आलेख : अर्थ, विशेषताएँ व प्रकार

“आलेख” का शाब्दिक अर्थ होता है “लिखित विवरण”। यह एक प्रकार का गद्यात्मक वर्णन होता है, जिसमें किसी विषय पर सुव्यवस्थित, तर्कसंगत और विस्तृत रूप से विचार प्रस्तुत किए जाते हैं। परिभाषा : “आलेख एक लिखित रचना है जिसमें किसी विषय पर लेखक अपने विचारों, तर्कों और अनुभवों को व्यवस्थित और सुसंगत ढंग से प्रस्तुत … Read more

राजभाषा अधिनियम, 1963

राजभाषा अधिनियम (Official Languages Act – 1963) भारत में संघ के कार्यालयी प्रयोजनों के लिए हिंदी और अंग्रेजी के प्रयोग को नियंत्रित करने वाला कानून है। यह अधिनियम 1963 में पारित किया गया था और इसका मुख्य उद्देश्य संविधान के अनुच्छेद 343 के तहत हिंदी को भारत की राजभाषा के रूप में स्थापित करना है। … Read more

लोंजाइनस का उदात्त सिद्धांत

लोंजाइनस प्राचीन यूनान के महान साहित्यशास्त्री व आलोचक थे | उनके जन्म को लेकर विद्वान् एकमत नहीं हैं | अधिकांश विद्वान् ईसा की तीसरी सदी उनका जीवन काल मानते हैं | उनकी रचना ‘पेरिइप्सुस’ पाश्चात्य काव्यशास्त्र की महत्वपूर्ण पुस्तक है | लोंजाइनस (Longinus) का उदात्त सिद्धांत (Sublime Theory) प्राचीन साहित्यिक आलोचना का एक महत्वपूर्ण सिद्धांत … Read more

अरस्तू का विरेचन सिद्धांत

अरस्तू (Aristotle) प्राचीन ग्रीस का एक महान दार्शनिक और वैज्ञानिक था। अरस्तू का जन्म 384 ईo पूo में स्तगिरा, यूनान में हुआ था | वह प्लेटो (Plato) का शिष्य और सिकंदर महान (Alexander the Great) का गुरु था। अरस्तू ने तर्कशास्त्र, नीतिशास्त्र, राजनीति, काव्य, जीव विज्ञान और भौतिकी जैसे कई विषयों पर गहन अध्ययन किया … Read more

सतत पोषणीय विकास : अर्थ, इतिहास, घटक या आयाम व उद्देश्य

सतत पोषणीय विकास (Sustainable Development) वह विकास प्रक्रिया है जिसमें प्राकृतिक संसाधनों का प्रयोग इस ढंग से किया जाता है कि वे भावी पीढ़ियों के लिये भी सुरक्षित रहें । सतत विकास की अवधारणा संसाधनों के संरक्षण व उनके उचित उपयोग पर बल देती है | सतत विकास का इतिहास सतत विकास की अवधारणा नई … Read more

अरस्तू का अनुकरण सिद्धांत

अरस्तू ( Aristotle ) (384 ईसा पूर्व – 322 ईसा पूर्व) प्राचीन ग्रीस के एक महान दार्शनिक, वैज्ञानिक और शिक्षक थे। वे प्लेटो (Plato) के शिष्य और सिकंदर महान (Alexander the Great) के गुरु थे। अरस्तू को “पश्चिमी दर्शन का जनक” कहा जाता है, क्योंकि उनकी शिक्षाओं ने दर्शन, विज्ञान, राजनीति, काव्य, नाटक, नैतिकता और … Read more

भाषण का अर्थ, प्रकार व अच्छे भाषण की विशेषताएँ या गुण

भाषण से अभिप्राय एक ऐसे मौखिक संप्रेषण (verbal communication) से है, जिसमें कोई व्यक्ति किसी समूह या सभा के सामने अपने विचार, ज्ञान, अनुभव, या जानकारी को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करता है। इसका उद्देश्य लोगों को जागरूक करना, प्रेरित करना, शिक्षित करना या किसी विषय पर अपनी राय व्यक्त करना हो सकता है। भाषण … Read more

भाषण : उद्देश्य, तत्त्व व प्रकार

भाषण शब्द संस्कृत की ‘भाष’ धातु से बना है जिसका अर्थ होता है — बोलना या वाणी द्वारा व्यक्त करना | लेकिन सभी लोगों का बोलना भाषण नहीं होता | भाषण आम बोलचाल से भिन्न एक विशेष कला है जिसमें वक्ता लोगों के एक बड़े समूह के समक्ष अपने विचार व्यवस्थित रूप से रखता है … Read more

