कक्षा 11 की हिंदी की पाठ्य-पुस्तक 'आरोह भाग 1' में संकलित ''चंपा काले काले अच्छर नहीं चिन्हती " ( कवि त्रिलोचन) का मूल पाठ अभ्यास के प्रश्नों सहित |
चंपा काले काले अच्छर नहीं चीन्हती
मैं जब पढ़ने लगता हूँ वह आ जाती है
खड़ी खड़ी चुपचाप सुना करती है
उसे बड़ा अचरज होता है ;
इन काले चिन्हों से कैसे ये सब स्वर
निकला करते हैं | 1️⃣
व्याख्या – कवि चंपा नामक लड़की, जो की अनपढ़ है, उसकी निरक्षरता के बारे में बताते हुए कहता है कि चंपा काले-काले अक्षरों को नहीं पहचानती। अर्थात उसे अक्षर ज्ञान नहीं है, उसे पढ़ना नहीं आता। जब कवि पढ़ने लगता है तो वह वहाँ आ जाती है। वह उसके द्वारा बोले गए अक्षरों को चुपचाप खड़ी-खड़ी सुना करती है। उसे इस बात की बड़ी हैरानी होती है कि इन काले अक्षरों से ये सभी ध्वनियाँ कैसे निकलती हैं? कहने का तात्पर्य यह है कि वह अक्षरों की ध्वनि व अर्थ से हैरान होती है।
चंपा सुंदर की लड़की है
सुंदर ग्वाला है : गायें-भैंसें रखता है
चंपा चौपायों को लेकर
चरवाही करने जाती है
चंपा अच्छी है
चंचल है
न ट ख ट भी है
कभी-कभी उधम करती है
कभी-कभी वह कलम चुरा देती है
जैसे तैसे उसे ढूंढ कर जब लाता हूँ
पाता हूँ – अब कागज गायब
परेशान फिर हो जाता हूँ | 2️⃣
व्याख्या – कवि चंपा के विषय में बताता है कि वह सुंदर नामक एक ग्वाले की लड़की है। वह गाएँ-भैंसें रखता है। चंपा उन सभी पशुओं को प्रतिदिन चराने के लिए लेकर जाती है। वह बहुत अच्छी है और थोड़ी चंचल भी है। वह शरारतें भी करती है। कभी वह कवि की कलम चुरा लेती है। कवि किसी तरह उस कलम को ढूँढ़कर लाता है तो उसे पता चलता है कि अब कागज गायब हो गया है। कवि चंपा की इन शरारतों से कभी-कभी परेशान भी हो जाता है।
चंपा कहती है :
तुम कागद ही गोदा करते हो दिन भर
क्या यह काम बहुत अच्छा है
यह सुनकर मैं हँस देता हूँ
फिर चंपा चुप हो जाती है | 3️⃣
उस दिन चंपा आई, मैंने कहा कि
चंपा, तुम भी पढ़ लो
हारे गाढ़े काम सरेगा
गांधी बाबा की इच्छा है –
सब जन पढ़ना-लिखना सीखें
चंपा ने यह कहा कि
मैं तो नहीं पढ़ूंगी
तुम तो कहते थे गांधी बाबा अच्छे हैं
वे पढ़ने लिखने की कैसे बात कहेंगे
मैं तो नहीं पढूँगी | 4️⃣
व्याख्या – कवि कहता है कि चंपा को काले अक्षरों से कोई संबंध नहीं है। वह कवि से पूछती है कि तुम दिन-भर कागज पर लिखते रहते हो। क्या यह काम तुम्हें बहुत अच्छा लगता है। उसकी नजर में लिखने के काम की कोई महत्ता नहीं है। उसकी बात सुनकर कवि हँसने लगता है और चंपा चुप हो जाती है। एक दिन चंपा आई तो कवि ने उससे कहा कि तुम्हें भी पढ़ना सीखना चाहिए। मुसीबत के समय तुम्हारे काम आएगा। वह महात्मा गाँधी की इच्छा को भी बताता है कि गाँधी जी की इच्छा थी कि सभी आदमी पढ़ना-लिखना सीखें। चंपा कवि की बात का उत्तर देती है कि वह नहीं पढ़ेगी। आगे कहती है कि तुम तो कहते थे कि गाँधी जी बहुत अच्छे हैं। फिर वे पढ़ाई की बात क्यों करते हैं? चंपा महात्मा गाँधी की अच्छाई या बुराई का मापदंड पढ़ने की सीख से लेती है। वह न पढ़ने का निश्चय दोहराती है।
