कक्षा 11 की हिंदी की पाठ्य-पुस्तक ‘आरोह भाग 1’ में संकलित ”सबसे ख़तरनाक” ( अवतार सिंह’पाश) का मूल पाठ अभ्यास के प्रश्नों सहित |

मेहनत की लूट सबसे ख़तरनाक नहीं होती
पुलिस की मार सबसे ख़तरनाक नहीं होती
गद्दारी-लोभ की मुट्ठी सबसे ख़तरनाक नहीं होती
बैठे-बिठाए पकड़े जाना – बुरा तो है
सहमी-सी चुप में जकड़े जाना – बुरा तो है
पर सबसे ख़तरनाक नहीं होता
कपट के शोर में
सही होते हुए भी दब जाना – बुरा तो है
किसी जुगनू की लौ में पढ़ना – बुरा तो है
मुट्ठियाँ भींचकर बस वक्त निकाल लेना – बुरा तो है
सबसे ख़तरनाक नहीं होता | 1️⃣
व्याख्या – इस काव्यांश में कवि ने हमें यह बताया है कि कौन-सी चीज़ कितनी ख़तरनाक है तथा क्या खतरनाक होता है और क्या खतरनाक नहीं होता। किसी के परिश्रम की कमाई की लूट खतरनाक नहीं होती, क्योंकि यह लूट फिर से पाई जा सकती है। पुलिस की मार खतरनाक नहीं होती। मगर किसी के साथ गद्दारी करना या किसी से रिश्वत लेना खतरनाक है। कवि कहते हैं कि यदि पुलिस आपको बिना किसी कारण के बेवजह गिरफ्तार करती है तो यह बुरी बात है। परन्तु किसी भी प्रकार के अन्याय को चुपचाप सहना खतरनाक है। कवि कहते हैं कि सही होते हुए भी छल व् धोखे को सहन करना गलत बात है, कोई जुगनू की रोशनी में पढ़ता है, अर्थात साधन के अभाव में अपनी पूरी जिंदगी गुजार देता है, यह गलत तो है परंतु यह सब कुछ खतरनाक होते हुए भी उतना खतरनाक नहीं है। कुछ बातें, कुछ चीजें बहुत खतरनाक होती है और यही खतरनाक चीजें आगे जाकर बुरा परिणाम देती है, जैसे कुछ किए बिना ही वक्त को बर्बाद करना।
सबसे ख़तरनाक होता है
मुर्दा शांति से भर जाना
न होना तड़प का सब सहन कर जाना
घर से निकलना काम पर
और काम से लौटकर घर आना
सबसे खतरनाक होता है
हमारे सपनों का मर जाना |
सबसे खतरनाक वह घड़ी होती है
आपकी कलाई पर चलती हुई भी जो
आपकी निगाह में रुकी होती है | (2)
व्याख्या – इस काव्यांश में कवि ने व्यक्ति की जीवन में आई खतरनाक स्थिति के बारे में बताया है। कवि कहते हैं, खुश रहते रहते अचानक से निर्जीव की तरह उदास हो जाना, चुपचाप सब कुछ बैचैनी सहन कर जाना, यह सब कुछ खतरनाक की निशानी है। कवि कहते हैं खतरनाक वह स्थिति है, जब व्यक्ति मनुष्य ना होकर मशीन बन जाता है। वह घर से काम पर जाता है और काम समाप्त कर घर आता है। इस बीच उसके जीवन में कुछ भी अच्छा करने की हिम्मत नहीं होती है। यह होती है, खतरनाक की स्थिति जब मनुष्य अपनी सारी इच्छा को समाप्त कर लेता है। और सिर्फ मशीन की तरह काम करता है। कवि कहते हैं कि सबसे खतरनाक वह स्थिति है जब मनुष्य अपने हाथों की घड़ी को चलता हुआ देखता तो है, लेकिन फिर भी वह समझता है कि उसके जीवन में कुछ भी अच्छा नहीं हो सकता। अगर दुख की घड़ी है, तो वह दुख की घड़ी हमेशा रहेगी। दूसरे शब्दों में यदि कहा जाए, तो मनुष्य परिवर्तन के साथ खुद को नहीं बदलता है और ना ही वह बदलने की इच्छा को प्रकट करता है।
