गलता लोहा ( शेखर जोशी )/ Galta Loha ( Shekhar Joshi )

मोहन के पैर अनायास ही शिल्पकार टोले की ओर मुड़ गए। उसके मन के किसी कोने में शायद धनराम लुहार के ऑफ़र की वह अनुगूँज शेष थी जिसे वह पिछले तीन-चार दिनों से दुकान की ओर जाते हुए दूर से सुनता रहा था। निहाई पर रखे लाल गर्म लोहे पर पड़ती हथौड़े की धप्-धप् आवाज़, … Read more

नमक का दारोगा ( हिंदी कहानी) : प्रेमचंद / Namak Ka Daroga : Premchand

जब नमक का नया विभाग बना और ईश्वरप्रदत्त वस्तु के व्यवहार करने का निषेध हो गया तो लोग चोरी-छिपे इसका व्यापार करने लगे। अनेक प्रकार के छल-प्रपंचों का सूत्रपात हुआ, कोई घूस से काम निकालता था, कोई चालाकी से। अधिकारियों के पौ-बारह थे। पटवारीगिरी का सर्वसम्मानित पद छोड-छोडकर लोग इस विभाग की बरकंदाजी करते थे। … Read more

हिंदी ( कक्षा 11) — आरोह व वितान

आरोह भाग 1 (गद्य खंड) नमक का दारोगा ( कहानी) : प्रेमचंद मियाँ नसिरुद्दीन ( रेखाचित्र ) : कृष्णा सोबती अपु के साथ ढाई साल ( संस्मरण ): सत्यजित राय विदाई संभाषण ( निबंध ) : बालमुकुंद गुप्त गलता लोहा ( शेखर जोशी ) स्पीति में बारिश ( कृष्णनाथ ) रजनी ( मन्नू भंडारी )/ … Read more

बच्चे काम पर जा रहे हैं ( राजेश जोशी )

( यहाँ NCERT की कक्षा 9वीं की हिंदी की पाठ्य पुस्तक ‘क्षतिज भाग 1’ में संकलित ‘बच्चे काम पर जा रहे हैं ( राजेश जोशी )’ अध्याय के मूल पाठ, व्याख्या तथा अभ्यास के प्रश्नों को दिया गया है | ) व्याख्या — यह कविता बाल मज़दूरी की गंभीर समस्या और उस पर समाज की … Read more

चंद्रकांत देवताले ( Chandrkant Devtale) का साहित्यिक परिचय

जीवन परिचय चंद्रकांत देवताले ( Chandrkant Devtale) हिंदी साहित्य के प्रमुख कवियों में से एक थे, जिनका जन्म 7 नवंबर 1936 को मध्य प्रदेश के बैतूल जिले के जौलखेड़ा गाँव में एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ। बचपन से ही साहित्यिक वातावरण में पलने वाले देवताले ने प्रारंभिक और उच्च शिक्षा इंदौर से प्राप्त की, जहाँ … Read more

आलोक धन्वा का साहित्यिक परिचय

जीवन परिचय आलोक धन्वा का जन्म 2 जुलाई 1948 को बिहार के मुंगेर जिले के बेलबिहमा गाँव में एक साधारण परिवार में हुआ। वे हिंदी साहित्य के सशक्त जनकवि हैं, जिन्होंने 1970 के दशक में नई कविता को सामाजिक चेतना से जोड़ा। उनकी पहली कविता ‘जनता का आदमी’ ने 1972 में ‘वाम’ पत्रिका में प्रकाशित … Read more

चाँद और कवि ( रामधारी सिंह दिनकर )

रात यों कहने लगा मुझसे गगन का चाँद,आदमी भी क्या अनोखा जीव है!उलझनें अपनी बनाकर आप ही फँसता,और फिर बेचैन हो जगता, न सोता है। जानता है तू कि मैं कितना पुराना हूँ?मैं चुका हूँ देख मनु को जनमते-मरतेऔर लाखों बार तुझ-से पागलों को भीचाँदनी में बैठ स्वप्नों पर सही करते। आदमी का स्वप्न? है … Read more

कुकुरमुत्ता ( सूर्यकांत त्रिपाठी निराला )

कुकुरमुत्ता भाग 1 एक थे नव्वाब, फ़ारस के मँगाए थे गुलाब।बड़ी बाड़ी में लगाए देशी पौधे भी उगाएरखे माली कई नौकर ग़ज़नवी का बाग़ मनहरलग रहा था। एक सपना जग रहा था साँस पर तहज़ीब की, गोद पर तरतीब की।क्यारियाँ सुंदर बनी चमन में फैली घनी।फूलों के पौधे वहाँ लग रहे थे ख़ुशनुमा।बेला, गुलशब्बो, चमेली, … Read more

