मजदूरी और प्रेम ( निबंध ) : सरदार पूर्ण सिंह / Majdoori Aur Prem ( Nibandh ) : Sardar Pooran Singh

हल चलाने वाले का जीवन हल चलाने वाले और भेड़ चराने वाले प्रायः स्वभाव से ही साधु होते हैं। हल चलाने वाले अपने शरीर का हवन किया करते हैं। खेत उनकी हवनशाला है। उनके हवनकुंड की ज्वाला की किरणें चावल के लंबे और सुफेद दानों के रूप में निकलती हैं। गेहूँ के लाल-लाल दाने इस … Read more

भारतीय काव्यशास्त्र एवं हिंदी आलोचना( एम ए तृतीय सेमेस्टर ) पेपर -1 ( M24-HIN-301/ CC 9) ( KUK )

इकाई 1 काव्य लक्षण या स्वरूप काव्य गुण : अर्थ, परिभाषा और प्रकार ( Kavya Gun : Arth, Paribhasha Aur Swaroop ) काव्य-दोष : अर्थ, परिभाषा व प्रकार काव्य के प्रमुख तत्त्व काव्य हेतु : अर्थ, परिभाषा, स्वरूप और प्रासंगिकता या महत्त्व काव्य हेतु का अर्थ एवं प्रकार / भेद काव्य-प्रयोजन : अर्थ, परिभाषा, स्वरूप … Read more

भिक्षुक ( सूर्यकान्त त्रिपाठी निराला ) / Bhikshuk ( Suryakant Tripathi Nirala )

वह आता–दो टूक कलेजे को करता, पछतातापथ पर आता। पेट पीठ दोनों मिलकर हैं एक,चल रहा लकुटिया टेक,मुट्ठी भर दाने को — भूख मिटाने कोमुँह फटी पुरानी झोली का फैलाता —दो टूक कलेजे के करता पछताता पथ पर आता। साथ दो बच्चे भी हैं सदा हाथ फैलाए,बाएँ से वे मलते हुए पेट को चलते,और दाहिना … Read more

पुराना जमाना नया जमाना ( हिंदी निबंध ) : प्रेमचंद

Purana Jamana Naya Jamana (Hindi Nibandh) 🙁 Munshi Premchand ) पुराने जमाने में सभ्यता का अर्थ आत्मा की सभ्यता और आचार की सभ्यता होता था। वर्तमान युग में सभ्यता का अर्थ है स्वार्थ और आडंबर। उसका नैतिक पक्ष छूट गया। उसकी सूरत बदल कर अब वह हो गई है जिसे हमारे पुराने लोग असभ्यता कहते। … Read more

हिंदी उपन्यास( एम ए प्रथम सेमेस्टर ) पेपर -3 ( KUK )

इकाई 1 गोदान ( उपन्यास) : प्रेमचंद ( केवल व्याख्या हेतु ) ‘गोदान’ उपन्यास यहाँ से download करें 👇 गोदान का मूल भाव / उद्देश्य या समस्याएं गोदान में आदर्शोन्मुख यथार्थवाद गोदान में कृषक जीवन गोदान में ग्रामीण व नागरिक कथाओं का पारस्परिक संबंध इकाई 2 मैला आँचल ( उपन्यास ) : फणिश्वरनाथ रेणु मैला … Read more

स्वदेशी आंदोलन ( मुंशी प्रेमचंद )

हिन्दुस्तान के लगभग सभी प्रतिष्ठित पत्रों और पत्रिकाओं ने इस देशभक्तिपूर्ण आंदोलन का समर्थन किया है और जो पहले थोडा हिचकिचा रहे थे उनका भी अब विश्वास पक्का होता जाता है। मगर अभी अक्सर भलाई चाहने वालों की जबान से सुनने में आता है कि वह उन मुश्किलों का सामना करने के काबिल नहीं हैं … Read more

कफ़न ( मुंशी प्रेमचंद )

झोपड़े के द्वार पर बाप और बेटा दोनों एक बुझे हुए अलाव के सामने चुपचाप बैठे हुए हैं और अन्दर बेटे की जवान बीवी बुधिया प्रसव-वेदना में पछाड़ खा रही थी. रह-रहकर उसके मुंह से ऐसी दिल हिला देने वाली आवाज़ निकलती थी, कि दोनों कलेजा थाम लेते थे. जाड़ों की रात थी, प्रकृति सन्नाटे … Read more

