हिंदी भाषा एवं व्याकरण ( AEC HINDI )- BA- 1st Semester

भाषा के विविध रूप / भेद / प्रकार ( Bhasha Ke Vividh Roop / Bhed / Prakar ) शब्द : अर्थ, परिभाषा व प्रकार शब्द और पद ( Shabd Aur Pad ) हिन्दी की प्रमुख बोलियाँ और उनका क्षेत्र स्वरों का वर्गीकरण व्यंजनों का वर्गीकरण / भेद या प्रकार वाक्य : अर्थ, परिभाषा एवं स्वरूप … Read more

हिन्दी की प्रमुख बोलियाँ और उनका क्षेत्र

हिन्दी मुख्य रूप से उत्तर भारत में बोली जाती है | यह भाषा मुख्यतः हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड और बिहार राज्यों में बोली जाती है | हिंदी को मुख्य रूप से पांच उपभाषाओं में बांटा जा सकता है : (1) पश्चिमी हिन्दी, (2) पूर्वी हिन्दी, (3) राजस्थानी, (4) … Read more

बूढ़ी काकी ( मुंशी प्रेमचंद )( Budhi Kaki : Premchand )

बुढ़ापा बहुधा बचपन का पुनरागमन हुआ करता है। बूढ़ी काकी में जिह्वा-स्वाद के सिवा और कोई चेष्टा शेष न थी और न अपने कष्टों की ओर आकर्षित करने का, रोने के अतिरिक्त कोई दूसरा सहारा ही। समस्त इन्द्रियाँ, नेत्र, हाथ और पैर जवाब दे चुके थे। पृथ्वी पर पड़ी रहतीं और घरवाले कोई बात उनकी … Read more

समास के भेद / प्रकार ( Samas Ke Bhed / Prakar )

समास ‘समास’ का शाब्दिक अर्थ है – संक्षेप | समाज की प्रक्रिया में शब्दों का संक्षेपीकरण किया जाता है | सामान्यतः दो या दो से अधिक शब्दों के मेल से जो नया शब्द बनता है उसे समस्तपद कहते हैं तथा इस प्रक्रिया को समास कहते हैं | समास की प्रक्रिया में जब दो प्रमुख शब्दों … Read more

आधुनिक गद्य साहित्य B 23 – HIN- 301( प्रमुख प्रश्न )

यहाँ नई शिक्षा नीति के अंतर्गत कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय द्वारा बी ए तृतीय सेमेस्टर के हिन्दी अनिवार्य विषय के पाठ्यक्रम से परीक्षापयोगी महत्वपूर्ण प्रश्न दिये गये हैं | व्याख्या (1) बूढ़ी काकी ( मुंशी प्रेमचंद )( Budhi Kaki : Premchand ) (2) पुरस्कार ( जयशंकर प्रसाद ) (3) फैसला ( मैत्रेयी पुष्पा ) (4) मलबे का … Read more

व्याकरणिक कोटियाँ : लिंग, वचन, पुरुष, कारक

व्याकरणिक कोटियाँ जब कोई शब्द वाक्य में प्रयुक्त होता है तो उसे कुछ व्याकरणिक बंधनों को स्वीकार करना पड़ता है ; जिन्हें व्याकरणिक कोटियाँ कहते हैं | जैसे — लिंग, वचन, पुरुष, कारक, काल आदि | लिंग ( Ling ) संज्ञा के जिस रूप से किसी वस्तु, व्यक्ति या प्राणी आदि की स्त्री या पुरुष … Read more

प्रेमचंद का साहित्यिक परिचय ( 1880 – 1936 ईo)

जीवन परिचय प्रेमचंद ( Premchand ) हिन्दी के प्रसिद्ध लेखक थे। उनका वास्तविक नाम धनपतराय था | उनका जन्म 31 जुलाई, 1880 को उत्तर प्रदेश के वाराणसी के पास लमही गाँव में हुआ था। वे हिंदी और उर्दू दोनों भाषाओं में लिखते थे और उन्हें भारतीय साहित्य में उपन्यास सम्राट के रूप में जाना जाता … Read more

हजारी प्रसाद द्विवेदी ( 1907 – 1979 ईo)