हिंदी का व्यावहारिक व्याकरण ( Hindi Minor ) BA -1st Semester

विकारी शब्द : अर्थ व भेद – संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण, क्रिया ( Vikari Shabd : Arth Aur Bhed ) अविकारी शब्द : अर्थ व प्रकार उपसर्ग और प्रत्यय व्याकरणिक कोटियाँ : लिंग, वचन, पुरुष, कारक समास के भेद / प्रकार ( Samas Ke Bhed / Prakar ) सन्धि का अर्थ व प्रकार वाक्य : अर्थ, … Read more

सरदार पूर्ण सिंह का साहित्यिक परिचय

जीवन परिचय सरदार पूर्ण सिंह जिन्हें अध्यापक पूर्ण सिंह के नाम से जाना जाता है, का जन्म 17 फरवरी 1881 को एबटाबाद (वर्तमान पाकिस्तान) के सलहड़ गाँव में एक सिख परिवार में हुआ था। उनके पिता करतार सिंह राजस्व विभाग में कार्यरत थे, जबकि माता परमा देवी धार्मिक प्रवृत्ति की थीं। प्रारंभिक शिक्षा रावलपिंडी से … Read more

पीछे मत फेंकिये ( निबंध ) : बालमुकुंद गुप्त / Piche Mat Fenkiye ( Nibandh ) : Balmukund Gupt

‘पीछे मत फेंकिये’ ( निबंध ) का मूल पाठ माई लार्ड! सौ साल पूरे होने में अभी कई महीनों की कसर है। उस समय ईस्ट इण्डिया कम्पनी ने लार्ड कार्नवालिस को दूसरी बार इस देश का गवर्नर-जनरल बनाकर भेजा था। तबसे अब तक आप ही को भारतवर्ष का फिर से शासक बनकर आने का अवसर … Read more

‘बूढ़ी काकी’ कहानी की तात्विक समीक्षा / ‘Budhi Kaki’ Kahani Ki Tatvik Samiksha

मुंशी प्रेमचंद की कहानी ‘बूढ़ी काकी’ हिंदी साहित्य की एक मार्मिक कृति है, जो बुढ़ापे की लाचारी, पारिवारिक उपेक्षा और मानवीय संवेदनाओं को यथार्थवादी ढंग से उजागर करती है। कहानी-कला के छह प्रमुख तत्वों—कथावस्तु, पात्र एवं चरित्र-चित्रण, कथोपकथन या संवाद, देशकाल या वातावरण, उद्देश्य तथा भाषा-शैली—के आधार पर इसकी तात्विक समीक्षा निम्नलिखित है : (1) … Read more

‘मजदूरी और प्रेम’ निबंध का सारांश व मूल भाव या संदेश

सरदार पूर्ण सिंह का निबंध ‘मजदूरी और प्रेम’ हिंदी साहित्य की एक महत्वपूर्ण रचना है, जो श्रम की गरिमा, पवित्रता और प्रेम के साथ इसके संयोग को काव्यात्मक तथा दार्शनिक शैली में प्रस्तुत करता है। निबंध का उद्देश्य आधुनिक समाज में श्रम की उपेक्षा की आलोचना करना और प्रेमपूर्ण श्रम को ईश्वरीय बताना है। निबंध … Read more

साहित्य का उद्देश्य ( हिंदी निबंध ) : प्रेमचंद

यह निबंध वास्तव में 1936 में लखनऊ में आयोजित प्रगतिशील लेखक संघ के प्रथम अधिवेशन में प्रेमचंद द्वारा दिया गया अध्यक्षीय भाषण है | सज्जनो, यह सम्मेलन हमारे साहित्य के इतिहास में स्मरणीय घटना है। हमारे सम्मेलनों और अंजुमनों में अब तक आम तौर पर भाषा और उसके प्रचार पर ही बहस की जाती रही … Read more

नाखून क्यों बढ़ते हैं ( निबंध ) : हजारी प्रसाद द्विवेदी / Nakhoon Kyon Badhte Hain ( Nibandh ) : Hajari Prasad Dvivedi

बच्चे कभी-कभी चक्कर में डाल देनेवाले प्रश्न कर बैठते हैं। अल्पज्ञ पिता बड़ा दयनीय जीव होता है। मेरी छोटी लड़की ने जब उस दिन पूछ दिया कि आदमी के नाखून क्यों बढ़ते हैं, तो मैं कुछ सोच ही नहीं सका। हर तीसरे दिन नाखून बढ़ जाते हैं, बच्चे कुछ दिन तक अगर उन्हें बढ़ने दें, … Read more

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