मनोवृत्ति (हिंदी कहानी) : मुंशी प्रेमचंद

Manovritti (Hindi Kahani) : Munshi Premchand एक सुन्दर युवती, प्रातःकाल गाँधी पार्क में बिल्लौर के बेंच पर गहरी नींद में सोयी पायी जाय, यह चौंका देनेवाली बात है। सुन्दरियाँ पार्कों में हवा खाने आती हैं, हँसती हैं, दौड़ती हैं, फूल-पौधों से खेलती हैं, किसी का इधर ध्यान नहीं जाता, लेकिन कोई युवती रविश के किनारेवाले … Read more

स्वत्व-रक्षा (हिंदी कहानी) : मुंशी प्रेमचंद

Swatwa Raksha (Hindi Kahani) : Munshi Premchand मीर दिलावर अली के पास एक बड़ी रास का कुम्मैत घोड़ा था। कहते तो वह यही थे कि मैंने अपनी जिन्दगी की आधी कमाई इस पर खर्च की है, पर वास्तव में उन्होंने इसे पलटन से सस्ते दामों मोल लिया था। यों कहिए कि यह पलटन का निकाला … Read more

दूध का दाम (हिंदी कहानी) : मुंशी प्रेमचंद

Doodh Ka Daam (Hindi Kahani) : Munshi Premchand अब बड़े-बड़े शहरों में दाइयाँ, नर्सें और लेडी डाक्टर, सभी पैदा हो गयी हैं; लेकिन देहातों में जच्चेखानों पर अभी तक भंगिनों का ही प्रभुत्व है और निकट भविष्य में इसमें कोई तब्दीली होने की आशा नहीं। बाबू महेशनाथ अपने गाँव के जमींदार थे, शिक्षित थे और … Read more

ठाकुर का कुआँ (हिंदी कहानी) : मुंशी प्रेमचंद

Thakur Ka Kuan (Hindi Kahani) : Munshi Premchand जोखू ने लोटा मुँह से लगाया तो पानी में सख्त बदबू आयी । गंगी से बोला- यह कैसा पानी है ? मारे बास के पिया नहीं जाता । गला सूखा जा रहा है और तू सड़ा पानी पिलाये देती है | गंगी प्रतिदिन शाम पानी भर लिया … Read more

पूस की रात ( प्रेमचंद )

हल्कू ने आकर स्त्री से कहा—सहना आया है, लाओ, जो रुपए रखे हैं, उसे दे दूँ, किसी तरह गला तो छूटे।मुन्नी झाड़ू लगा रही थी। पीछे फिरकर बोली—तीन ही तो रुपए हैं, दे दोगे तो कम्मल कहाँ से आवेगा? माघ-पूस की रात हार में कैसे कटेगी? उससे कह दो, फसल पर दे देंगे। अभी नहीं। … Read more

सद्गति ( हिंदी कहानी ) : मुंशी प्रेमचंद

Sadgati ( Hindi Kahani ) : Munshi Premchand दुखी चमार द्वार पर झाड़ू लगा रहा था और उसकी पत्नी झुरिया घर को गोबर से लीप रही थी। दोनों अपने-अपने काम से फुरसत पा चुके तो चमारिन ने कहा,‘‘तो जाके पंडित बाबा से कह आओ न ! ऐसा न हो, कहीं चले जाएँ।’’दुखी—‘‘हाँ जाता हूँ; लेकिन … Read more

गुल्ली-डंडा ( हिंदी कहानी ): मुंशी प्रेमचंद

Gulli -Danda ( Hindi Kahani ): Munshi Premchand हमारे अँग्रेजी दोस्त मानें या न मानें मैं तो यही कहूँगा कि गुल्ली-डंडा सब खेलों का राजा है। अब भी कभी लड़कों को गुल्ली-डंडा खेलते देखता हूँ, तो जी लोट-पोट हो जाता है कि इनके साथ जाकर खेलने लगूँ। न लान की जरूरत, न कोर्ट की, न … Read more

पंच परमेश्वर ( हिंदी कहानी ) : मुंशी प्रेमचंद

Panch Parmeshvar ( Hindi Kahani ) : Munshi Premchand जुम्मन शेख अलगू चौधरी में गाढ़ी मित्रता थी। साझे में खेती होती थी। कुछ लेन-देन में भी साझा था। एक को दूसरे पर अटल विश्वास था। जुम्मन जब हज करने गये थे, तब अपना घर अलगू को सौंप गये थे, और अलगू जब कभी बाहर जाते, … Read more

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