जीवन परिचय हजारी प्रसाद द्विवेदी हिन्दी के प्रमुख साहित्यकार हैं | उनका जन्म 1907 ईस्वी में उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के ‘आरत दुबे का छपरा’ नामक गाँव में हुआ था | उनकी आरंभिक शिक्षा बलिया में ही हुई | सन 1927 में उन्होंने दसवीं कक्षा उत्तीर्ण की | उन्होंने शांति निकेतन, काशी विश्वविद्यालय और … Read more

नाख़ून क्यों बढ़ते हैं : मुख्य उद्देश्य या संदेश

‘नाख़ून क्यों बढ़ते हैं’ हजारी प्रसाद द्विवेदी द्वारा रचित एक प्रसिद्ध ललित निबंध है | यह निबंध उनके निबंध संग्रह ‘कल्पलता’ में संकलित है जो 1951 में प्रकशित हुआ था | ‘नाखून क्यों बढ़ते हैं’ निबंध मनुष्य की मनुष्यता व उसमें निहित पशुता पर विचार करता है। लेखक के अनुसार नाखुनों का बढ़ना मनुष्य की … Read more

वस्तुनिष्ठ प्रश्न ( हिन्दी गद्य साहित्य ) बी ए तृतीय सेमेस्टर ( NEP )

बूढ़ी काकी ( मुंशी प्रेमचंद ) ◾मुंशी प्रेमचन्द का जन्म कब और कहाँ हुआ? ▪️ 31 जुलाई, 1880 में वाराणसी के लम्ही नामक गाँव में | ◾ मुंशी प्रेमचंद की मृत्यु कब हुई? ▪️ सन 1936 में | ( 8 अप्रैल ) ◾ किस हिन्दी साहित्यकार को कहानी सम्राट व उपन्यास सम्राट कहा जाता है? … Read more

मुहावरे व लोकोक्तियाँ

मुहावरा — मुहावरा एक ऐसा वाक्यांश होता है जिसका अर्थ उसके शब्दों के अर्थ से भिन्न होता है। यह भाषा में विशेष अर्थ या भावना व्यक्त करने के लिए प्रयोग होता है। मुहावरों का उपयोग किसी विशेष स्थिति, भावना या विचार को संक्षेप में और प्रभावशाली तरीके से व्यक्त करने के लिए किया जाता है। … Read more

पर्यायवाची शब्द : अर्थ व उदाहरण

पर्यायवाची शब्द वे शब्द होते हैं जो प्राय: एक ही अर्थ को व्यक्त करते हैं और एक दूसरे के स्थान पर प्रयोग किया जा सकते हैं परंतु उनके अर्थ में कुछ सूक्ष्म भिन्नता हो सकती है ; जैसे — स्त्री — महिला, अबला, ललना | पर्यायवाची शब्दों को समानार्थक शब्द भी कहते हैं | पर्यायवाची … Read more

अविकारी शब्द : अर्थ व प्रकार

वाक्य में प्रयोग करते समय जिन शब्दों में कोई विकार या या परिवर्तन ना हो उन शब्दों को अविकारी शब्द कहते हैं | जैसे — और, तथा, किन्तु, ही, भी, तो, तक आदि | अविकारी शब्दों को ‘अव्यय’ भी कहा जाता है | अविकारी शब्दों के भेद अविकारी ( अव्यय ) शब्दों के पाँच भेद … Read more

अर्थ के आधार पर वाक्य के भेद

अर्थ के आधार पर वाक्य के आठ भेद हैं :- (1) विधानवाचक वाक्य जिन वाक्यों में किसी काम के करने या होने की सूचना दी जाये उन्हें, विधानवाचक वाक्य कहते हैं | कुछ विद्वान् इन्हें सकारात्मक वाक्य भी कहते हैं | उदाहरण — (i) लड़का जाता है | (ii) सीता सो रही है | (iii) … Read more

रचना के आधार पर वाक्य के भेद

रचना के आधार पर वाक्य के तीन भेद माने गए हैं – (क ) सरल या साधारण वाक्य, (ख ) संयुक्त वाक्य तथा (ग ) मिश्र या जटिल वाक्य | (क ) सरल वाक्य – जिस वाक्य में एक कर्त्ता और एक क्रिया अथवा एक उद्देश्य और एक विधेय होता है, उसे सरल वाक्य कहा … Read more

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