मुहावरा मूल रूप से अरबी भाषा का शब्द है, जिसका अर्थ है ‘अभ्यास’ या ‘बातचीत’। जब कोई वाक्यांश अपने सामान्य अर्थ को छोड़कर किसी विशेष अर्थ को प्रकट करता है तो उसे मुहावरा कहते हैं | इसका प्रयोग स्वतंत्र रूप से नहीं, बल्कि वाक्य के भीतर किया जाता है। जैसे: “अंगूठा दिखाना” का अर्थ शारीरिक रूप से अंगूठा दिखाना नहीं, बल्कि ‘वक्त पर साथ देने से मना करना’ है।
मुहावरे की प्रमुख परिभाषाएँ
डॉ. भोलानाथ तिवारी के अनुसार: “मुहावरा भाषा विशेष में प्रचलित उस वाक्यांश को कहते हैं जिसका अर्थ प्रत्यक्ष अर्थ से भिन्न और अक्सर लाक्षणिक होता है।”
बाबू श्यामसुंदर दास के अनुसार: “मुहावरा वह वाक्यांश है, जो अपने साधारण अर्थ को छोड़ कर विशेष अर्थ को प्रकट करता है।”
ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी (सामान्य भाषाई परिप्रेक्ष्य) के अनुसार: “मुहावरा शब्दों का वह समूह है जिसका अर्थ उसके अलग-अलग शब्दों के अर्थ से नहीं, बल्कि एक संयुक्त विशिष्ट अर्थ से निकलता है।”
मुहावरे की प्रमुख विशेषताएँ
(1) मुहावरा पूर्ण वाक्य नहीं होता। यह हमेशा वाक्य का एक हिस्सा (वाक्यांश) होता है।
(2) यह अपने सीधे (अभिधा) अर्थ को छोड़कर हमेशा लाक्षणिक या व्यंग्यात्मक अर्थ देता है।
(3) मुहावरे के मूल शब्दों को बदला नहीं जा सकता। जैसे: “नौ दो ग्यारह होना” को “आठ तीन ग्यारह होना” या ‘पानी-पानी होना को’ जल-जल होना’ नहीं लिख सकते।
(4) हिंदी के अधिकांश मुहावरों के अंत में ‘ना’ ध्वनि (जैसे: होना, करना, देना) जुड़ी होती है।
(5) वाक्य में प्रयोग करते समय मुहावरे की क्रिया का रूप कर्ता, लिंग और वचन के अनुसार बदल जाता है।
(6) ये कम से कम शब्दों में बहुत बड़ी और गहरी बात कहने की क्षमता रखते हैं।
(7)मुहावरे किसी समाज के लंबे अनुभव, इतिहास और जीवन शैली से पैदा होते हैं।
निष्कर्ष
निष्कर्षतः मुहावरा ऐसा वाक्यांश होता है जो शब्दों के सामान्य अर्थ से भिन्न अर्थ प्रकट करता है | मुहावरे किसी भी भाषा की अमूल्य निधि होते हैं। ये भाषा को अधिक सजीव, प्रभावशाली, गतिशील और आकर्षक बनाते हैं। इनके प्रयोग से साधारण सी बात भी गंभीर और रोचक हो जाती है। यह भाषा की वह शक्ति है जो कम शब्दों में गहरे भाव व्यक्त करने की क्षमता रखती है।