चिंता सर्ग ( कामायनी ) : जयशंकर प्रसाद ( भाग 2 )

(1) चिर-किशोर-वय,नित्यविलासी–सुरभित जिससे रहा दिगंतआज तिरोहित हुआ कहाँ वह मधु से पूर्ण अनंत वसंत?कुसुमित कुंजों में वे पुलकित प्रेमालिंगन हुए विलीन,मौन हुई हैं मूर्च्छित तानें और न सुन पड़ती अब बीन। प्रसंग : प्रस्तुत अवतरण जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित महाकाव्य ‘कामायनी’ के ‘चिंता सर्ग’ से अवतरित है | प्रस्तुत काव्यांश में जलप्रलय के बाद मनु … Read more

चिंता सर्ग ( कामायनी ) : जयशंकर प्रसाद ( भाग 1 )

(1) हिमगिरि के उत्तुंग शिखर पर, बैठ शिला की शीतल छाँह,एक पुरुष, भींगे नयनों से देख रहा था प्रलय प्रवाह ।नीचे जल था ऊपर हिम था, एक तरल था एक सघन,एक तत्व की ही प्रधानता-कहो उसे जड़ या चेतन । प्रसंग : प्रस्तुत अवतरण जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित महाकाव्य ‘कामायनी’ के ‘चिंता सर्ग’ से अवतरित … Read more

आधुनिक हिंदी काव्य ( एम ए प्रथम सेमेस्टर ) पेपर -1 ( KUK )

इकाई 1 चिंता सर्ग ( कामायनी ) : जयशंकर प्रसाद ( भाग 1 ) चिंता सर्ग ( कामायनी ) : जयशंकर प्रसाद ( भाग 2 ) चिंता सर्ग ( कामायनी ) : जयशंकर प्रसाद ( भाग 3 ) श्रद्धा सर्ग ( कामायनी ) : जयशंकर प्रसाद ( भाग 1 ) श्रद्धा सर्ग ( कामायनी ) … Read more

रीतिकाल के प्रसिद्ध कवि : केशव, चिंतामणि, मतिराम, भूषण, देव, पद्मकर

(1) केशवदास ( Keshavdas ) जीवन परिचय: केशवदास (1555-1617 ई.) रीतिकाल के प्रथम और सबसे महत्वपूर्ण कवियों में से एक थे। उनका जन्म ओरछा (मध्य प्रदेश) में एक सनाढ्य ब्राह्मण परिवार में हुआ था। वे बुंदेलखंड के राजा इंद्रजीत सिंह और बाद में राजा वीरसिंह देव के आश्रय में रहे। केशव को हिंदी साहित्य में … Read more

सूफ़ी काव्य धारा के प्रसिद्ध कवि : मुल्ला दाऊद, क़ुतुबन, मँझन, जायसी

(1) मुल्ला दाऊद जीवन परिचय: मुल्ला दाऊद (14वीं शताब्दी) हिंदी साहित्य के सूफी काव्य धारा के प्रथम कवि माने जाते हैं। उनका समय फिरोजशाह तुगलक (1351-1388 ई.) के शासनकाल से माना जाता है, और उनकी प्रमुख रचना चंदायन 1379 ई. में रचित हुई। मुल्ला दाऊद का जन्म और व्यक्तिगत जीवन के बारे में प्रामाणिक जानकारी … Read more

आदिकाल के प्रसिद्ध कवि : चंदबरदाई, नरपति नाल्ह, जगनिक, विद्यापति, स्वयंभू, अमीर खुसरो

(1) चंदबरदाई जीवन परिचय: चंदबरदायी या चंदवरदाई (12वीं शताब्दी) आदिकाल के सबसे प्रसिद्ध रासो कवि हैं, जिन्हें हिंदी साहित्य का प्रथम महाकवि माना जाता है। उनका जन्म और जीवनकाल ठीक-ठीक निर्धारित नहीं है, परंतु विद्वानों के अनुसार वे 12वीं शताब्दी में दिल्ली और अजमेर के चौहान शासक पृथ्वीराज तृतीय (1178-1192 ई.) के दरबारी कवि थे। … Read more

रीतिकाल की परिस्थितियाँ (1643-1843 ई.)

