काव्य में रहस्यवाद (निबन्ध) : आचार्य रामचन्द्र शुक्ल / Kavya Mein Rahasyavaad (Nibandh) : Acharya Ramchandra Shukla
[यह निंबध केवल इस उद्देश्य से लिखा गया कि ‘रहस्यवाद’ या ‘छायावाद’ की कविता के संबंध में भ्रांतिवश या जानबूझकर जो अनेक प्रकार की बे सिर पैर की बातों का प्रचार किया जाता है, वह बंद हो। कोई कहता है’यही वर्तमन युग की कविता है’, कोई कहता है’इसमें आजकल की आकांक्षाएँ भरी रहती हैं’ और … Read more