भक्तिकाल की परिस्थितियाँ

भक्तिकाल को हिंदी साहित्य का स्वर्ण युग कहा जाता है जिसकी समय-सीमा संवत 1375 से संवत 1700 (लगभग 1318-1643 ई.) तक मानी जाती है। यह काल भक्ति आंदोलन के उदय और प्रसार का काल था, जिसने हिंदी साहित्य को आध्यात्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से समृद्ध किया। भक्तिकाल की साहित्यिक परिस्थितियाँ राजनीतिक, सामाजिक, धार्मिक और … Read more

हिंदी साहित्य के इतिहास लेखन की समस्याएँ

हिंदी साहित्य के इतिहास लेखन की परंपरा 19वीं शताब्दी से प्रारंभ हुई, जिसमें विदेशी विद्वानों जैसे गार्सां द तासी और जॉर्ज ग्रियर्सन से लेकर भारतीय विद्वानों जैसे शिवसिंह सेंगर, मिश्र बंधु, रामचंद्र शुक्ल, हजारीप्रसाद द्विवेदी, डॉ. नगेन्द्र, रामकुमार वर्मा और गणपति चंद्र गुप्त ने योगदान दिया। इस परंपरा ने हिंदी साहित्य को व्यवस्थित और वैज्ञानिक … Read more

हिंदी के साहित्येतिहास लेखन की परंपरा

हिंदी साहित्य के इतिहास लेखन की परंपरा का विकास 19वीं और 20वीं शताब्दी में हुआ जिसमें विदेशी और भारतीय विद्वानों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया। यह परंपरा साहित्य को व्यवस्थित, विश्लेषणात्मक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से समझने का प्रयास है। कुछ उल्लेखनीय प्रयास निम्नलिखित हैं : गार्सां द तासी (Garcin de Tassy) फ्रेंच विद्वान गार्सां द तासी … Read more

हिंदी साहित्य का इतिहास ( एम ए प्रथम सेमेस्टर ) पेपर -2 ( KUK )

इकाई 1 इतिहास दर्शन और साहित्येतिहास दर्शन हिंदी के साहित्येतिहास लेखन की परंपरा हिंदी साहित्य के इतिहास लेखन की समस्याएँ हिंदी साहित्य के इतिहास का काल विभाजन और नामकरण आदिकाल की परिस्थितियां ( Aadikal Ki Paristhitiyan ) आदिकाल का नामकरण और सीमा निर्धारण ( Aadikaal Ka Naamkaran aur Seema Nirdharan) आदिकाल : प्रमुख कवि, रचनाएं … Read more

समकालीन हिंदी कविता की प्रमुख प्रवृत्तियाँ या विशेषताएँ

समकालीन हिंदी कविता की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं : (1) परंपरागत प्रभावों से मुक्ति : समकालीन हिंदी कविता ने छायावादी और रोमांटिक सौंदर्यबोध से मुक्ति पाई है, जो इसे अधिक यथार्थवादी बनाती है। यह कविता जीवन की कठोर वास्तविकताओं को सामने लाती है, आदर्शवाद से हटकर वर्तमान की जटिलताओं को दर्शाती है। कवि पारंपरिक प्रतीकों … Read more

समाचार : अर्थ, तत्त्व ( विशेषताएँ ) और लेखन शैली ( उलटा पिरामिड शैली )

समाचार वह सूचना होती है जो किसी ताज़ा, महत्वपूर्ण, रोचक या जन-सामान्य को प्रभावित करने वाली घटना के बारे में बताती है। यह वह जानकारी है जो जनता को देश, दुनिया, समाज, राजनीति, खेल, विज्ञान, व्यापार, मनोरंजन आदि से जुड़े हालिया घटनाक्रमों से अवगत कराती है। सरल शब्दों में — “समाचार वह सूचना है जो … Read more

भागी हुई लड़कियाँ ( आलोक धन्वा )

एक घर की ज़ंजीरें कितना ज़्यादा दिखाई पड़ती हैंजब घर से कोई लड़की भागती है क्या उस रात की याद आ रही हैजो पुरानी फ़िल्मों में बार-बार आती थी जब भी कोई लड़की घर से भागती थी?बारिश से घिरे वे पत्थर के लैंप पोस्ट सिर्फ़ आँखों की बेचैनी दिखाने भर उनकी रोशनी?और वे तमाम गाने … Read more

मेरी किस्मत में यही अच्छा रहा (चंद्रकांत देवताले )

