घर की याद : भवानी प्रसाद मिश्र ( Ghar Ki Yad : Bhawani Prasad Mishra )

आज पानी गिर रहा है, बहुत पानी गिर रहा है, रात भर गिरता रहा है, प्राण मन घिरता रहा है, बहुत पानी गिर रहा है, घर नजर में तिर रहा है, घर की मुझसे दूर है जो, घर खुशी का पूर है जो, 1️⃣ व्याख्या –– इन पंक्तियों में कवि अपने घर से दूर जेल … Read more

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