अक्क महादेवी ( Akka Mahadevi )

( यहाँ NCERT की हिंदी की पाठ्य पुस्तक ‘आरोह भाग 1’ में संकलित कन्नड़ कवयित्री अक्क महादेवी के पदों का हिंदी अनुवाद सम्पूर्ण व्याख्या दी गई है | )

अक्क महादेवी

पद 1

हे भूख! मत मचल

प्यास, तड़प मत

हे नींद! मत सता

क्रोध, मचा मत उधल-पुथल

हे मोह! पाश अपने ढील

लोभ, मत ललचा

हे मद! मत कर मदहोश

ईर्ष्या, जला मत

ओ चराचर! मत चूक अवसर

आई हूँ संदेश लेकर चन्नमलिकार्जुन का | 1️⃣

व्याख्या – प्रस्तुत पद में कवयित्री अक्क महादेवी इंद्रियों पर नियंत्रण का संदेश देती है। इसमें कवयित्री इंद्रियों से आग्रह करती हुई भूख से कहती हैं कि तू मचलकर मुझे मत सता। सांसारिक प्यास से वे कहती हैं कि तू मन में और कुछ पाने की इच्छा मत जगा। नींद से कहती हैं कि हे नींद ! तू मानव को सताना छोड़ दे, क्योंकि नींद से उत्पन्न आलस्य के कारण वह प्रभु-भक्ति को भूल जाता है। क्रोध से कहती हैं कि हे क्रोध! तू उथल-पुथल मत मचा, क्योंकि तेरे कारण मनुष्य का विवेक व् बुद्धि नष्ट हो जाती है। वह मोह को कहती हैं कि वह अपने बंधन ढीले कर दे। क्योंकि उसके कारण मनुष्य दूसरे का अहित करने की सोचता है। लोभ से कहती हैं कि हे लोभ! तू मानव को ललचाना छोड़ दे। अहंकार से कहती हैं कि हे अहंकार! तू मनुष्य को अधिक पागल न बना। ईर्ष्या को मनुष्य को जलाना छोड़ देने का आग्रह करती हैं। वे सृष्टि के जड़-चेतन जगत् को संबोधित करते हुए कहती हैं कि तुम्हारे पास शिव-भक्ति का जो अवसर है, उससे चूकना मत, क्योंकि मैं शिव का संदेश लेकर तुम्हारे पास आई हैं। जड़ और चेतन सभी जीवों को इस अवसर का लाभ उठाना चाहिए।

पद 2

हे मेरे जूही के फूल जैसे ईश्वर

मँगवाओ मुझसे भीख

और कुछ ऐसा करो

कि भूल जाऊँ अपना घर पूरी तरह

झोली फैलाऊँ और न मिले भीख

कोई हाथ बढ़ाए कुछ देने को

तो वह गिर जाए नीचे

और यदि मैं झुकूँ उसे उठाने

तो कोई कुत्ता आ जाए

और उसे झपटकर छीन ले मुझसे | 2️⃣

व्याख्या – इस पद में कवयित्री ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण का भाव व्यक्त करती है। वह अपने अहंकार को नष्ट करके ईश्वर में समा जाना चाहती है। कवयित्री ईश्वर से प्रार्थना करती है कि हे जूही के फूल को समान कोमल व परोपकारी ईश्वर! आप मुझसे ऐसे-ऐसे कार्य करवाइए जिससे मेरा अहम् भाव नष्ट हो जाए। आप ऐसी परिस्थितियाँ उत्पन्न कीजिए जिससे मुझे भीख माँगनी पड़े। मेरे पास कोई साधन न रहे। आप ऐसा कुछ कीजिए कि मैं पारिवारिक मोह से दूर हो जाऊँ। क्योंकि घर का मोह सांसारिक चक्र में उलझने का सबसे बड़ा कारण है और घर के भूलने पर ईश्वर का घर ही लक्ष्य बन जाता है। वह आगे कहती है कि जब वह भीख माँगने के लिए झोली फैलाए तो उसे कोई भीख न दे। यदि कोई उसे कुछ देने के लिए हाथ बढ़ाए तो जो वह दे रहा हो वह वस्तु नीचे गिर जाए। इस प्रकार वह सहायता भी व्यर्थ हो जाए। उस गिरे हुए पदार्थ को वह उठाने के लिए झुके तो कोई कुत्ता उससे झपटकर छीनकर ले जाए। यहाँ कवयित्री त्याग की पराकाष्ठा को प्राप्त करना चाहती है। वह मान-अपमान के दायरे से बाहर निकलकर ईश्वर में विलीन होना चाहती है। सारे मोह-बंधनों से मुक्त होना चाहती हैं।

अभ्यास के प्रश्न ( अक्क महादेवी )

प्रश्न 1 – ‘लक्ष्य प्राप्ति में इंद्रियाँ बाधक होती हैं’ – इसके संदर्भ में अपने तर्क दीजिए।

