‘राम की शक्तिपूजा’ की केन्द्रीय संवेदना : शक्ति की मौलिक कल्पना या नारी-मुक्ति
‘राम की शक्तिपूजा’ की केन्द्रीय संवेदना का प्रसंग विवादास्पद है क्योंकि विभिन्न समीक्षकों ने इस संबंध में भिन्न-भिन्न व्याख्याएँ की हैं। नन्दकिशोर नवल का दावा है कि इस कविता का केन्द्रीय भाव ‘सीता की मुक्ति’ और सीता के प्रतीक के माध्यम से ‘नारी मुक्ति’ है। निराला गार्हस्थिक प्रेम के कवि हैं। उनके सम्पूर्ण साहित्य में … Read more