बड़े भाई साहब ( हिंदी कहानी ) : मुंशी प्रेमचंद

Bade Bhai Sahab (Hindi Kahani ): Munshi Premchand मेरे भाई साहब मुझसे पाँच साल बडे थे, लेकिन तीन दरजे आगे। उन्‍होने भी उसी उम्र में पढना शुरू किया था जब मैने शुरू किया; लेकिन तालीम जैसे महत्‍व के मामले में वह जल्‍दीबाजी से काम लेना पसंद न करते थे। इस भवन कि बुनियाद खूब मजबूत … Read more

महाजनी सभ्यता ( हिंदी निबंध ) : प्रेमचंद

मुज़द: ए दिल कि मसीहा नफ़से मी आयद; कि जे़ अनफ़ास खुशश बूए कसे मी आयद। ( हृदय तू प्रसन्न हो कि पीयूषपाणि मसीहा सशरीर तेरी ओर आ रहा है। देखता नहीं कि लोगों की साँसों से किसी की सुगन्धि आ रही है।) जागीरदारी सभ्यता में बलवान भुजाएँ और मजबूत कलेजा जीवन की आवश्यकताओें में … Read more

उर्दू, हिन्दी और हिन्दुस्तानी (हिन्दी निबंध) : मुंशी प्रेमचंद

Urdu, Hindi Aur Hindustani (Hindi Nibandh) : Munshi Premchand यह बात सभी लोग मानते हैं कि राष्ट्र को दृढ़ और बलवान बनाने के लिए देश में सांस्कृतिक एकता का होना बहुत आवश्यक है। और किसी राष्ट्र की भाषा तथा लिपि इस सांस्कृतिक एकता का एक अंग है। श्रीमती खलीदा अदीब खानम ने अपने एक भाषण … Read more

साम्प्रदायिकता और संस्कृति ( हिंदी निबंध ) : प्रेमचंद

Sampradayikta Aur Sanskriti ( Hindi Nibandh ) : Premchand साम्प्रदायिकता सदैव संस्कृति की दुहाई दिया करती है। उसे अपने असली रूप में निकलने में शायद लज्जा आती है, इसलिए वह उस गधे की भाँति जो सिंह की खाल ओढ़कर जंगल में जानवरों पर रोब जमाता फिरता था, संस्कृति का खोल ओढ़कर आती है। हिन्दू अपनी … Read more

मंत्र ( मुंशी प्रेमचंद )

मुंशी प्रेमचंद द्वारा लिखित कहानी मंत्र समाज के कठोर यथार्थ और मानव मूर्तियों पर आधारित एक मार्मिक कहानी है यह कहानी एक घमंडी डॉक्टर और एक दयालु गरीब बुद्ध भगत के बीच की भावनात्मक और नैतिक लड़ाई की कहानी है | कहानी का मुख्य संदेश है कि हमें अमीर-गरीब के साथ समान व्यवहार करना चाहिए … Read more

प्रेमचंद ( एम ए प्रथम सेमेस्टर ) पेपर -5 ( KUK )

इकाई 1 रंगभूमि ( उपन्यास ) : केवल व्याख्या हेतु रंगभूमि उपन्यास यहाँ से download करें 👇 इकाई 2 कर्मभूमि ( उपन्यास ) कर्मभूमि उपन्यास यहाँ से download करें 👇 इकाई 3 प्रेमचंद का निबंध साहित्य स्वदेशी आंदोलन ( मुंशी प्रेमचंद ) राणा प्रताप पुराना जमाना नया जमाना ( हिंदी निबंध ) : प्रेमचंद साम्प्रदायिकता … Read more

शतरंज के खिलाड़ी ( मुंशी प्रेमचंद )

मुंशी प्रेमचंद की कहानी शतरंज के खिलाड़ी पहली बार अक्टूबर 1924 में हिंदी पत्रिका ‘माधुरी’ में प्रकाशित हुई। यह कहानी अवध के नवाबी युग की पृष्ठभूमि पर आधारित है, जो लखनऊ के दो जमींदारों, मिर्जा सज्जाद अली और मीर रोशन अली की शतरंज के प्रति जुनूनी लत को दर्शाती है। प्रेमचंद ने इस कहानी के … Read more

हिंदी पत्रकारिता ( एम ए प्रथम सेमेस्टर ) पेपर -4 ( KUK )

इकाई 1 पत्रकारिता : अर्थ, परिभाषा, स्वरूप एवं महत्त्व पत्रकारिता के प्रकार / क्षेत्र या आयाम जनसंचार के रूप में पत्रकारिता का महत्त्व हिंदी की साहित्यिक पत्रकारिता हिंदी पत्रकारिता का उद्भव एवं विकास अथवा हिंदी पत्रकारिता का इतिहास स्वतंत्रता पूर्व की हिंदी पत्रकारिता स्वतंत्रता के बाद की हिंदी पत्रकारिता स्वतंत्रता आंदोलन में हिंदी पत्रकारिता का … Read more

