हिंदी का व्यावहारिक व्याकरण ( Hindi Minor ) BA -1st Semester

विकारी शब्द : अर्थ व भेद – संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण, क्रिया ( Vikari Shabd : Arth Aur Bhed ) अविकारी शब्द : अर्थ व प्रकार उपसर्ग और प्रत्यय व्याकरणिक कोटियाँ : लिंग, वचन, पुरुष, कारक समास के भेद / प्रकार ( Samas Ke Bhed / Prakar ) सन्धि का अर्थ व प्रकार वाक्य : अर्थ, … Read more

हिंदी भाषा एवं संप्रेषण : लेखन संप्रेषण ( Level 3)

इकाई 1 लेखन-संप्रेषण का अर्थ, परिभाषा व गुण-दोष लेखन संप्रेषण के प्रकार लेखन संप्रेषण को प्रभावी बनाने के तत्त्व या कारक लेखन संप्रेषण का उद्देश्य व महत्त्व ( Objectives and Importance of Written Communication ) इकाई 2 पत्राचार का अर्थ व प्रकार व्यावसायिक पत्राचार : अर्थ, प्रकार व महत्त्व व्यावसायिक रिपोर्ट लेखन : अर्थ व … Read more

रीतिकाल के प्रसिद्ध कवि : केशव, चिंतामणि, मतिराम, भूषण, देव, पद्मकर

(1) केशवदास ( Keshavdas ) जीवन परिचय: केशवदास (1555-1617 ई.) रीतिकाल के प्रथम और सबसे महत्वपूर्ण कवियों में से एक थे। उनका जन्म ओरछा (मध्य प्रदेश) में एक सनाढ्य ब्राह्मण परिवार में हुआ था। वे बुंदेलखंड के राजा इंद्रजीत सिंह और बाद में राजा वीरसिंह देव के आश्रय में रहे। केशव को हिंदी साहित्य में … Read more

सूफ़ी काव्य धारा के प्रसिद्ध कवि : मुल्ला दाऊद, क़ुतुबन, मँझन, जायसी

(1) मुल्ला दाऊद जीवन परिचय: मुल्ला दाऊद (14वीं शताब्दी) हिंदी साहित्य के सूफी काव्य धारा के प्रथम कवि माने जाते हैं। उनका समय फिरोजशाह तुगलक (1351-1388 ई.) के शासनकाल से माना जाता है, और उनकी प्रमुख रचना चंदायन 1379 ई. में रचित हुई। मुल्ला दाऊद का जन्म और व्यक्तिगत जीवन के बारे में प्रामाणिक जानकारी … Read more

आदिकाल के प्रसिद्ध कवि : चंदबरदाई, नरपति नाल्ह, जगनिक, विद्यापति, स्वयंभू, अमीर खुसरो

(1) चंदबरदाई जीवन परिचय: चंदबरदायी या चंदवरदाई (12वीं शताब्दी) आदिकाल के सबसे प्रसिद्ध रासो कवि हैं, जिन्हें हिंदी साहित्य का प्रथम महाकवि माना जाता है। उनका जन्म और जीवनकाल ठीक-ठीक निर्धारित नहीं है, परंतु विद्वानों के अनुसार वे 12वीं शताब्दी में दिल्ली और अजमेर के चौहान शासक पृथ्वीराज तृतीय (1178-1192 ई.) के दरबारी कवि थे। … Read more

रीतिकाल की परिस्थितियाँ (1643-1843 ई.)

रीतिकाल (लगभग 1643-1843 ई., संवत 1700-1900) हिंदी साहित्य का वह युग है, जो श्रृंगारिक काव्य, काव्यशास्त्र और अलंकारों के प्रभुत्व के लिए जाना जाता है। यह काल भक्तिकाल की आध्यात्मिकता से भिन्न, दरबारी और सौंदर्यबोधी साहित्य पर केंद्रित था। रीतिकाल की साहित्यिक परिस्थितियाँ तत्कालीन राजनीतिक, सामाजिक-आर्थिक, धार्मिक और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि से गहराई से प्रभावित थीं। … Read more

संत कवि : नानक, रैदास और दादू दयाल

गुरु नानक (1469-1539 ) गुरु नानक, सिख धर्म के संस्थापक और भक्तिकाल के प्रमुख निर्गुण भक्ति कवि, हिंदी साहित्य में अपनी आध्यात्मिक गहनता, सामाजिक सुधार के संदेश और सरल काव्य शैली के लिए विख्यात हैं। उनका जन्म 1469 में तलवंडी (वर्तमान ननकाना साहिब, पाकिस्तान) में हुआ था। नानक की रचनाएँ मुख्य रूप से गुरु ग्रंथ … Read more

