सुनीता : हिंदी का प्रथम मनोविश्लेषणात्मक उपन्यास
जैनेंद्र कुमार का उपन्यास ‘सुनीता’ (1934) हिंदी साहित्य के इतिहास में एक युगांतरकारी कृति मानी जाती है। इसे हिंदी का पहला मनोविश्लेषणात्मक (Psychoanalytical) उपन्यास मानने के पीछे ठोस कारण हैं। प्रेमचंद युगीन उपन्यासों में जहाँ समाज, आर्थिक विषमता और बाह्य संघर्ष केंद्र में थे, वहीं जैनेंद्र ने ‘सुनीता’ के माध्यम से पहली बार हिंदी पाठक … Read more