श्रवण का अर्थ व प्रकार

श्रवण संप्रेषण का महत्वपूर्ण अंग है | श्रवण वह प्रक्रिया है जिसमें व्यक्ति सामने वाले की बात को ध्यानपूर्वक सुनकर उसका अर्थ समझता है। इसमें केवल कानों से सुनना ही नहीं, बल्कि मन और बुद्धि से समझना भी शामिल होता है। प्रभावी श्रवण से संदेश का सही अर्थ ग्रहण किया जा सकता है। यह संप्रेषण … Read more

श्रवण संप्रेषण का अर्थ व श्रवण के मार्ग में बाधाएँ

श्रवण संप्रेषण वह प्रक्रिया है जिसमें व्यक्ति सामने वाले की बात को ध्यानपूर्वक सुनकर उसका अर्थ समझता है। इसमें केवल कानों से सुनना ही नहीं, बल्कि मन और बुद्धि से समझना भी शामिल होता है। प्रभावी श्रवण से संदेश का सही अर्थ ग्रहण किया जा सकता है। यह संप्रेषण को सफल और सार्थक बनाता है। … Read more

श्रवण संप्रेषण का अर्थ व उद्देश्य

श्रवण संप्रेषण का अर्थ — श्रवण संप्रेषण वह प्रक्रिया है जिसमें संदेश को ध्यानपूर्वक सुनकर समझा जाता है। इसमें केवल सुनना ही नहीं, बल्कि अर्थ को ग्रहण करना भी शामिल होता है। जब कोई व्यक्ति सामने वाले की बात ध्यान से सुनता है और सही प्रतिक्रिया देता है, तो उसे प्रभावी श्रवण संप्रेषण कहा जाता … Read more

व्यक्तित्व का अर्थ और व्यक्तित्व-विकास के तत्त्व ( प्रभावित करने वाले तत्त्व )

व्यक्तित्व का अर्थ — व्यक्तित्व से आशय व्यक्ति के बाहरी और आंतरिक गुणों के समग्र रूप से है। इसमें व्यक्ति का स्वभाव, व्यवहार, विचार, भावनाएँ और बोलचाल शामिल होते हैं। व्यक्ति दूसरों के सामने जैसा दिखाई देता और व्यवहार करता है, वही उसका व्यक्तित्व कहलाता है। व्यक्तित्व विकास के तत्त्व व्यक्तित्व विकास के तत्त्व या … Read more

व्यक्तित्व का अर्थ व विशेषताएँ ( प्रकृति या स्वरूप )

व्यक्तित्व का अर्थ (Meaning of Personality) ‘व्यक्तित्व’ को अंग्रेजी में Personality कहते हैं, जो लैटिन शब्द ‘Persona’ (परसोना) से बना है। प्राचीन काल में इसका अर्थ ‘नकाब’ या ‘मुखौटा’ होता था जिसे नाटक के पात्र पहनते थे। साधारण शब्दों में, व्यक्तित्व केवल व्यक्ति का बाहरी रूप या रंग-रूप नहीं है, बल्कि उसके शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और संवेगात्मक गुणों का … Read more

संप्रेषण का अर्थ व प्रकार ( मौखिक व गैर-मौखिक/ अमौखिक संप्रेषण )

संप्रेषण का अर्थ — संप्रेषण वह प्रक्रिया है जिसके माध्यम से एक व्यक्ति अपने विचार, भावनाएँ और सूचनाएँ दूसरे व्यक्ति तक पहुँचाता है। इसमें संदेश भेजने वाला, संदेश, माध्यम और प्राप्त करने वाला शामिल होता है। संप्रेषण का मुख्य उद्देश्य आपसी समझ विकसित करना है। यह सामाजिक, शैक्षिक और व्यावसायिक जीवन का आधार है। प्रभावी … Read more

हिंदी भाषा एवं संप्रेषण : मौखिक संप्रेषण ( Level 2) ( BA 2nd Semester Kuk )

इकाई 1 ▪️संप्रेषण : अर्थ, परिभाषा, विशेषताएँ /प्रकृति या स्वरूप ▪️संप्रेषण का अर्थ एवं इसके तत्त्व ( संप्रेषण की प्रक्रिया ) ▪️संप्रेषण का अर्थ एवं उसका महत्त्व / उपयोगिता / उद्देश्य ▪️प्रभावी संप्रेषण के लाभ या उपयोगिता ▪️संप्रेषण के उपकरण (परंपरागत और आधुनिक) ▪️संप्रेषण का अर्थ व प्रकार ( मौखिक व गैर-मौखिक/ अमौखिक संप्रेषण ) … Read more

संप्रेषण के उपकरण (परंपरागत और आधुनिक)

