साये में धूप ( दुष्यंत कुमार )
कहाँ तो तय था चिरागाँ हरेक घर के लिए, कहाँ चिराग मयस्सर नहीं शहर के लिए | 1️⃣ व्याख्या – उपरोक्त पंक्तियों में उन नेताओं पर व्यंग्य किया है जो चुनाव के वक्त जनता को रंग-बिरंगे, लोक-लुभावने सपने दिखाते हैं मगर सत्ता में आते ही जनता से किए वादों को भूल जाते हैं। प्रस्तुत पंक्तियों … Read more