मोहन राकेश का साहित्यिक परिचय

मोहन राकेश का जीवन परिचय ( Mohan Rakesh Ka Jivan Parichay ) मोहन राकेश का जन्म 8 जनवरी 1925 को अमृतसर, पंजाब में एक सिंधी परिवार में हुआ। उनका मूल नाम मदन मोहन गुगलानी था। पिता कर्मचंद गुगलानी वकील थे। प्रारंभिक शिक्षा अमृतसर में हुई, फिर पंजाब विश्वविद्यालय से हिंदी और अंग्रेजी में एम.ए. किया। … Read more

यही मेरा वतन है : प्रेमचंद ( कहानी )

आज पूरे साठ बरस के बाद मुझे अपने वतन, प्यारे वतन का दर्शन फिर नसीब हुआ। जिस वक़्त मैं अपने प्यारे देश से विदा हुआ और क़िस्मत मुझे पच्छिम की तरफ़ ले चली, मेरी उठती जवानी थी। मेरी रगों में ताज़ा खून दौड़ता था और सीना उमंगों और बड़े-बड़े इरादों से भरा हुआ था। मुझे … Read more

दुष्यंत कुमार का साहित्यिक परिचय

दुष्यंत कुमार का जीवन परिचय ( Dushyant Kumar Ka Jivan Parichay ) दुष्यंत कुमार (1 सितंबर 1933 – 30 दिसंबर 1975) हिंदी साहित्य के प्रख्यात कवि, गीतकार और नाटककार थे। उनका जन्म उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के राजपुर नवादा गाँव में एक साधारण परिवार में हुआ। उनकी प्रारंभिक शिक्षा गाँव में हुई, और बाद … Read more

कलगी बाजरे की ( अज्ञेय ) / Kalgi Bajre Ki ( Agyey ) मूल व व्याख्या

‘कलगी बाजरे की’ ( Kalgi Bajre Ki ) अज्ञेय के काव्य-संग्रह ‘हरी घास पर क्षण भर’ (1949) की अनूठी कविता है | इस कविता में उन्होंने प्रेम और सौंदर्य के परम्परागत उपमानों — कमलिनी, चम्पा, तारिका आदि का प्रतिकार करते हुए प्राकृतिक और स्थानीय प्रतीकों को अपनाया है | इस कविता में अज्ञेय ‘हरी बिछली … Read more

आदिकालीन साहित्य की विभिन्न धाराएँ

आदिकालीन साहित्य का परिचय आदिकालीन साहित्य हिंदी साहित्य का प्रारंभिक चरण है, जो लगभग 700 ई. से 1375 ई. तक फैला हुआ है, और इसे वीरगाथा काल या सिद्ध-नाथ काल के नाम से भी जाना जाता है। इस काल में साहित्य मुख्यतः अपभ्रंश, प्राकृत और प्रारंभिक हिंदी (अवहट्ट) में रचा गया, जो मौखिक परंपरा पर … Read more

सरोज स्मृति : सूर्यकान्त त्रिपाठी निराला ( भाग 2)

आयेंगे कल।” दृष्टि थी शिथिल,आई पुतली तू खिल-खिल-खिलहँसती, मैं हुआ पुन: चेतनसोचता हुआ विवाह-बन्धन।कुंडली दिखा बोला — “ए — लो”आई तू, दिया, कहा–“खेलो।”कर स्नान शेष, उन्मुक्त-केशसासुजी रहस्य-स्मित सुवेशआईं करने को बातचीतजो कल होनेवाली, अजीत,संकेत किया मैंने अखिन्नजिस ओर कुंडली छिन्न-भिन्न;देखने लगीं वे विस्मय भरतू बैठी संचित टुकडों पर। धीरे-धीरे फिर बढा़ चरण,बाल्य की केलियों का … Read more

सरोज स्मृति : सूर्यकान्त त्रिपाठी निराला ( भाग 1)

ऊनविंश पर जो प्रथम चरणतेरा वह जीवन-सिन्धु-तरण;तनये, ली कर दृक्पात तरुणजनक से जन्म की विदा अरुण!गीते मेरी, तज रूप-नामवर लिया अमर शाश्वत विरामपूरे कर शुचितर सपर्यायजीवन के अष्टादशाध्याय,चढ़ मृत्यु-तरणि पर तूर्ण-चरणकह – “पित:, पूर्ण आलोक-वरणकरती हूँ मैं, यह नहीं मरण,‘सरोज’ का ज्योति:शरण – तरण!” — अशब्द अधरों का सुना भाष,मैं कवि हूँ, पाया है प्रकाशमैंने … Read more

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