मैं मरने से नहीं डरता हूँन बेवजह मरने की चाहत सँजोए रखता हूँ एक जासूस अपनी तहक़ीक़ात बख़ूबी करेयही उसकी नियामत है किराए की दुनिया और उधार के समय कीकैंची से आज़ाद हूँ पूरी तरह मुग्ध नहीं करना चाहता किसी कोमेरे आड़े नहीं आ सकती सस्ती और सतही मुस्कुराहटें मैं वेश्याओं की इज़्ज़त कर सकता … Read more

शब्दों की पवित्रता के बारे में ( चंद्रकांत देवताले )

रोटी सेंकती पत्नी से हँसकर कहा मैंनेअगला फुलका बिल्कुल चंद्रमा की तरह बेदाग़ हो तो जानूँउसने याद दिलाया बेदाग़ नहीं होता कभी चंद्रमा तो शब्दों की पवित्रता के बारे में सोचने लगा मैंक्या शब्द रह सकते हैं प्रसन्न या उदास केवल अपने सेवह बोली चकोटी पर पड़ी कच्ची रोटी को दिखातेयह है चंद्रमा जैसी दे … Read more

अब तो पथ यही है ( दुष्यंत कुमार )

दुष्यंत कुमार की कविता ‘अब तो पथ यही है’ निराशा और मजबूरी की भावना को दर्शाती है, जहाँ व्यक्ति जीवन की सच्चाइयों को स्वीकार कर लेता है। इस कविता में कहा गया है कि ज्वार का आवेग अब धीमा हो चला है और आकाश से भी कोई उम्मीद नहीं बची है। जब जीवन की परिस्थितियों … Read more

साये में धूप ( दुष्यंत कुमार )

“साए में धूप” दुष्यंत कुमार की एक प्रसिद्ध ग़ज़ल है, जो उनके संग्रह “साए में धूप” (1975) का हिस्सा है। यह ग़ज़ल हिंदी साहित्य में अपनी गहन संवेदनशीलता और सामाजिक चेतना के लिए जानी जाती है। इसमें दुष्यंत ने 1960 और 1970 के दशक की सामाजिक-राजनीतिक उथल-पुथल, अन्याय और आम आदमी की पीड़ा को व्यक्त … Read more

हो गई है पीर पर्वत सी ( दुष्यंत कुमार )

‘हो गई है पीर पर्वत सी’ सामाजिक और राजनीतिक व्यवस्था के प्रति आक्रोश और परिवर्तन की तीव्र इच्छा को दर्शाती है । यह कविता साधारण व्यक्ति के दुख और पीड़ा को एक विशाल पर्वत के समान बताती है, जिसे पिघलकर समाप्त हो जाना चाहिए। कवि का मानना है कि अब सिर्फ हंगामा खड़ा करना मकसद … Read more

समकालीन हिंदी कविता ( बी ए पंचम सेमेस्टर, हिंदी मेजर )

BA 5th Semester Hindi Major Syllabus इकाई 1 ( व्याख्या भाग ) हमारा देश ( Hamara Desh ) : अज्ञेय कितनी नावों में कितनी बार ( Kitni Navon Mein Kitni Bar ) : अज्ञेय नदी के द्वीप ( Nadi Ke Dvip ) : अज्ञेय कलगी बाजरे की ( अज्ञेय ) / Kalgi Bajre Ki ( … Read more

ग्लोबल वार्मिंग : कारण, प्रभाव व रोकथाम के उपाय

ग्लोबल वार्मिंग या भूमण्डलीय तापन वह स्थिति है जब पृथ्वी के वायुमंडल और सतह का औसत तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है। इसका मुख्य कारण ग्रीनहाउस गैसों (जैसे कार्बन डाइऑक्साइड, मीथेन, नाइट्रस ऑक्साइड) की मात्रा में वृद्धि है, जो सूर्य की गर्मी को पृथ्वी पर रोक लेती हैं और उसे वापस अंतरिक्ष में नहीं जाने … Read more

ओजोन की परत : क्षय के कारण, प्रभाव व समाधान

ओजोन की परत ( Ozone Layer ) : ओजोन परत पृथ्वी के वायुमंडल की समताप मंडल (Stratosphere) में स्थित एक गैसीय परत है, जो मुख्यतः ओजोन गैस (O₃) से बनी होती है। यह परत लगभग 10 से 50 किलोमीटर की ऊँचाई पर पाई जाती है और सूर्य से आने वाली हानिकारक पराबैंगनी (Ultraviolet Rays ) … Read more

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