मैंने कहा कि चंपा, पढ़ लेना अच्छा है
ब्याह तुम्हारा होगा, तुम गौने जाओगी,
कुछ दिन बालम संग साथ रह चला जाएगा जब कलकत्ता
बड़ी दूर है वह कलकत्ता
कैसे उसे संदेसा दोगी
कैसे उसके पत्र पढ़ोगी
चंपा पढ़ लेना अच्छा है! 5️⃣
व्याख्या – कवि चंपा को पढ़ने की सलाह देता है तो वह स्पष्ट तौर पर मना कर देती है। फिर कवि चंपा को शिक्षा के लाभ गिनाता है। वह उसे कहता है कि तुम्हारे लिए पढ़ाई-लिखाई जरूरी है। एक दिन तुम्हारी शादी भी होगी और तुम अपने पति के साथ ससुराल जाओगी। वहाँ तुम्हारा पति कुछ दिन साथ रहकर नौकरी के लिए कलकत्ता चला जाएगा। कलकत्ता यहाँ से बहुत दूर है। ऐसे में तुम उसे अपने विषय में कैसे बताओगी? तुम उसके पत्रों को किस प्रकार पढ़ पाओगी? इसलिए तुम्हें पढ़ना चाहिए।
चंपा बोली : तुम कितने झूठे हो, देखा,
हाय राम, तुम पढ़-लिख कर इतने झूठे हो
मैं तो ब्याह कभी न करूंगी
और कहीं जो ब्याह हो गया
तो मैं अपने बालम को संग साथ रखूंगी
कलकत्ता मैं कभी न जाने दूंगी
कलकत्ते पर बाजार गिरे | 6️⃣
व्याख्या – कवि द्वारा चंपा को पढ़ने की सलाह पर वह उखड़ जाती है। वह कहती है कि तुम बहुत झूठ बोलते हो। तुम पढ़-लिखकर भी झूठ बोलते हो। जहाँ तक शादी की बात है, तो मैं शादी ही कभी नहीं करूंगी। और यदि कहीं शादी भी हो गई तो मैं अपने पति को अपने साथ रखेंगी। उसे कभी कलकत्ता नहीं जाने दूँगी। दूसरे शब्दों में, वह अपने पति का शोषण नहीं होने देगी। चंपा यहाँ तक कह देती है कि परिवारों को दूर करने वाले शहर कलकत्ते पर वज्र गिरे। वह अपने पति को कलकत्ता से दूर रखेगी।
अभ्यास के प्रश्न ( चंपा काले काले अच्छर नहीं चिन्हती )
प्रश्न 1 – चंपा ने ऐसा क्यों कहा कि कलकत्ता पर बजर गिरे?
उत्तर – चंपा नहीं चाहती थी कि उसका पति उसे छोड़कर कहीं दूर पैसा कमाने के लिए जाए। कवि ने उसे बताया कि कलकत्ता जो बहुत दूर है वहाँ लोग धन कमाने जाते हैं। परन्तु चंपा की दृष्टि में कलकत्ता शहर परिवारों को तोड़ने वाला है। यह प्रतीक है – शोषण का। इस शोषण से आम व्यक्ति का जीवन नष्ट हो जाता है। चंपा अपने पति से अलग नहीं होना चाहती थी। चंपा चाहती है कि कलकत्ते का अस्तित्व ही समाप्त हो जाए तो उसका बालम उसी के पास रहेगा। इसलिए वह कहती है कि कलकत्ते पर बजर गिरे।
प्रश्न 2 – चंपा को इस पर क्यों विश्वास नहीं होता कि गाँधी बाबा ने पढ़ने-लिखने की बात कही होगी?
