श्रद्धा सर्ग ( कामायनी ) : जयशंकर प्रसाद ( भाग 6)

(1) दया, माया, ममता लो आज,मधुरिमा लो, अगाध विश्वास; हमारा हृदय रत्न निधि स्वच्छतुम्हारे लिए खुला है पास। प्रसंग : प्रस्तुत अवतरण जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित महाकाव्य ‘कामायनी’ के ‘श्रद्धा’ सर्ग से अवतरित है जिसमें श्रद्धा के सौंदर्य और जलप्रलय के बाद चिंता-निमग्न मनु और श्रद्धा के मिलन और वार्तालाप का वर्णन किया गया है … Read more

श्रद्धा सर्ग ( कामायनी ) : जयशंकर प्रसाद ( भाग 5)

(1) किंतु जीवन कितना निरुपाय!लिया है देख नहीं संदेह निराशा है जिसका परिणामसफलता का वह कल्पित गेह। प्रसंग : प्रस्तुत अवतरण जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित महाकाव्य ‘कामायनी’ के ‘श्रद्धा’ सर्ग से अवतरित है जिसमें श्रद्धा के सौंदर्य और जलप्रलय के बाद चिंता-निमग्न मनु और श्रद्धा के मिलन और वार्तालाप का वर्णन किया गया है | … Read more

श्रद्धा सर्ग ( कामायनी ) : जयशंकर प्रसाद ( भाग 4)

(1) तपस्वी! क्यों इतने हो क्लांत?वेदना का यह कैसा वेग? आह! तुम कितने अधिक हताशबताओ यह कैसा उद्वेग! प्रसंग : प्रस्तुत अवतरण जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित महाकाव्य ‘कामायनी’ के ‘श्रद्धा’ सर्ग से अवतरित है जिसमें श्रद्धा के सौंदर्य और जलप्रलय के बाद चिंता-निमग्न मनु और श्रद्धा के मिलन और वार्तालाप का वर्णन किया गया है … Read more

श्रद्धा सर्ग ( कामायनी ) : जयशंकर प्रसाद ( भाग 3)

(1) एक विस्मृति का स्तूप अचेत,ज्योति का धुँधला-सा प्रतिबिंब; और जड़ता की जीवन राशिसफलता का संकलित विलंब। प्रसंग : प्रस्तुत अवतरण जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित महाकाव्य ‘कामायनी’ के ‘श्रद्धा’ सर्ग से अवतरित है जिसमें श्रद्धा के सौंदर्य और जलप्रलय के बाद चिंता-निमग्न मनु और श्रद्धा के मिलन को शब्द दिये गये हैं | व्याख्या : … Read more

श्रद्धा सर्ग ( कामायनी ) : जयशंकर प्रसाद ( भाग 2 )

(1) घिर रहे थे घुँघराले बालअंस अवलंबित मुख के पास; नील घन-शावक से सुकुमारसुधा भरने को विधु के पास। प्रसंग : प्रस्तुत अवतरण जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित महाकाव्य ‘कामायनी’ के ‘श्रद्धा’ सर्ग से अवतरित है जिसमें श्रद्धा के सौंदर्य और जलप्रलय के बाद चिंता-निमग्न मनु और श्रद्धा के मिलन को शब्द दिये गये हैं | … Read more

श्रद्धा सर्ग ( कामायनी ) : जयशंकर प्रसाद ( भाग 1 )

(1) कौन तुम! संसृति-जलनिधि तीरतरंगों से फेंकी मणि एक, कर रहे निर्जन का चुपचापप्रभा की धारा से अभिषेक! प्रसंग : प्रस्तुत अवतरण जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित महाकाव्य ‘कामायनी’ के ‘श्रद्धा’ सर्ग से अवतरित है जिसमें श्रद्धा के सौंदर्य और जलप्रलय के बाद चिंता-निमग्न मनु और श्रद्धा के मिलन को शब्द दिये गये हैं | व्याख्या … Read more

चिंता सर्ग ( कामायनी ) : जयशंकर प्रसाद ( भाग 3 )

(1) एक नाव थी, और न उसमें डाँड़े लगते, या पतवार,तरल तरंगों में उठ-गिरकर बहती पगली बारंबार।लगते प्रबल थपेड़े, धुँधले तट का था कुछ पता नहीं,कातरता से भरी निराशा देख नियति पथ बनी वहीं। प्रसंग : प्रस्तुत अवतरण जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित महाकाव्य ‘कामायनी’ के ‘चिंता सर्ग’ से अवतरित है | प्रस्तुत काव्यांश में जलप्रलय … Read more

चिंता सर्ग ( कामायनी ) : जयशंकर प्रसाद ( भाग 2 )