सबसे खतरनाक वह आँख होती है
जो सब कुछ देखती हुई भी जमी बर्फ होती है
जिसकी नज़र दुनिया को मुहब्बत से चूमना भूल जाती है
जो चीजों से उठती अंधेपन की भाप पर ढुलक जाती है
जो रोज़मर्रा के क्रम को पीती हुई
एक लक्ष्यहीन दुहराव के उलटफेर में खो जाती है |
सबसे खतरनाक वह चाँद होता है
जो हर हत्याकांड के बाद
वीरान हुए आँगनों में चढ़ता है
पर आपकी आँखों को मिर्चों की तरह नहीं गड़ता है | (3)
व्याख्या – इस काव्यांश में कवि कहते हैं कि बिना किसी लक्ष्य के ज़िन्दगी जीना भी खतरनाक है। कवि अन्याय के खिलाफ आवाज़ उठाने के हक की बात करते हैं। इन पंक्तियों के माध्यम से कवि कहते हैं, कि सबसे खतरनाक वह आँख है, जो चुपचाप कुछ भी ना देखने का अभिनय करती हुई अन्याय को सहती है। कवि के अनुसार वे आँखें जमी हुई बर्फ के समान होती हैं, जो अपने सामने अच्छाई को भूलकर हर चीज को गलत नज़रिए से देखती है और यह स्थिति खतरनाक है। ऐसी आँखें लालची आँखें होती हैं, जो स्वार्थ में पड़कर लोभी बन जाती है, ऐसी स्थिति खतरनाक होती है। कवि यह भी कहते हैं कि वह जिंदगी बेकार है, जिस जिंदगी में कोई लक्ष्य ना हो। बिना लक्ष्य के जिंदगी जीना भी खतरनाक ही होता है। चांद को सुंदरता का प्रतीक माना जाता है। कवि कहते हैं कि ऐसी चांदनी की चमक भी खतरनाक होती है, जो अन्याय के खिलाफ आवाज नहीं उठाती। बल्कि गलत करने वालों के घर में अपनी रोशनी बिखेरने लगती है। बल्कि उसको तो अपनी रोशनी के ज़रिए गलत करने वालों को ठंडक के बजाए तकलीफ देनी चाहिए थी अर्थात गलत करने वालों के खिलाफ हमें आवाज़ बुलंद करनी चाहिए नहीं तो भविष्य में खतरनाक स्थिति बन जाती है।
सबसे खतरनाक वह गीत होता है
आपके कानों तक पहुँचने के लिए
जो मरसिए पढ़ता है
आतंकित लोगों के दरवाजों पर
जो गुंडे की तरह करता है |
सबसे खतरनाक वह रात होती है
जो जिंदा रुहों के आसमानों पर ढलती है
जिसमें सिर्फ उल्लू बोलते और हुआँ हुआँ करते गीदड़
हमेशा के अंधेरे बंद दरवाजों-चौगाठों पर चिपक जाते हैं |
सबसे खतरनाक वह दिशा होती है
जिसमें आत्मा का सूरज डूब जाए
और उसकी मुर्दा धूप का कोई टुकड़ा
आपके जिस्म के पूरब में चुभ जाए |
मेहनत की लूट सबसे ख़तरनाक नहीं होती
पुलिस की मार सबसे ख़तरनाक नहीं होती
गद्दारी-लोभ की मुट्ठी सबसे ख़तरनाक नहीं होती | (4)