भक्तिकाल की परिस्थितियाँ

भक्तिकाल को हिंदी साहित्य का स्वर्ण युग कहा जाता है जिसकी समय-सीमा संवत 1375 से संवत 1700 (लगभग 1318-1643 ई.) तक मानी जाती है। यह काल भक्ति आंदोलन के उदय और प्रसार का काल था, जिसने हिंदी साहित्य को आध्यात्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से समृद्ध किया। भक्तिकाल की साहित्यिक परिस्थितियाँ राजनीतिक, सामाजिक, धार्मिक और … Read more

हिंदी साहित्य के इतिहास लेखन की समस्याएँ

हिंदी साहित्य के इतिहास लेखन की परंपरा 19वीं शताब्दी से प्रारंभ हुई, जिसमें विदेशी विद्वानों जैसे गार्सां द तासी और जॉर्ज ग्रियर्सन से लेकर भारतीय विद्वानों जैसे शिवसिंह सेंगर, मिश्र बंधु, रामचंद्र शुक्ल, हजारीप्रसाद द्विवेदी, डॉ. नगेन्द्र, रामकुमार वर्मा और गणपति चंद्र गुप्त ने योगदान दिया। इस परंपरा ने हिंदी साहित्य को व्यवस्थित और वैज्ञानिक … Read more

हिंदी के साहित्येतिहास लेखन की परंपरा

हिंदी साहित्य के इतिहास लेखन की परंपरा का विकास 19वीं और 20वीं शताब्दी में हुआ जिसमें विदेशी और भारतीय विद्वानों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया। यह परंपरा साहित्य को व्यवस्थित, विश्लेषणात्मक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से समझने का प्रयास है। कुछ उल्लेखनीय प्रयास निम्नलिखित हैं : गार्सां द तासी (Garcin de Tassy) फ्रेंच विद्वान गार्सां द तासी … Read more

हिंदी साहित्य का इतिहास ( एम ए प्रथम सेमेस्टर ) पेपर -2 ( KUK )

इकाई 1 इतिहास दर्शन और साहित्येतिहास दर्शन हिंदी के साहित्येतिहास लेखन की परंपरा हिंदी साहित्य के इतिहास लेखन की समस्याएँ हिंदी साहित्य के इतिहास का काल विभाजन और नामकरण आदिकाल की परिस्थितियां ( Aadikal Ki Paristhitiyan ) आदिकाल का नामकरण और सीमा निर्धारण ( Aadikaal Ka Naamkaran aur Seema Nirdharan) आदिकाल : प्रमुख कवि, रचनाएं … Read more

समकालीन हिंदी कविता ( बी ए पंचम सेमेस्टर, हिंदी मेजर )

BA 5th Semester Hindi Major Syllabus इकाई 1 ( व्याख्या भाग ) हमारा देश ( Hamara Desh ) : अज्ञेय कितनी नावों में कितनी बार ( Kitni Navon Mein Kitni Bar ) : अज्ञेय नदी के द्वीप ( Nadi Ke Dvip ) : अज्ञेय कलगी बाजरे की ( अज्ञेय ) / Kalgi Bajre Ki ( … Read more

भारतेन्दु हरिश्चंद्र कृत ‘अंधेर नगरी’ नाटक की समीक्षा

भारतेन्दु हरिश्चंद्र द्वारा रचित नाटक ‘अंधेर नगरी’ एक प्रहसन है जो एक काल्पनिक कहानी के माध्यम से दूषित प्रशासनिक व्यवस्था और पतन की ओर अग्रसर प्रजा पर व्यंग्य करता है | किसी नाटक की समीक्षा करने के लिये विद्वानों ने साथ तत्त्व बताये हैं — कथानक या कथावस्तु, पात्र व चरित्र-चित्रण, संवाद या कथोपकथन, देशकाल … Read more

हिंदी की प्रासंगिकता या महत्त्व

हिंदी हमारे देश की सबसे ज़्यादा बोली जाने वाली भाषा है। यह भाषा हमारे दिलों को जोड़ती है और हमारी पहचान बनाती है। हिंदी में बोलना, लिखना और पढ़ना हमें अपनी संस्कृति और जड़ों से जोड़ता है। (1) अपनी भाषा, अपनी पहचान हिंदी हमारी मातृभाषा है। जब हम हिंदी में बात करते हैं, तो हमें … Read more

शिक्षा में नेतृत्व का महत्त्व या भूमिका

प्रत्येक संगठन या संस्था में नेतृत्व का महत्व है | नेतृत्व ही उस संगठन या संस्था को दिशा प्रदान करता है | शिक्षा के क्षेत्र में नेतृत्व की भूमिका या महत्व निम्नलिखित बिंदुओं से स्पष्ट है : (1) दृष्टिकोण व मिशन की स्थापना एक सशक्त शैक्षणिक नेतृत्व संस्था के उद्देश्य और दिशा को स्पष्ट करता … Read more

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