संप्रेषण वह प्रक्रिया है जिसके माध्यम से एक व्यक्ति अपने विचार, भावनाएँ और सूचनाएँ दूसरे व्यक्ति तक पहुँचाता है। इसके द्वारा आपसी समझ, सहयोग और सामाजिक संपर्क स्थापित होता है। यह मानव जीवन की एक आवश्यक प्रक्रिया है। संप्रेषण के उपकरण संप्रेषण के उपकरणों को दो भागों में बाँटा जा सकता है — (क ) … Read more

संप्रेषण का अर्थ एवं उसका महत्त्व / उपयोगिता / उद्देश्य

संप्रेषण वह प्रक्रिया है जिसके माध्यम से एक व्यक्ति अपने विचार, भावनाएँ और सूचनाएँ दूसरे व्यक्ति तक पहुँचाता है। इसमें संदेश भेजने वाला और प्राप्त करने वाला दोनों सक्रिय भूमिका निभाते हैं। यह आपसी समझ और सहयोग का आधार है। संप्रेषण का महत्त्व (1) सामाजिक संबंधों को मजबूत बनाता है — संप्रेषण से लोगों के … Read more

संप्रेषण का अर्थ एवं इसके तत्त्व ( संप्रेषण की प्रक्रिया )

संप्रेषण वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा एक व्यक्ति अपने विचार, भावनाएँ और सूचनाएँ दूसरे व्यक्ति तक पहुँचाता है तथा दूसरा व्यक्ति उन्हें समझता है। यह विचारों के आदान-प्रदान की एक प्रभावी सामाजिक प्रक्रिया है। संप्रेषण के प्रमुख तत्त्व संप्रेषण के छह प्रमुख तत्त्व हैं जिनके माध्यम से संप्रेषण की प्रक्रिया पूरी होती है — (1) … Read more

संप्रेषण : अर्थ, परिभाषा, विशेषताएँ /प्रकृति या स्वरूप

संप्रेषण वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा एक व्यक्ति अपने विचार, भावनाएँ, सूचना या संदेश दूसरे व्यक्ति तक पहुँचाता है और दूसरा व्यक्ति उसे समझता है। यह विचारों के आदान-प्रदान की प्रक्रिया है। संप्रेषण शब्द संस्कृत भाषा के “सम् + प्रेषण” से बना है।सम् का अर्थ है — पूर्ण रूप से / साथ मेंप्रेषण का अर्थ … Read more

अध्याय 4 : विचारक, विश्वास और इमारतें ( कक्षा 12 इतिहास )

प्रश्न 1. क्या उपनिषदों के दार्शनिकों के विचार नियतिवादियों और भौतिकवादियों से भिन्न थे? अपने जवाब के पक्ष में तर्क दीजिए। उत्तर — उपनिषद भारतीय दर्शन का बहुत महत्त्वपूर्ण हिस्सा हैं। इनमें जीवन, मृत्यु, आत्मा, ब्रह्म और मोक्ष जैसे प्रश्नों पर गंभीर चिंतन मिलता है। उपनिषदों के दार्शनिकों ने यह माना कि हर व्यक्ति के … Read more

अध्याय 3 : बंधुत्व, जाति तथा वर्ग ( कक्षा 12 इतिहास )

प्रश्न 1. स्पष्ट कीजिए कि विशिष्ट परिवारों में पितृवंशिकता क्यों महत्वपूर्ण रही होगी? उत्तर — पितृवंशिकता वह व्यवस्था थी जिसमें वंश का पता पिता से पुत्र और आगे पौत्र तक चलता था। कुलीन परिवारों के लिए यह इसलिए महत्वपूर्ण थी—इससे तय होता था कि पिता की मृत्यु के बाद संपत्ति और सत्ता किसे मिलेगी।अगर पुत्र … Read more

अध्याय 2 : राजा, किसान और नगर ( कक्षा 12 इतिहास )

प्रश्न 1. आरंभिक ऐतिहासिक नगरों में शिल्पकला के उत्पादन के प्रमाणों की चर्चा कीजिए। हड़प्पा के नगरों के प्रमाण से ये प्रमाण कितने भिन्न हैं? उत्तर– हालाँकि इन ऐतिहासिक नगरों में आज भी लोग रहते हैं, इसलिए उनकी पूरी खुदाई करना कठिन है, फिर भी यहाँ से कई कलाकृतियाँ मिली हैं। ये कलाकृतियाँ बताती हैं … Read more

विश्व इतिहास के कुछ विषय ( भाग 2,कक्षा 12)

एनसीईआरटी ( NCERT ) की कक्षा बारहवीं की इतिहास पाठ्यपुस्तक ‘विश्व इतिहास के कुछ विषय, भाग 2’ के अंतर्गत सम्मिलित सभी अध्यायों के अभ्यास प्रश्नों के साथ-साथ अन्य महत्वपूर्ण परीक्षा-उपयोगी प्रश्नों को एक ही स्थान पर संकलित किया गया है। इस संकलन का उद्देश्य विद्यार्थियों को अलग-अलग स्रोतों पर निर्भर हुए बिना, सम्पूर्ण और सुव्यवस्थित … Read more

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