कुकुरमुत्ता ( सूर्यकांत त्रिपाठी निराला )
कुकुरमुत्ता भाग 1 एक थे नव्वाब, फ़ारस के मँगाए थे गुलाब।बड़ी बाड़ी में लगाए देशी पौधे भी उगाएरखे माली कई नौकर ग़ज़नवी का बाग़ मनहरलग रहा था। एक सपना जग रहा था साँस पर तहज़ीब की, गोद पर तरतीब की।क्यारियाँ सुंदर बनी चमन में फैली घनी।फूलों के पौधे वहाँ लग रहे थे ख़ुशनुमा।बेला, गुलशब्बो, चमेली, … Read more