उत्तर – इंद्रियां सबसे महत्वूर्ण तत्व हैं जिसके बिना मनुष्य की परिकल्पना असंभव है। इंद्रियाँ मनुष्य को भ्रमित करती हैं तथा उसे कर्महीनता की तरफ प्रेरित करती हैं। इसके लिए इंद्रियों पर नियंत्रण रखना आवश्यक है। किसी लक्ष्य को तभी प्राप्त किया जा सकता है जब मन में एकाग्रता हो तथा इंद्रियों को वश में रखकर परिश्रम किया जाए। प्रत्येक लक्ष्य प्राप्ति में इंद्रियाँ बाधक होती हैं। मनुष्य की इंद्रियों का कार्य है-स्वयं को तृप्त करना। इनकी तृप्ति के चक्कर में मनुष्य जीवन भर भटकता रहता है। विशेष रूप से ईश्वर प्राप्ति के मार्ग में इंद्रियां सबके बड़ी बाधा बन जाती हैं। यह साधक को संसार के मोह में उलझाए रखती है और उसे भक्ति के मार्ग बढ़ने नहीं देती। इस समय भूख, प्यास, लालसा, कामना, प्रेम आदि का अनुभव लक्ष्य से भटका देता है। इन सबका अनुभव इंद्रियाँ करवाती हैं। अतः वे ही बाधक हैं।

प्रश्न 2 – ‘ओ चराचर! मत चूक अवसर’ – इस पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए।

उत्तर – मानव-जीवन सौभग्य की बात है। जन्म – मरण एक चक्र है जो निरंतर चलता रहता है। इस चक्र से मुक्ति का एकमात्र उपाय भगवान की भक्ति है। यह पंक्ति अक्कमहादेवी अपने प्रथम वचन में उस समय कहती हैं जब वे अपने समस्त विकारों को शांत हो जाने के लिए कह चुकी हैं। इसका आशय है कि इंद्रियों के सुख के लिए भाग-दौड़ बंद करने के पश्चात् ईश्वर प्राप्ति का मार्ग सरल हो जाता है। अतः चराचर (जड़-चेतन) को संबोधित कर कहती हैं कि तू इस मौके को मत खोना। विकारों की शांति के पश्चात् ईश्वर प्राप्ति का अवसर तुम्हारे हाथ में है, इसका सदुपयोग करो। इस पंक्ति में अक्क महादेवी का कहना है कि प्राणियों ने जो जीवन प्राप्त किया है, उसे यदि वे शिव की भक्ति में लगाएँ तो उनका कल्याण हो जाएगा। समय बीत जाने के बाद कुछ नहीं मिलता। जीव इंद्रियों के वश में होकर सांसारिक मोह-माया में उलझा रहता है। वह इन चक्करों में उलझा रहा तो ईश्वर-प्राप्ति का अवसर चूक जाएगा। अत: समय रहते इसका मानव को लाभ उठा लेना चाहिए।

प्रश्न 3 – ईश्वर के लिए किस दृष्टांत का प्रयोग किया गया है। ईश्वर और उसके साम्य का आधार बताइए।

उत्तर – कविता में कवयित्री ईश्वर को अपने आराध्य मानती है। ईश्वर से अपना सब कुछ छीन लेने को कहती है जिससे कवयित्री का अंधरूनी अहंकार नष्ट हो सके। कवयित्री ने ईश्वर के लिए जूही के फूल का दृष्टांत दिया गया है। जूही का फूल कोमल, सात्विक, सुगंधित व श्वेत होता है। यह लोगों का मन मोह लेता है। वह बिना किसी भेदभाव के सबको खुशबू बाँटता है। इसी तरह ईश्वर भी सभी प्राणियों को आनंद देता है। वह कोई भेदभाव नहीं करता तथा सबका कल्याण करता है।

प्रश्न 4 – ‘अपना घर’ से क्या तात्पर्य है? इसे भूलने की बात क्यों कही गई है?

उत्तर – ‘अपना घर’ से तात्पर्य सांसारिक मोह-माया से है। व्यक्ति इस घर में सभी से लगाव महसूस करता है। वह इसे बनाने व बचाने के लिए निन्यानवे के फेर में पड़ा रहता है। संसार की वह चीजें जो हमें अपने-आप में उलझा लेती हैं, जिनसे हम प्रेम करते हैं वे हमारे ईश्वर प्राप्ति के मार्ग में बाधक होती हैं। क्योंकि भगवान की प्राप्ति के लिए इस मोह – माया के जीवन को त्यागना होगा। यह भगवान की भक्ति में सबसे बड़ी बाधा है।अपने घर से निकलने के बाद ही भगवान के घर में क़दम रखा जा सकता है। कवयित्री का मानना है कि मनुष्य को इस मोह – माया की दुनिया से दूर रहना चाहिए और भगवान की भक्ति करनी चाहिए ।भगवान की प्राप्ति के लिए इस मोह – माया के संसार का त्याग करना होगा तभी उसका जीवन सफल रहेगा ।

प्रश्न 5 – दूसरे वचन में ईश्वर से क्या कामना की गई है और क्यों?

उत्तर – दूसरे वचन में ईश्वर से सब कुछ छीन लेने की कामना की गई है। कवयित्री ईश्वर से प्रार्थना करती है कि वह उससे सभी तरह के भौतिक साधन, संबंध छीन ले। वह ऐसी परिस्थितियाँ उत्पन्न करे कि वह भीख माँगने के लिए मजबूर हो जाए। इससे उसका अहभाव नष्ट हो जाएगा। दूसरे, भूख मिटाने के लिए जब वह झोली फैलाए तो उसे भीख न मिले। अगर कोई देने के लिए आगे आए तो वह भीख नीचे गिर जाए। जमीन पर गिरी भीख को भी कुत्ता झपटकर ले जाए। वस्तुत: कवयित्री ईश्वर से सांसारिक लगाव को समाप्त करने के लिए कामना करती है ताकि वह ईश्वर में ध्यान एकाग्र भाव से लगा सके।

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