रीतिकाल (लगभग 1643-1843 ई., संवत 1700-1900) हिंदी साहित्य का वह युग है, जो श्रृंगारिक काव्य, काव्यशास्त्र और अलंकारों के प्रभुत्व के लिए जाना जाता है। यह काल भक्तिकाल की आध्यात्मिकता से भिन्न, दरबारी और सौंदर्यबोधी साहित्य पर केंद्रित था। रीतिकाल की साहित्यिक परिस्थितियाँ तत्कालीन राजनीतिक, सामाजिक-आर्थिक, धार्मिक और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि से गहराई से प्रभावित थीं। … Read more

संत कवि : नानक, रैदास और दादू दयाल

गुरु नानक (1469-1539 ) गुरु नानक, सिख धर्म के संस्थापक और भक्तिकाल के प्रमुख निर्गुण भक्ति कवि, हिंदी साहित्य में अपनी आध्यात्मिक गहनता, सामाजिक सुधार के संदेश और सरल काव्य शैली के लिए विख्यात हैं। उनका जन्म 1469 में तलवंडी (वर्तमान ननकाना साहिब, पाकिस्तान) में हुआ था। नानक की रचनाएँ मुख्य रूप से गुरु ग्रंथ … Read more

भक्तिकाल की परिस्थितियाँ

भक्तिकाल को हिंदी साहित्य का स्वर्ण युग कहा जाता है जिसकी समय-सीमा संवत 1375 से संवत 1700 (लगभग 1318-1643 ई.) तक मानी जाती है। यह काल भक्ति आंदोलन के उदय और प्रसार का काल था, जिसने हिंदी साहित्य को आध्यात्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से समृद्ध किया। भक्तिकाल की साहित्यिक परिस्थितियाँ राजनीतिक, सामाजिक, धार्मिक और … Read more

हिंदी साहित्य के इतिहास लेखन की समस्याएँ

हिंदी साहित्य के इतिहास लेखन की परंपरा 19वीं शताब्दी से प्रारंभ हुई, जिसमें विदेशी विद्वानों जैसे गार्सां द तासी और जॉर्ज ग्रियर्सन से लेकर भारतीय विद्वानों जैसे शिवसिंह सेंगर, मिश्र बंधु, रामचंद्र शुक्ल, हजारीप्रसाद द्विवेदी, डॉ. नगेन्द्र, रामकुमार वर्मा और गणपति चंद्र गुप्त ने योगदान दिया। इस परंपरा ने हिंदी साहित्य को व्यवस्थित और वैज्ञानिक … Read more

हिंदी के साहित्येतिहास लेखन की परंपरा

हिंदी साहित्य के इतिहास लेखन की परंपरा का विकास 19वीं और 20वीं शताब्दी में हुआ जिसमें विदेशी और भारतीय विद्वानों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया। यह परंपरा साहित्य को व्यवस्थित, विश्लेषणात्मक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से समझने का प्रयास है। कुछ उल्लेखनीय प्रयास निम्नलिखित हैं : गार्सां द तासी (Garcin de Tassy) फ्रेंच विद्वान गार्सां द तासी … Read more

हिंदी साहित्य का इतिहास ( एम ए प्रथम सेमेस्टर ) पेपर -2 ( KUK )

इकाई 1 इतिहास दर्शन और साहित्येतिहास दर्शन हिंदी के साहित्येतिहास लेखन की परंपरा हिंदी साहित्य के इतिहास लेखन की समस्याएँ हिंदी साहित्य के इतिहास का काल विभाजन और नामकरण आदिकाल की परिस्थितियां ( Aadikal Ki Paristhitiyan ) आदिकाल का नामकरण और सीमा निर्धारण ( Aadikaal Ka Naamkaran aur Seema Nirdharan) आदिकाल : प्रमुख कवि, रचनाएं … Read more

समकालीन हिंदी कविता की प्रमुख प्रवृत्तियाँ या विशेषताएँ

समकालीन हिंदी कविता की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं : (1) परंपरागत प्रभावों से मुक्ति : समकालीन हिंदी कविता ने छायावादी और रोमांटिक सौंदर्यबोध से मुक्ति पाई है, जो इसे अधिक यथार्थवादी बनाती है। यह कविता जीवन की कठोर वास्तविकताओं को सामने लाती है, आदर्शवाद से हटकर वर्तमान की जटिलताओं को दर्शाती है। कवि पारंपरिक प्रतीकों … Read more

समाचार : अर्थ, तत्त्व ( विशेषताएँ ) और लेखन शैली ( उलटा पिरामिड शैली )

समाचार वह सूचना होती है जो किसी ताज़ा, महत्वपूर्ण, रोचक या जन-सामान्य को प्रभावित करने वाली घटना के बारे में बताती है। यह वह जानकारी है जो जनता को देश, दुनिया, समाज, राजनीति, खेल, विज्ञान, व्यापार, मनोरंजन आदि से जुड़े हालिया घटनाक्रमों से अवगत कराती है। सरल शब्दों में — “समाचार वह सूचना है जो … Read more

भागी हुई लड़कियाँ ( आलोक धन्वा )

एक घर की ज़ंजीरें कितना ज़्यादा दिखाई पड़ती हैंजब घर से कोई लड़की भागती है क्या उस रात की याद आ रही हैजो पुरानी फ़िल्मों में बार-बार आती थी जब भी कोई लड़की घर से भागती थी?बारिश से घिरे वे पत्थर के लैंप पोस्ट सिर्फ़ आँखों की बेचैनी दिखाने भर उनकी रोशनी?और वे तमाम गाने … Read more

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