उत्तर – चंपा के मन में यह बात बैठी हुई है कि शिक्षित व्यक्ति अपने घर को छोड़कर बाहर चला जाता है। इस कारण वह पढ़ाई-लिखाई को अच्छा नहीं मानती थी। दूसरी तरफ कवि का दिन-भर लिखते-पढ़ते रहना चंपा को अजीब-सा काम लगता है या यह भी कहा जा सकता है कि उसे बुरा लगता है, बेकार काम लगता है। गाँधी जी का ग्रामीण जीवन पर बहुत अच्छा प्रभाव है। वे लोगों की भलाई की बात करते हैं। अत: वह गाँधी जी द्वारा पढ़ने-लिखने की बात कहने पर विश्वास नहीं करती, क्योंकि उसके अनुसार पढ़ाई-लिखाई परिवार को तोड़ती है। उनसे लोगों का भला नहीं होता। यह गाँधी जी के चरित्र के विपरीत कार्य है।इसीलिए उसे विश्वास नहीं होता कि गांधी बाबा जैसे अच्छे इंसान पढ़ने-लिखने की बात कह सकते हैं।
प्रश्न 3 – कवि ने चंपा की किन विषेशताओं का उल्लेख किया है?
उत्तर – कवि ने चंपा की निम्नलिखित विशेषताओं का उल्लेख किया है – (1) वह निरक्षर है। उसे अक्षर मात्र काले चिह्न लगते हैं।
(2) वह सदैव निरक्षर रहना चाहती है।
(3) वह शरारती स्वभाव की है। वह कवि के कागज, पेन छिपा देती है।
(4) ह भोली है। वह कवि को पढ़ते हुए हैरानी से देखती रहती है।
(5) वह स्पष्टवक्ता है। वह अपनी बात को घुमा-फिराकर नहीं कहती।
(6) वह विद्रोही स्वभाव की है। उसे पता है कि शिक्षित व्यक्ति अपने परिवार को छोड़कर दूसरे शहर चला जाता है। अत: वह कहती है-कलकत्ता पर आपदा आए।
(7) वह मेहनती है। वह प्रतिदिन दुधारू पशुओं को चराती है।
प्रश्न 4 – आपके विचार में चंपा ने ऐसा क्यों कहा होगा कि मैं तो नहीं पढ़ेंगी?
उत्तर – मेरे विचार में चंपा एक ग्रामीण लड़की है जो दिन-भर प्रकृति की गोद में पशु चराने का काम करती है। स्वभाव से नटखट है और कवि को दिन-भर बैठकर लिखते-पढ़ते देखती है। उसे यह बुरा लगता है कि दिन-भर बैठे रहो। वह सोचती होगी कि पढ़ना-लिखना स्वच्छंदता में बाधक है। चंपा का विश्वास है कि पढ़-लिखकर व्यक्ति अपने परिवार को छोड़कर परदेश जाकर रहने लगता है। इससे घर बिखर जाते हैं। शिक्षित होकर लोग चालाक, घमंडी व कपटी हो जाते हैं। वे परिवार को भूल जाते हैं। महानगरों में जाने वाले लोगों के परिवार बिछोह की पीड़ा सहते हैं। इसलिए उसने कहा होगा कि वह नहीं पढ़ेगी।
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आरोह भाग 1 ( कक्षा 11) ( पूरी पुस्तक एक साथ )
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मेरे तो गिरधर गोपाल, दूसरो न कोई / मीरा( मीराबाई)
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वे आँखें : सुमित्रानंदन पंत ( Ve Aankhen : Sumitranandan Pant )
घर की याद : भवानी प्रसाद मिश्र ( Ghar Ki Yad : Bhawani Prasad Mishra )
चंपा काले काले अच्छर नहीं चीन्हती : त्रिलोचन
साये में धूप ( दुष्यंत कुमार )
अक्क महादेवी ( Akka Mahadevi )
सबसे खतरनाक : पाश ( Sabse Khatarnak : Pash )
आओ मिलकर बचाएँ : निर्मला पुतुल ( Aao, Milkar Bachayen : Nirmala Putul )
वितान भाग 1 ( कक्षा 11)
▪️भारतीय गायिकाओं में बेजोड़ : लता मंगेशकर ( कुमार गन्धर्व )
▪️राजस्थान की रजत बूंदें ( अनुपम मिश्र ) / Rajasthan Ki Rajat Boonden ( Anupam Mishra )
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