व्याख्या – इस काव्यांश में कवि ने दुख से भरे गीतों को खतरनाक बताया है। कवि कहते हैं कि सबसे खतरनाक वो गीत है, जो मनुष्य के मन में दुख की तरह प्रभावित होता है। जो गीत मृत्यु के उपरांत सुनाया जाता है, वह गीत जीवित इंसान को सुनाकर उन्हें डराना खतरनाक की निशानी है। कवि के अनुसार ऐसे गीतों का कोई मतलब नहीं है। कवि के अनुसार रात बहुत खतरनाक होती है, जो जीवित इंसान के ऊपर आसमान में आशा के नहीं निराशा के बादल लाती है। यह निराशा के बादल उस जीवित व्यक्ति के घर के आंगन में विद्रोह की तरह शोक बनकर रह जाते हैं। जिनसे व्यक्ति कभी भी बाहर नहीं निकल पाता है। कवि ने अनुसार सबसे खतरनाक स्थिति वह है जब हम किसी भी समस्या से लड़ने की क्षमता नहीं रखते और हमारा स्वाभिमान भी मर जाता है। कवि इन पंक्तियों के माध्यम से कहते हैं कि सबसे खतरनाक वह दशा है, जिस दशा में मनुष्य की आत्मा डूब जाती है। ऐसी परिस्थिति में व्यक्ति अपने अंतर्मन की आवाज़ को नहीं सुन पाता है और एक मुर्दा व्यक्ति के समान बन जाता है। ऐसी स्थिति बेहद खतरनाक होती है। कवि को लगता है मनुष्य अन्याय को सहना ही उचित समझते हैं। जब तक वे अन्याय के खिलाफ आवाज़ नहीं उठाएंगे, तब तक उनके मन की अशांति भी दूर नहीं होगी। कवि यह भी कहते हैं कि मेहनत की कमाई लूटना खतरनाक नहीं होता, पुलिस की मार या गद्दारी भी खतरनाक नहीं होती। लेकिन खतरनाक वह स्थिति होती है, जब व्यक्ति के अंदर कुछ करने की क्षमता खत्म हो जाए। व्यक्ति परिस्थिति से लड़ने के बजाय, परिस्थिति से समझौता करने लगे। कवि के अनुसार सबसे खतरनाक स्थिति वह है, जब हमारा स्वाभिमान मर जाता है और हम अपने साथ होने वाले अत्याचार पर कुछ नहीं बोलते, कोई प्रतिक्रिया नहीं करते।
अभ्यास के प्रश्न ( सबसे ख़तरनाक )
प्रश्न 1 – कवि ने किस आशय से मेहनत की लूट, पुलिस की मार, गद्दारी-लोभ को सबसे खतरनाक नहीं माना?
उत्तर – कवि मेहनत की लूट, पुलिस की मार, गद्दारी-लोभ को सबसे खतरनाक नहीं मानता, क्योंकि इनका प्रभाव सीमित होता है तथा इनकी क्षति-पूर्ति हो सकती है। इन चीजों के विरुद्ध आवाज उठाई जा सकती है। इन चीजों को दूर करने के लिए संघर्ष किया जा सकता है। दूसरे, इन क्रियाओं में व्यक्ति की प्रतिरोधक क्षमता बनी रहती है। वह पूर्णत: नष्ट नहीं होती। ये स्थितियाँ बुरी तो हैं किंतु इन्हें बदला जा सकता है। अत: ये सब खतरनाक नहीं हैं। इनसे खतरनाक जीवन में कई और भी चीजें या बातें ऐसी हैं जो इन से भी ज्यादा खतरनाक है जैसे : निराशा में जीवन व्यतीत करना, उदास होकर रहना आदि।
प्रश्न 2 – सबसे खतरनाक शब्द के बार-बार दोहराए जाने से कविता में क्या असर पैदा हुआ?