पर्यावरण अध्ययन : अर्थ, परिभाषा, क्षेत्र व महत्त्व

पर्यावरण अध्ययन (Environmental Studies ) पर्यावरण अध्ययन एक बहु-विषयक क्षेत्र है, जिसमें प्राकृतिक और मानव निर्मित पर्यावरण के बीच संबंधों का अध्ययन किया जाता है। इसमें पर्यावरण के घटकों, पारिस्थितिकी, जैव विविधता, प्रदूषण, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और सतत विकास जैसे विषयों को शामिल किया जाता है। इसका उद्देश्य पर्यावरण की सुरक्षा, प्राकृतिक संसाधनों का … Read more

मानक भाषा : अर्थ, परिभाषा और विशेषताएँ या लक्षण

मानक भाषा (Standard Language) किसी भाषा का वह परिनिष्ठित रूप है जिसे एक समुदाय, राज्य या राष्ट्र में संपर्क, शिक्षा, प्रशासन, साहित्य, विज्ञान, और अन्य औपचारिक क्षेत्रों में स्वीकार किया जाता है। इसका व्याकरण, शब्दावली, उच्चारण, और लेखन शैली निश्चित होते हैं, जिससे लिखने, पढ़ने, और बोलने में एकरूपता बनी रहती है। मानक भाषा को … Read more

राष्ट्रभाषा : अर्थ, परिभाषा और विशेषताएँ

राष्ट्र भाषा उस भाषा को कहते हैं जो किसी देश की सांस्कृतिक और राष्ट्रीय पहचान का प्रतीक होती है तथा संचार, प्रशासन और शिक्षा में व्यापक रूप से प्रयुक्त होती है। यह भाषा देश के नागरिकों को आपस में जोड़ने का कार्य करती है और राष्ट्रीय एकता को मजबूत बनाती है। परिभाषा — राष्ट्रभाषा की … Read more

सम्पर्क भाषा : अर्थ, परिभाषा और विशेषताएँ

संपर्क भाषा (Lingua Franca) वह भाषा होती है जो भिन्न-भिन्न मातृभाषा वाले लोगों के बीच आपसी संचार के लिए उपयोग की जाती है। यह भाषा किसी क्षेत्र, देश या अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापार, शिक्षा, प्रशासन, या सांस्कृतिक आदान-प्रदान के लिए प्रयुक्त हो सकती है। उदाहरण: हिंदी भारत में विभिन्न भाषाओं के बीच संपर्क भाषा है। … Read more

राजभाषा : अर्थ, परिभाषा और प्रकृति ( स्वरूप )

राजभाषा उस भाषा को कहते हैं जिसे किसी देश या राज्य में सरकारी कार्यों और प्रशासनिक उद्देश्यों के लिए आधिकारिक रूप से अपनाया जाता है। यह Official Language का हिंदी पर्याय है | भारतीय संविधान के अनुच्छेद 343(1) के अनुसार, देवनागरी लिपि में हिंदी को संघ की राजभाषा घोषित किया गया है। संविधान सभा ने … Read more

प्लेटो की काव्य संबंधी मान्यताएँ

प्लेटो (Plato) प्राचीन ग्रीस के महान दार्शनिक थे, जो सुकरात के शिष्य और अरस्तू के गुरु थे। वे पश्चिमी दर्शन के प्रमुख स्तंभों में से एक माने जाते हैं। उन्होंने कई दार्शनिक ग्रंथ लिखे, जिनमें “रिपब्लिक” (Republic), “फैड्रस” (Phaedrus), “आयोन” (Ion) और “पोएटिक्स” (Poetics, जिसे अरस्तू ने आगे बढ़ाया) प्रमुख हैं। प्लेटो की काव्य सम्बन्धी … Read more

सन्धि का अर्थ व प्रकार

दो निकटतम वर्णों के मेल से जो विकार ( परिवर्तन ) होता है, उसे सन्धि कहते हैं | जैसे — हिम + आलय = हिमालय | ( अ + आ = आ ) | सन्धि के भेद या प्रकार संधि के मुख्य रूप से तीन भेद हैं — (1) स्वर सन्धि, (2) व्यंजन सन्धि और … Read more

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