शब्दों की पवित्रता के बारे में ( चंद्रकांत देवताले )
रोटी सेंकती पत्नी से हँसकर कहा मैंनेअगला फुलका बिल्कुल चंद्रमा की तरह बेदाग़ हो तो जानूँउसने याद दिलाया बेदाग़ नहीं होता कभी चंद्रमा तो शब्दों की पवित्रता के बारे में सोचने लगा मैंक्या शब्द रह सकते हैं प्रसन्न या उदास केवल अपने सेवह बोली चकोटी पर पड़ी कच्ची रोटी को दिखातेयह है चंद्रमा जैसी दे … Read more