उत्तर – “सबसे खतरनाक” शब्द के बार-बार उपयोग से कथन बहुत प्रभावी ढंग से व्यक्त हुआ है तथा खतरनाक बातों के प्रति पाठकों का ध्यान जाता है। यह शब्द उस तबाही को दर्शाता है जो समाज को निर्जीव बना रही है। “सबसे खतरनाक” शब्द का दोहराव पाठकों को दिलचस्पी देता है और कविता में उनकी जिज्ञासा बनी रहती है और उनका ध्यान विशेष रूप से खतरनाक चीजों की ओर आकर्षित होता रहता है। उनके अंदर खतरनाक और सबसे खतरनाक के बीच अंतर करने की क्षमता उत्पन्न होती है और वह समाज की परिस्थितियों पर गंभीरता से विचार कर पाते हैं। “सबसे खतरनाक” शब्द का बार-बार उपयोग हमें सचेत कर रहा है कि यदि अब हम नहीं जागे तो भविष्य अंधकारमय होगा।
प्रश्न 3 – कवि ने कविता में कई बातों को बुरा है न कहकर बुरा तो है कहा है। तो के प्रयोग से कथन की भंगिमा में क्या बदलाव आया है, स्पष्ट कीजिए।
उत्तर – कवि ने कविता में ‘बुरा तो है’ का प्रयोग किया है। ‘तो’ के प्रयोग से कथन की भंगिमा में बदलाव आया है। ‘तो’ शब्द का प्रयोग करके कवि ने बुरेपन की हद को बहुत हद तक कम कर दिया है। ‘बुरा है’ में स्पष्ट रूप से आरोप लगता है। यह अपने-आप में पूर्ण वाक्य हो जाता है तथा इसमें सुधार की गुंजाइश नहीं होती। ‘तो’ शब्द में बल है। यह बचाव है तथा पाठकों में जिज्ञासा उत्पन्न करता है। यह बताता है कि स्थितियाँ बुरी तो हैं, परंतु चरम सीमा पर नहीं हैं। यह बुरा है और बुरा तो है में तुलना करने में सहायक सिद्ध हुआ है।
प्रश्न 4 – मुर्दा शांति से भर जाना और हमारे सपनों का मर जाना इनको सबसे खतरनाक माना गया है। आपकी दृष्टि में इन बातों में परस्पर क्या संगति है और ये क्यों सबसे खतरनाक हैं?
उत्तर – ‘मुर्दा शांति से भर जाना’ का अर्थ है निष्क्रिय होना, जड़ होना या प्रतिक्रिया से शून्य होना है। ऐसी स्थिति खतरनाक होती है क्योंकि ऐसा व्यक्ति सामाजिक अन्याय के खिलाफ संघर्ष नहीं कर पाता। वह जीवित होते हुए भी एक मृत व्यक्ति की तरह ही होता है। इस प्रकार की तटस्थता बहुत ही खतरनाक होती है। ‘हमारे सपनों का मर जाना’ का अर्थ है – कुछ करने की इच्छा समाप्त होना। मनुष्य कल्पना करके ही नए-नए कार्य करता है तथा कार्य करता है। सपनों के मर जाने पर हम यथास्थिति में ही रहते हैं। ये दोनों स्थितियाँ खतरनाक हैं। इनसे समाज में अन्याय करने वाला प्रभावी रहता है। समाज का विकास अवरुद्ध हो जाता है।
प्रश्न 5 – सबसे खतरनाक वह घड़ी होती है/आपकी कलाई पर चलती हुई भी जो/आपकी निगाह में रुकी होती है। इन पंक्तियों में घड़ी शब्द की व्यंजना से अवगत कराइए।
उत्तर – यहां इन पंक्तियों में ‘घड़ी’ शब्द जीवन की गति से संबंधित है। जिस तरह घड़ी चलती रहती है उसी प्रकार जीवन भी प्रगतिशील और गतिशील होना चाहिए। निष्क्रियता और उदासीनता जीवन के लिए बहुत खतरनाक है। जीवन के जिस समय पर उदासीनता तथा निष्क्रियता रहती है उस वक्त जीवन आगे बढ़ने की जगह एक ही बिंदु पर ठहर जाता है। यहाँ ‘घड़ी’ शब्द के दो अर्थ हैं। एक अर्थ जीवन से है। जीवन घड़ी की तरह चलता रहता है। जब व्यक्ति में आगे बढ़ने की चाह समाप्त हो जाती है तब उसे ‘रुकी घड़ी’ कहा जाता है। दूसरा अर्थ निश्चित दिनचर्या से है। घड़ी एक निश्चित तरीके से चलती रहती है, उसी प्रकार व्यक्ति भी यंत्र के समान घर से काम व काम से घर पर आता है। उसके मन में उमंग नहीं है। उसकी जिंदगी ढरें पर चलती है और वह उसमें कोई बदलाव नहीं करना चाहता।
प्रश्न 6 – वह चाँद सबसे खतरनाक क्यों होता है जो हर हत्याकांड के बाद/आपकी आँखों को मिर्चे की तरह नहीं गड़ता है?