(1) चिर-किशोर-वय,नित्यविलासी–सुरभित जिससे रहा दिगंतआज तिरोहित हुआ कहाँ वह मधु से पूर्ण अनंत वसंत?कुसुमित कुंजों में वे पुलकित प्रेमालिंगन हुए विलीन,मौन हुई हैं मूर्च्छित तानें और न सुन पड़ती अब बीन। प्रसंग : प्रस्तुत अवतरण जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित महाकाव्य ‘कामायनी’ के ‘चिंता सर्ग’ से अवतरित है | प्रस्तुत काव्यांश में जलप्रलय के बाद मनु … Read more

चिंता सर्ग ( कामायनी ) : जयशंकर प्रसाद ( भाग 1 )

(1) हिमगिरि के उत्तुंग शिखर पर, बैठ शिला की शीतल छाँह,एक पुरुष, भींगे नयनों से देख रहा था प्रलय प्रवाह ।नीचे जल था ऊपर हिम था, एक तरल था एक सघन,एक तत्व की ही प्रधानता-कहो उसे जड़ या चेतन । प्रसंग : प्रस्तुत अवतरण जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित महाकाव्य ‘कामायनी’ के ‘चिंता सर्ग’ से अवतरित … Read more

आधुनिक हिंदी काव्य ( एम ए प्रथम सेमेस्टर ) पेपर -1 ( KUK )

इकाई 1 चिंता सर्ग ( कामायनी ) : जयशंकर प्रसाद ( भाग 1 ) चिंता सर्ग ( कामायनी ) : जयशंकर प्रसाद ( भाग 2 ) चिंता सर्ग ( कामायनी ) : जयशंकर प्रसाद ( भाग 3 ) श्रद्धा सर्ग ( कामायनी ) : जयशंकर प्रसाद ( भाग 1 ) श्रद्धा सर्ग ( कामायनी ) … Read more

रीतिकाल के प्रसिद्ध कवि : केशव, चिंतामणि, मतिराम, भूषण, देव, पद्मकर

(1) केशवदास ( Keshavdas ) जीवन परिचय: केशवदास (1555-1617 ई.) रीतिकाल के प्रथम और सबसे महत्वपूर्ण कवियों में से एक थे। उनका जन्म ओरछा (मध्य प्रदेश) में एक सनाढ्य ब्राह्मण परिवार में हुआ था। वे बुंदेलखंड के राजा इंद्रजीत सिंह और बाद में राजा वीरसिंह देव के आश्रय में रहे। केशव को हिंदी साहित्य में … Read more

सूफ़ी काव्य धारा के प्रसिद्ध कवि : मुल्ला दाऊद, क़ुतुबन, मँझन, जायसी

(1) मुल्ला दाऊद जीवन परिचय: मुल्ला दाऊद (14वीं शताब्दी) हिंदी साहित्य के सूफी काव्य धारा के प्रथम कवि माने जाते हैं। उनका समय फिरोजशाह तुगलक (1351-1388 ई.) के शासनकाल से माना जाता है, और उनकी प्रमुख रचना चंदायन 1379 ई. में रचित हुई। मुल्ला दाऊद का जन्म और व्यक्तिगत जीवन के बारे में प्रामाणिक जानकारी … Read more

आदिकाल के प्रसिद्ध कवि : चंदबरदाई, नरपति नाल्ह, जगनिक, विद्यापति, स्वयंभू, अमीर खुसरो

(1) चंदबरदाई जीवन परिचय: चंदबरदायी या चंदवरदाई (12वीं शताब्दी) आदिकाल के सबसे प्रसिद्ध रासो कवि हैं, जिन्हें हिंदी साहित्य का प्रथम महाकवि माना जाता है। उनका जन्म और जीवनकाल ठीक-ठीक निर्धारित नहीं है, परंतु विद्वानों के अनुसार वे 12वीं शताब्दी में दिल्ली और अजमेर के चौहान शासक पृथ्वीराज तृतीय (1178-1192 ई.) के दरबारी कवि थे। … Read more

रीतिकाल की परिस्थितियाँ (1643-1843 ई.)

रीतिकाल (लगभग 1643-1843 ई., संवत 1700-1900) हिंदी साहित्य का वह युग है, जो श्रृंगारिक काव्य, काव्यशास्त्र और अलंकारों के प्रभुत्व के लिए जाना जाता है। यह काल भक्तिकाल की आध्यात्मिकता से भिन्न, दरबारी और सौंदर्यबोधी साहित्य पर केंद्रित था। रीतिकाल की साहित्यिक परिस्थितियाँ तत्कालीन राजनीतिक, सामाजिक-आर्थिक, धार्मिक और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि से गहराई से प्रभावित थीं। … Read more

संत कवि : नानक, रैदास और दादू दयाल

गुरु नानक (1469-1539 ) गुरु नानक, सिख धर्म के संस्थापक और भक्तिकाल के प्रमुख निर्गुण भक्ति कवि, हिंदी साहित्य में अपनी आध्यात्मिक गहनता, सामाजिक सुधार के संदेश और सरल काव्य शैली के लिए विख्यात हैं। उनका जन्म 1469 में तलवंडी (वर्तमान ननकाना साहिब, पाकिस्तान) में हुआ था। नानक की रचनाएँ मुख्य रूप से गुरु ग्रंथ … Read more

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