर्थ, प्रकार व उदाहरण

चरागाह पारिस्थितिक तंत्र (Grassland Ecosystem) वे प्राकृतिक तंत्र हैं जहाँ प्रमुख रूप से घास और घास जैसी वनस्पतियाँ पाई जाती हैं। ये क्षेत्र पेड़ों की अपेक्षा अधिक खुले और समतल होते हैं और जानवरों के लिए चारे का प्रमुख स्रोत होते हैं। इन तंत्रों में ऊर्जा का प्रवाह मुख्यतः पौधों से शाकाहारी जानवरों और फिर … Read more

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