उत्तर – यहाँ ‘चाँद’ आस्था व विश्वास का पर्याय है। यह आस्था व विश्वास हर हत्याकांड के बाद व्यक्तियों को शांति का भाषण देती है। इसके कारण धर्म, जाति, संप्रदाय के नाम पर दंगा करने वाले शक्तिशाली बने रहते हैं। आम आदमी इन आस्थाओं, विश्वासों पर तर्क करे, तो समाज ठीक हो जाए, परंतु ऐसा नहीं होता।
कवि कहना चाहता है कि हत्याकांड का दोषी व्यक्ति हमारी आंखों में चुभना चाहिए परंतु ऐसे व्यक्ति लोगों की आंखों में खटकते नहीं है। जिन लोगों की आंखों में ऐसे हत्यारे व्यक्ति नहीं चुभते हैं उनकी संवेदना शून्य हो चुकी होती है जो वास्तविक रूप से खतरनाक होती है।
यह भी देखें
आरोह भाग 1 ( कक्षा 11) ( पूरी पुस्तक एक साथ )
आरोह भाग 1 ( गद्य खंड )
नमक का दारोगा ( हिंदी कहानी) : प्रेमचंद / Namak Ka Daroga : Premchand
मियाँ नसिरुद्दीन ( रेखाचित्र ) : कृष्णा सोबती
अपु के साथ ढाई साल ( संस्मरण ): सत्यजित राय
विदाई संभाषण ( निबंध ) : बालमुकुंद गुप्त
गलता लोहा ( शेखर जोशी )/ Galta Loha ( Shekhar Joshi )
स्पीति में बारिश ( कृष्णनाथ ) / Sptiti Mein Barish ( Krishan Nath )
रजनी ( मन्नू भंडारी )/ Rajani ( Mannu Bhandari )
जामुन का पेड़ ( कृश्न चंदर ) / Jamun Ka Ped ( Krishan Chandar )
भारत माता ( जवाहरलाल नेहरू ) / Bharat Mata ( Jawaharlal Nahru )
आत्मा का ताप ( सैयद हैदर रज़ा ) / Aatma Ka Taap ( Saiyad Haidar Raza )
आरोह भाग 1 ( काव्य खंड )
हम तो एक एक करि जांनां कबीर ( Kabir Ke Pad Class 11)
मेरे तो गिरधर गोपाल, दूसरो न कोई / मीरा( मीराबाई)
पथिक : रामनरेश त्रिपाठी ( Pathik : Ram Naresh Tripathi )
वे आँखें : सुमित्रानंदन पंत ( Ve Aankhen : Sumitranandan Pant )
घर की याद : भवानी प्रसाद मिश्र ( Ghar Ki Yad : Bhawani Prasad Mishra )
चंपा काले काले अच्छर नहीं चीन्हती : त्रिलोचन
साये में धूप ( दुष्यंत कुमार )
अक्क महादेवी ( Akka Mahadevi )
सबसे खतरनाक : पाश ( Sabse Khatarnak : Pash )
आओ मिलकर बचाएँ : निर्मला पुतुल ( Aao, Milkar Bachayen : Nirmala Putul )
वितान भाग 1 ( कक्षा 11)
▪️भारतीय गायिकाओं में बेजोड़ : लता मंगेशकर ( कुमार गन्धर्व )
▪️राजस्थान की रजत बूंदें ( अनुपम मिश्र ) / Rajasthan Ki Rajat Boonden ( Anupam Mishra )
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